मुफ्ती एजाज़ अहमद साहब के नमाज़-ए-जनाज़ा में उमड़ा जनसैलाब

■ मुफ्ती साहब के इल्मी व दीनी ख़िदमात से पांच दशक तक फैजेयाब होता रहा समूचा उत्तर प्रदेश।

 

संत कबीर नगर(के०डी०सिद्दीक़ी)एजाज़-ए-मिल्लत मुफ्ती एजाज़ अहमद खान साहब की नमाज़े जनाज़ा बुधवार को दिन में लगभग ढाई बजे सन्त कबीर नगर के बसडीला गांव में अदा की गई।इस दौरान हज़ारों की संख्या में अक़ीदत मंदो का जनसैलाब उमड़ पड़ा।इस मौके पूर्वी उत्तर प्रदेश के दूर-दराज इलाके के तमाम आलिमे दीन एवं विद्वानों सहित जिले के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मुफ्ती साहब का विसाल 30 दिसम्बर 2019 की सुबह तकरीबन 4 बजे हो गया था। दशकों पहले आप हुजूर हाफिज़-ए-मिल्लत के हुक्म से बसडीला आए और दारुल उलूम अहले सुन्नत तदरीसुल इस्लाम बसडीला में ताउम्र दीन की खिदमात अन्जाम देते रहे।उन्होंने दारुल उलूम को उन ऊँचाइयों पर पहुँचाया जिससे तदरीसुल इस्लाम का नाम मुल्कगीर पैमाने पर पहचाना जाने लगा।जामिया अशरफिया मुबारकपुर आज़मगढ़ के संस्थापक हुजूर हाफिज-ए-मिल्लत (अलै.) ने अपने साहब़जादे को इल्मेदीन हासिल करने के लिए तदरीसुल इस्लाम बसडीला भेजा।आपको लोग बड़े-हज़रत के नाम से भी जानते थे।आपके जाने के बाद जो खालीपन हुआ है उसकी भरपाई हो पाना मुश्किल है।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि हज़रत 1949 से तालीमी दीनी ख़िदमात अंजाम दे रहे थे।उनका वतन आजमगढ़ था लेकिन बसडीला गांव और यहां की अवाम से वह बेपनाह मुहब्बत करते थे।
यहां से लगाव इतना रहा की यहीं के होकर रह गए।उनके इल्मी व दीनी ख़िदमात से आधी शातब्दी से पूरा ईस्ट यूपी फैजेयाब होता रहा।जब भी इलाके के लोगों को कोई मसला दरपेश आता था तो हज़रत रहनुमाई फरमाते थे। 

मुफ्ती साहब की नमाज़े जनाज़ा में हज़रत अल्लामा ज़ियाउल मुस्तफा साहब, हुज़ूर हाफिज़-ए-मिल्लत के साहबज़ादे हज़रत अज़ीजे मिल्लत मौलाना अब्दुल हफीज साहब,मौलाना मोहम्मद अहमद मिस्बाही नाजिम-ए-तालीमात अशरफिया,सपा जिलाध्यक्ष गौहर अली खान, मो. अहमद खान,मौलाना एजाज़ अहमद, मौलाना अज़ीमुद्दीन,जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद,एजाज अहमद करखी, मौलाना फूजेल अहमद नदवी,जफीर अली करखी,शमीम अहमद राना व तप्पा उजियार से बड़ी संख्या में लोग हाजिर हुए।जोहर की नमाज से लेकर देर शाम तक तांता लगा रहा।हज़ारों की तादाद में मुसलमानों ने शिरकत की।हज़रत की नमाज़े जनाज़ा उनके साहबज़ादे हज़रत अल्लामा नईम अख्तर साहब ने पढ़ाई।

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