दिल्ली में मजदूरों की दुर्दशा नही मिलता न्यूनतम वेतन 

देवेन्द्र भारती

Asia Times Desk

किसी भी समाज ,देश ,संस्था ,और उधोग में काम करने वाले श्रमिको की अहम भूमिका होती है मजदूरों के बिना किसी भी औधोगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नही की जा सकती ।

लेकिन आज देश की राजधानी दिल्ली में ही   बड़े स्तर पर मजदूरों के साथ अन्याय और उनका शोषण हो रहा है ।देश के राजधानी दिल्ली में मजदूरों की मजदूरी के बारे में बात की जाए दिल्ली सरकार के तय मानक अकुशल :14000,अर्धकुशल :15400 ,कुशल :16962 रुपया प्रत्येक माह 8 घंटे का है ।लेकिन कम मजदूरी पर मजदूरों से काम कराया जाता है ।
जब दिल्ली के इलाके का अध्यन करते है तो पाते है कि कुछ छोटे निजी स्कूलों मे कर्मचारी 2500-3000 पर काम करने को विवश है ।फैक्ट्री ,ऑफिस ,दिल्ली मेट्रो ,और अन्य जगहों पर भी स्थिति बहुत अच्छी नही है ।नांगलोई ,मंगोलपुरी ,किराड़ी ,सुल्तानपुरी ,क्षेत्र में 3000-5000 रुपया में काम करने वाले कि संख्या लाखो में है कमोबेश यही हालात दिल्ली और एन सी आर में हर जगह की है मायापुरी ,नारायण ,बवाना ,नरेला ,ओखला जैसे औधोगिक क्षेत्र में भी 4500 -6500 पर काम करने का औसतन आंकड़ा मिला है जबकि यह न्यूनतम वेतन से काफी कम है ।
दिल्ली श्रम बिभाग से एक आर टी आई में कुछ प्रश्न पूछा गया उससे भी यही पता चलता है कि सरकार का रुख भि इस  तरह के मामले में पूरी तरह से ढुलमुल है ।दिल्ली मेट्रो में बड़े स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम देखने को मिला ।आर टी आई के जरिये यह जानकारी मिला कि दिल्ली मेट्रो में काम करने के लिए कुछ दिन पहले 12 कंपनी से हर दिन 150 कर्मचारी लिए जाते है लेकिन यह कंपनियां अपने कर्मचारी को तय न्यूनतम वेतन नही देती है ।
एन डी एम सी क्षेत्र में 225 शौचालय है जिसका रख – रखाव की जिम्मेवारी क्रमशः supreme advertisement pvt ltd -175 , fumes international -06 ,pee /aar builders -02 ,sulabh international -07 ,R K jain & hospitality pvt ltd – 35   के पास है और एन डी एम सी इसके लिए 500 रुपया प्रत्येक कर्मचारी प्रत्येक दिन के हिसाब से देती है लेकिन वास्तविकता में एन डी एम सी  के इन शौचालय में कर्मचारियों को प्रतिमाह 6000 -7000 के हिसाब से प्रत्येक महीने 12 घंटे का वेतन दिया जा रहा है यहाँ भी कर्मचारियों के साथ बड़े स्तर पर शोषण देखने को मिला है ।
दिल्ली के अस्पताल में गार्डो की बहाली में भी इसी तरह की धांधली है गॉर्ड से काम 12 घंटे करवाया जाता है और उन्हें 9,000-10,000 रुपया वेतन मिलता है । अस्पताल और गार्डो की बहाली के लिए अनुबंध करने में भी व्यापक पैमाने पर घालमेल देखने को मिला है ।जबकि बाकी जगहो पर गार्डो की हालत और ज्यादा दयनीय है वहां पर गार्डो को 5500-6500 रुपये 12 घंटे का दिया जा रहा है ।
श्रमिक कानून में है खामियां- 
कोई कर्मचारी कारखानों के मालिक की शिकायत जब श्रम विभाग में करता है तो कारखाने व अन्य जगहों से जबाब आता है कि यह हमारे यहां काम नही करता है ऐसे स्थिति में कर्मचारियों कोब्याह साबित करना पड़ता है कि वह वहां काम करता था चुकी उसके पास कोई सबूत नही होता है जैसे किसी प्रकार का कोई नियुक्ति पत्र ,कार्ड ,सैलरी स्लिप बेग्रह ,इन सबके अभाव में दोषी मालिक व कंपनी को सजा नही मिल पाता है  ।
न्यूनतम वेतन कितना है इसकी जानकारी आम लोगो के पास नही है सरकार द्वारा सिर्फ खाना पूर्ति की जाती है और न्यूनतम वेतन को बिभाग के वेबसाइट पर डाल  दिया जाता है और आम जनता तक कैसे यह न्यूनतम वेतन कितना है इसका कोई प्रचार प्रसार नही किया जाता है । यही  नही बिभाग के तरफ से कोई सर्वे नही कराई गई है और नही औचक निरीक्षण की गई है जिससे यह पता चल सके कि लोगो को न्यूनतम वेतन मिल रहा है या नही ।यही नही सरकार द्वारा चेक़ या डायरेक्ट खाते में ट्रांसफर को अनिवार्य नही बनाया गया है जिस कारण लोगो का बड़े स्तर पर शोषण होता है ।
सरकारी विभाग में निजी कंपनी से अनुबंध भ्रस्टासचार और शोषण का बढ़ावा देती है और सभी जगहों पर बड़े स्तर पर शोषण देखने को मिला है ।
हम लोग मई महीने की पहली तारीख को मजदूर दिवस को।मजदूर दिवस मजदूरों के परिश्रम दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य  भूमिका निभाता है और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है ।जरूरी है की हम मजदूर के साथ बड़े स्तर पर हो रहे शोषण और अन्याय के खिलाफ खड़े हो ।

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