गल्लवान घाटी मुठभेड़ का दोष चीन का नहीं :चीनी राजदूत

चीन रेडियो इंटरनेशनल   हिंदी   रिपोर्ट के मुताबिक़  भारत स्थित चीनी राजदूत सुन वेई तुंग ने 25 जून को पीटीआई को इंटरव्यू देते हुए कहा कि गल्लवान घाटी (Gallevan) में हुई मुठभेड़ का दोष चीन का नहीं है।सुन वेई तुंग ने कहा कि चीन और भारत के टुकड़ियों के बीच गल्लवान घाटी में हुई मुठभेड़ और गंभीर हताहत होने का दोष चीन का नहीं है। यह घटना है जो चीन देखना नहीं चाहता है और इसकी जिम्मेदारी चीन के पास नहीं है।

इस घटना के प्रति चीन का रुख ऐसे हैं, यानी पहला, घटना का स्थल वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी पक्ष में है और भारतीय सैनिकों ने रेखा पार की। गल्लवान घाटी वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी पक्ष में होती है, जहां कई दशकों से शांति रही थी। लेकिन इस वर्ष में भारतीय पक्ष ने रेखा को पार कर निर्माण करना शुरू किया और इस रेखा को बदलने की कोशिश की। 6 मई की रात को भारतीय टुकड़ियों ने रेखा को पार कर हिंसात्मक बल का प्रयोग किया।


दूसरा, मई में घटना घटित होने के बाद चीनी पक्ष ने सैन्य और राजनयिक मार्ग से भारत के सामने अनेक बार मामला उठाया। भारतीय पक्ष अपने व्यक्तियों को वापस लाने और उपकरणों को तोड़ने पर सहमत हुआ। 6 जून को दोनों देशों के सेना कमांडर स्तरीय वार्ता हुई और भारतीय पक्ष ने गल्लवान नदी के मुहाने से आगे गश्त नहीं करने और सुविधाओं का निर्माण नहीं करने का वादा किया।

दोनों पक्ष गल्लवान नदी के मुहाने के दोनों ओर अवलोकन पोस्ट स्थापित करने पर सहमत हुए। तब से स्थिति धीमी हो गई। लेकिन इस के बाद भारतीय पक्ष ने दोनों की सेना कमांडर वार्ता में संपन्न सहमति को बदलकर एक बार फिर रेखा को पार कर चीनी सेना को उत्तेजित किया।

तीसरा, भारतीय पक्ष ने सबसे पहले चीनी व्यक्तियों के खिलाफ हिंसात्मक बल का प्रयोग किया। 15 जून की रात को भारतीय सैनिकों ने एक बार फिर वास्तविक नियंत्रित रेखा को पार कर चीनी पक्ष के तंबू को नष्ट कर दिया। जब चीनी सीमा रक्षकों ने नियम के मुताबिक भारतीय व्यक्तियों के साथ मामला उठाया, तब भारतीय सैनिकों ने अचानक चीनी सैनिकों को हिंसात्मक तौर पर प्रहार किया। जिससे दोनों पक्षों के बीच शारीरिक मुठभेड़ हुई और इससे हताहत संपन्न हुई।

चौथा, भारतीय पक्ष ने सबसे पहले दोनों देशों के बीच संपन्न सिलसिलेवार समझौतों का उल्लंघन किया। 1993 में हस्ताक्षरित “चीन-भारतीय सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा के क्षेत्र में शांति और शांति बनाए रखने के समझौते” के अनुच्छेद 1, तथा 1996 में हस्ताक्षरित “चीन-भारत सीमा के वास्तविक नियंत्रण रेखा के क्षेत्र पर सैन्य क्षेत्र में विश्वास-निर्माण उपायों पर समझौते” के अनुच्छेद 2 के मुताबिक दोनों पक्षों की वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास गतिविधियों के प्रति स्पष्ट नियम बनाए गये हैं। भारतीय पक्ष ने जो किया है वह उपरोक्त समझौते की भावना से असंगत है।


चीनी राजदूत सुन वेई तुंग ने कहा कि गल्लवान घाटी में हुई घटना की जिम्मेदारी चीन के पास नहीं है। भारतीय पक्ष ने रेखा को पार कर चीनी सैनिकों को प्रहार किया और दोनों देशों के संबंधित समझौते और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मापदंडों का उल्लंघन किया।


चीन भारत से घटना की जांच-पड़ताल करने तथा जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित करने, अपने सैनिकों को संयम लेकर उत्तेजक कार्यवाही न करने, और ऐसी घटनाएं फिर से न होने को सुनिश्चित करने की मांग करता है। आज तक दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक मार्गों से संपर्क किया। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भी फोन पर बातचीत की। दोनों पक्ष गल्लवान घाटी घटना से निष्पक्ष रूप से निपटने तथा सेना कमांडर वार्ता में संपन्न सर्वसम्मति का पालन करने पर सहमत हुए। 22 और 23 जून को दोनों के बीच सेना कमांडर स्तरीय वार्ता का दूसरा चरण भी आयोजित हुआ। 24 जून को दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के जिम्मेदार विभाग के नेताओं के नेतृत्व में चीन-भारत सीमा मामलों के परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र के तहत बैठक भी आयोजित हुई।

सुन वेई तुंग ने कहा कि चीन और भारत दोनों पक्षों को मतभेदों को सुव्यवस्थित तौर पर नियंत्रित करने की इच्छा है और वे ऐसे करने के लिए सक्षम भी हैं। वर्तमान में चीन-भारत सीमा की स्थिति आम तौर पर स्थिर और नियंत्रण में है। चीन की आशा है कि भारत भी सकारात्मक कदम उठाएगा और सीमा की स्थितियों को और जटिल बनाने की गतिविधि नहीं


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