डायबिटीज /दवाओं से बढ़ती है यह बीमारी, नाश्ते में सिर्फ फल खाएं तो कंट्रोल में रहेगी

Ashraf Ali Bastavi

हेल्थ डेस्क/अंकित गुप्ता.  इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में 42 करोड़ 50 लाख से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। भारत में 2017 तक 7 करोड़ 30 लाख लोग इससे प्रभावित हैं। यह बीमारी इसी रफ्तार से बढ़ी तो 2025 तक इसके मरीजों की संख्या 15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। मशहूर मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी का दावा है कि सही कोशिश करें तो यह बीमारी सिर्फ 72 घंटे में काबू में आ सकती है! इसके लिए सिर्फ तीन स्टेप का एक फार्मूला अपनाना होगा जिसमें सबसे जरूरी है दोपहर 12 बजे तक फल और सब्जियां खाना और डेयरी प्रोडक्ट से बचना। दैनिक भास्कर ने  डॉ.  चौधरी से डायबिटीज से जुड़ी शंकाओं और उपायों पर बात की। प्रमुख अंश…

  • डायबिटीज क्यों होती है, ज्यादा मीठा खाने से या टेंशन के कारण?

    जवाब : डायबिटीज एक लाइफस्टाइल कंडीशन है। लाइफस्टाइल में जो गड़बड़ियां हैं वे इसका बड़ा कारण हैं। टेंशन सबसे प्रमुख है। तनाव होने पर ब्लड शुगर अचानक बढ़ती है। ब्लड शुगर का बढ़ना और घटना स्थायी हो जाए तो इस अवस्था को डायबिटीज कहते हैं। दूसरा बड़ा कारण है, नींद। रोजाना छह घंटे की नींद जरूरी है। जब हम सोते हैं तो मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया में शरीर में जमा अतिरिक्त ग्लूकोज ऊर्जा में बदलता रहता है। तीसरा कारण- ज्यादा मीठा खाना, जो बड़ा कारण माना जाता है।

    जरूरी बात है कि अगर मीठा कुदरती स्रोत से मिल रहा है तो नुकसान नहीं होता है। जैसे आम, शहद या गुड़ का मीठा इतना नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन अगर ये रिफाइंड या प्रोसेस्ड है तो ब्लड शुगर बढ़ेगी। जो लोग मांस का सेवन ज्यादा करते हैं उन्हें खतरा ज्यादा होता है। दरअसल, हाई प्रोटीन खर्च न होने पर ग्लूकोज के रूप में जमा होता है और ब्लड शुगर का लेवल बढ़ता है।

    शरीर के लिए शर्करा (ग्लूकोज) सबसे जरूरी तत्वों में से है? ऐसा क्यों होता है कि ये दुश्मन बन जाती है?

    जवाब : शर्करा या कार्बोहाइड्रेट दो स्थितियों में दुश्मन बनता है। पहला जब ये गलत स्रोत यानी कुदरती मिठास की बजाय प्रोसेस्ड मीठे प्रोडक्ट से ज्यादा लिया जाता है। दूसरा जब शरीर इसे पचाने की स्थिति में नहीं होता फिर भी हम मीठा खाना जारी रखते हैं। पूरी नींद न लेने और तनाव की स्थिति में शरीर मीठा पचा नहीं पाता। डायबिटीज नियंत्रित करने में खान-पान बेहद अहम है। ज्यादातर लोग खाने का 70 फीसदी हिस्सा रोटी-चावल के रूप में लेते हैं। जबकि इसमें 20 फीसदी रोटी और 50 फीसदी कच्ची सब्जियां और हर तरह के फल होने चाहिए।

    लोग क्यों मान लेते हैं कि उनकी डायबिटीज कभी ठीक नहीं हो सकती?

    जवाब : ज्यादातर मरीज हताश और निराश हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि वे कभी ठीक नहीं हो सकते। लेकिन धीरे-धीरे लोगों में समझ और जागरुकता बढ़ रही है। जब वे अपने आसपास डायबिटीज वालों को पूरी तरह ठीक होते हुए देखते हैं तो ये भ्रम टूटता है।

    बाजार में सैकड़ों नुस्खे और दवाएं हैं, किसी पर भरोसा करना हो तो क्या देखना चाहिए?

    जवाब : नुस्खों और दवाओं से बेहतर है जीवनशैली में बदलाव लाना। जैसे ठीक समय पर सोएं, समय पर उठें, छह से आठ घंटे की नींद लें, तनाव से बचें। ऐसा करने से काफी मदद मिल जाएगी। एक सिंपल डाइट प्लान फॉलो करें। सुबह 12 बजे तक सिर्फ फल खाएं। लंच और डिनर में कम से कम 500 से 700 ग्राम कच्ची सब्जियां खाएं। दूध, डेयरी और रिफाइंड प्रोडक्ट से दूरी बनाएं। कम से कम तीन दिन तक सख्ती से इस नियम का पालन करें और ब्लड शुगर चेक करें। अगर 250 mg/dl ब्लड शुगर है तो दवा की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन, कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

  • माना जाता है कि शुगर फ्री स्वीटनर से डायबिटीज कंट्रोल में रहेगी? क्या सचमुच ऐसा है?

    जवाब : आर्टिफिशियल स्वीटनर उसे कहते हैं जिसमें मिठास तो है लेकिन वह वास्तव में कार्बोहाइड्रेट नहीं है। इन चीजों में सैकरीन या एस्पार्टम का इस्तेमाल किया जाता है और इनमें ग्लूकोज बिल्कुल नहीं होता, इसी कारण कैलोरी नहीं होती। इसलिए इन्हें जीरो कैलोरी स्वीटनर कहते हैं। ये कुछ ही घंटे तक शुगर कंट्रोल करते हैं लेकिन फिर स्थिति पहले जैसी हो जाती है। इनकी मिठास ग्लूकोज से 300 गुना ज्यादा होती है। लंबे समय तक स्वीटनर लेने से लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है या कुछ मामलों में कैंसर जैसी स्थिति बन सकती है।

    कोई फॉर्मूला है सेहतमंद बने रहने का या आदतों में बदलाव लाने का? बच्चों और बुजुर्गों को कैसे प्रेरित करें?

    जवाब : मेरे पास ऐसे कई केस आते हैं। उन्हें समझाने के लिए सिर्फ एक बात कहता हूं कि दोपहर 12 बजे तक सिर्फ फल खाइए या जो भी खाना है बस उससे पहले 300 ग्राम कच्ची सब्जियां यानि सलाद खाइए। ऐसा करने पर उन्हें भूख कम लगती है। इसे स्टेप बाय स्टेप करने के लिए कहा जाता है ताकि वे अपने आप को इसके लिए प्रेरित करें। इनके रिजल्ट ब्लड शुगर रिपोर्ट में धीरे-धीरे नजर आते हैं तो वे खुद नई आदतें अपनाने लगते हैं।

    उम्र के हिसाब से बताइए कितनी शुगर को डायबिटीज नहीं मानेंगे? जैसे 30, 40, 50 की उम्र के लिए अलग-अलग?

    जवाब : इसे समझने के लिए उम्र को तीन हिस्सों में बांट लें। पहली 20 साल तक के लिए 200 mg/dl, 21 से 50 साल की उम्र के लिए 225 mg/dl, 50 साल से अधिक लोगों में ब्लड शुगर का लेवल 250 mg/dl से अधिक नहीं

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