फ़ेसबुक द्वारा की गई डेटा चोरी का क्या है पूरा मामला?

पेश है एशिया टाइम्स की खास रिपोर्ट हस्सान मेहदी की जुबानी

Hassan Mehdi

खास रिपोर्ट:- पूरी दुनिया में #फेसबुक को लेकर एक हलचल मच गयी है एक हैश टैग चलाया जा रहा है #deletefacebook इसका मतलब ये कि फेसबुक को बंद किया जाये , इसके समर्थन में बड़े बड़े देश और पूरी दुनिया की जानी मानी हस्तियां आ गई है , खुद whatsaap के #brian_acton ने tweet किया है its time to #deletefacebook

अब सवाल ये पैदा होता है फेसबुक ने ऐसी कौन सी गलती कर दी है ,आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि लोगों ने इसके लिए पूरी दुनिया भर में हंगमा कर रखा है ,जो आज चर्चा का विषय बना हुआ है मैंने इस पूरे मामले में खोजबीन किया जिससे कुछ बाते निकल कर सामने आई हैं जो मै आपके सामने रख रहा हूँ .

असल में ये पूरी कॉन्ट्रोवर्सी डोनाल्ड ट्रम्प की जीत से जुड़ी है , 28 साल का एक लड़का है जिसका नाम Chirstopher Wylie है इस ने इस पूरे मामले का खुलासा किया है कि ब्रिटेन कि एक प्राइवेट डेटा फर्म कंपनी है Cambridge Analytica जिसके मालिक Robert Mercer हैं, जो डोनाल्ड ट्रम्प कि पार्टी रिपब्लिकन को डोनेशन भी देते रहे हैं

इन्होने एक मोबाइल एप्लीकेशन (“thisisyourdigitallife”) के ज़रिये 5 करोड़ अमरीकी फेसबुक यूज़र्स को बड़ी ही चालाकी, पैसों के लालच देकर और तमाम हथकंडे अपना कर अपने इस एप को इन्सटाल करवा कर फेसबुक से लिंक करा लिया जिससे यूज़र की निजी जानकारी को आसानी से इस एप के मध्यम से निकाला जा सके।

इस एप ने उन 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का सारा का सारा पर्सनल डेटा निकाल लिया, न कि सिर्फ नाम , पता , मोबाइल नंबर , लोकेशन और ईमेल ऐड्रेस के बल्कि उनके कितने फ्रेंड है ,उन फ्रेंड्स का क्या प्रोफाइल है इस काम को किया एक बड़े साइकोलॉजीकल प्रोफेसर Dr.Aleksandar Kogan ने, इन्होने सारा डेटा निकाल कर Cambridge Analytica को 8 लाख डालर में बेच दिया , इस कम्पनी ने इस डेटा से पर्सनालिटी प्रोफाइल बनाया जिससे पता चल सके कि लोगों कि पसंद क्या है ? वोह किन चीज़ों पर, किन पोस्ट्स पर लाइक कमेन्ट और शेयर कर रहे हैं , क्या पसंद है क्या नहीं है क्या खरीद रहे हैं क्या खा रहे हैं जिससे आने वाले इलेक्शन में लोगों कि पंसद न पसंद के अनुरूप चीज़े तय की जा सके हैं , लोग क्या देख कर चुनाव में वोट करेंगे , किस तरह कि बाते लोग फेसबुक पर कर रहे हैं, यही सब देख कर उनका साइकोलॉजीकल प्रोफाइल तैयार किया गया

अब उनको चुनाव से ठीक कुछ दिन पहले से उनकी मानसिकता अनुरूप उनको ऐड दिखाए गए जो ट्रम्प को सपोर्ट करते थे उनसे ट्रम्प कि पार्टी के लिए डोनेशन के लिए उकसाया गया , जो काफी key issue थे उन पर फोकस किया गया , कहाँ कितने लोग है उसी हिसाब से चुनावी रैलियां कि गई जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग आये वोह ट्रम्प के प्रति सहानुभूति रखें , मदद करें , जो भी बाते. ट्रम्प ने कही चाहे वोह प्रोटेक्शन , अमेरिका फर्स्ट , जॉब लेकर आऊंगा , दूसरे देश कि कंपनी को नहीं आने दूंगा इन सब चीज़ों को बड़े लेवल पर प्रमोटे किया गया यानी सीधे सीधे शब्दों में 5 करोड़ लोगों का ब्रेन वाश किया गया और डोनाल्ड ट्रम्प कि जीत में ये सारी चीज़े काफी कारगर भी साबित हुई .

वाल स्ट्रीट का कहना इस पूरे मामले कि इन्वेस्टीगेशन Robert Mueller कर रहे थे जो खुद अपने देश और ट्रम्प कि साख बचाने के लिए उन्होंने उल्टा Cambridge Analytica को कहा कि अपने डाक्यूमेंट्स में कह दो ये काम रशिया के कहने पर किया है अमेरिका के चुनाव में रशिया ने हस्तक्षेप किया था न कि कोई और , चूंकि रूस अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है इससे लोग आसानी से यक़ीन भी कर लेंगे ।

अब फेसबुक जब पकड़ा गया तो इसका चारों तरफ विरोध शुरू हुआ , हैश टैग चला तब फेसबुक को अपना स्टैंड क्लियर करना पड़ा दुनिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी कि हमने किसी भी नियम का उलंघन नही किया है जिस एप thisisyourdigitallife की बात हो रही है उसको तो 2015 में ही अपने फेसबुक से हटा दिया था क्यूंकि ये एप ज़रूरत से ज्यादा डेटा एक्सेस कर रहा था जो कि कानूनों का हनन था दूसरी तरफ फेसबुक ये भी कह रहा है लोगों ने अपनी मर्ज़ी से डेटा दिया है कोई पासवर्ड ,कोई सेंसटिव इन्फोर्मेशन हैक नहीं किया गया , उसका कहना फेसबुक इसमें बिलकुल दोषी नहीं है उसने Chirstopher Wylie और Cambridge Analytica को भी बैन कर दिया है I

अब #Facebook कि पूरी दुनिया में बदनामी हो रही है लोगों को ये समझ आ रहा है आज के समय में डेटा सबसे बड़ी करेंसी बन चूका है , अनुमान लगाया जा रहा है और भारत के पिछले लोकसभा और कुछ विधान सभा के इलेक्शन को काफी हद तक इसी कि बुनियाद पर जीता गया है और सरकार फेसबुक का भरपूर इस्तेमाल कर रही है ऐसी भी न्यूज़ आ रही है 2019 के इलेक्शन में इसका फायदा उठाया जा सकता है।

इस पर मै अगली पोस्ट में बताऊंगा कैसे हमारे देश को दो बड़ी कंपनिया प्रभावित कर रही है , यानी किस देश में कौन स प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनेगा कौन सी सरकार बनेगी अब ये फेसबुक जैसी कम्पनिया तय कर रही हैं या करेंगी ये तो हम सबके लिए और हमारे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है इसी लिए पूरी दुनिया में ट्रेंड चल रहा है।
#deletefacebook

लेखक:- हस्सान मेहदी

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