प्रवेश परीक्षा के लिए बढ़ती संख्या और घटती सीट, प्रारंभिक तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था की दुर्गति का सबूत!

शाहनवाज़ भारतीय

Asia Times News Desk

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ते हैं प्रवेश परीक्षाओं की स्थिति जटिल होते जाती है! सर्वप्रथम जब बच्चा दो से तीन वर्ष का होता है तो नर्सरी स्कूलों में माता-पिता अपने बच्चों के प्राथमिक शिक्षा के लिए कतारवध हो जाते हैं! बच्चा अच्छे स्कूल में प्रवेश पा सके, इसके लिए लोग लाखों ख़र्च करने को तैयार रहते हैं! फिर जब बच्चा 12वीं पास करता है तो अविभावकगण लाखों ख़र्च कर ट्यूशन और कोचिंग करवाते हैं ताकि उनके संतानों को एक अच्छे विश्विद्यालय में प्रवेश मिल सके;और पढ़ाई पूरी होने पर पुनः रोजगार के लिए भागमभाग!
ज़रा सोचिए कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसर का क्या हाल है! मेरे कहने का सीधा अभिप्राय यह है कि जब संविधान की धारा 21 (क) यह कहता है कि, “ऐसे ढंग से जैसाकि राज्‍य कानून द्वारा निर्धारित करता है, मौलिक अधिकार के रूप में छह से चौदह वर्ष के आयु समूह में सभी बच्‍चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है।” आगे अनुच्छेद 45 यह कहता है कि “राज्य को तब तक सभी बच्चों की शुरुआती देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था करने के लिए प्रयास करना होगा जब तक वह छह साल की आयु का नहीं हो जाता है।”
अब यहाँ तर्कसंगत बात यह है कि जब 6 से 14 वर्ष (लगभग 10वी तक) तक मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, जिसमें सरकार की संवैधानिक जिम्मेवारी है कि इसका प्रावधान करें तो धरातल पर यह पूर्णरूपेण लागू क्यों नहीं! जब नीतिनिदेशक तत्त्व (धारा 45) में राज्यों को 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की शरुआती देखभाल करने को कहा गया है तो कोई मुख्यमंत्री यह क्यों कहता है कि अब लोग हमें बच्चे पालने भी कहने लगेंगे!
 ख़ैर छोड़िए मुद्दे पर आते हैं, जब हमारा बच्चा 10वीं पास हो जाता है तो फिर उसे आगे पढ़ने के लिए प्रवेश परीक्षा क्यूँ? यह किसकी विफलता है? क्या सरकारी विद्यालयों में ठीक से पढ़ाई नहीं होती या आगे की पढ़ाई के लिए सरकार के पास ज़्यादा विश्वविद्यालय नहीं हैं; सीटें कम और बच्चे ज़्यादा होंगे तो उन्हें किसी बहाने तो छांटना होगा! अगर हमारे बच्चे 12 वर्ष तक सरकारी विद्यालयों में पढ़कर भी इस लायक़ नहीं कि उसकी आगे की पढ़ाई किसी सरकारी विश्विद्यालय में हो पाए तो इसका जिम्मेवार कौन?  जी, यह हाल पढ़ने के लिए है नौकरी पाने के लिए नहीं! नौकरियों का क्या हाल है यह आप और हम अच्छी तरह जानते हैं! मैं पकौड़े बेचने की बात नहीं कर रहा, रोजगार और नौकरी में फर्क़ है!
हम सब यह जानते हैं कि 10वी और 12वी के परीक्षा के बाद लाखों विद्यार्थी आगे की पढ़ाई के लिए फॉर्म भरेंगे तो हम आपको फॉर्म भरने का तरीक़ा बताते चलें!
1. फॉर्म भरने से पहले उसे शुरू से अन्त तक पढ़ें!
2. बिना भरे ही सर्प्रथम फॉर्म की फोटोकॉपी करा लें!
3. जहाँ समझ ना आए अपने किसी साथी या बड़ों से सहायता लें, पर फॉर्म ख़ुद भरें!
5. ज़रूरी कागज़ात एक जगह जमा कर लें!
6. पहले फोटोकॉपी वाली शीट को भरें, अगर सही से भरा गया हो तो उसी अनुसार ओरिजनल कॉपी भी भर लें!
7. फॉर्म भरने के पश्चात भी एक बार पूरे फॉर्म को दुबारा पढ़ें! कहीं ग़लती होने पर उसे सुधार लें!
8. जिसे भेजना हो उसका और अपना पता मोबाईल नम्बर के साथ लिखें! यथासंभव ख़ुद से ही फॉर्म जमा करें!
9. फॉर्म जमा करने के बाद प्राप्ति प्रति ज़रूर लें!
10. अगर ऑनलाइन जमा करना हो तो अपना ही ईमेल और मोबाइल नम्बर दें, तथा यथासंभव अपने या अपने घरवालों में से ही किसी के बैंक एकाउंट से पैसा पे करें; ऑनलाइन पे करते वक़्त सावधान रहें कि कहीं आपके एकाउंट संबंधित जानकारी किसी और को ना चली जाए!
लेखक: शोध छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया

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