बाबरी मस्जिद विवाद: 36वां दिन: जानिए हिन्दू पक्ष की दलीलों पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट

Awais Ahmad

अयोध्या मामले में सुनवाई के 36वें दिन हिन्दू पक्ष की ओर से कई वकीलों ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों का जवाब दिया। बहस की शुरुवात हिन्दू पक्ष की तरफ से सी एस वैधनाथन ने की। सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने टिप्पणी करते हुए कि सुनवाई 20-20 मैच की तरह चल रही है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं।हमने आपको 4-5 दिन विस्तार से सुना है फिर भी आप इस तरह की बात कर रहे हैं। आप इसकी तुलना 20-20 मैच से कर रहे हैं। सुशील जैन ने अपने बयान के लिए खेद जताया। हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला था जवाब देने के लिए रामलला के वकील नरसिम्हन को 15 मिनट का समय मिला था।

जाने रामलला विराजमान के वकील CS वैधनाथन ने अपनी जिरह के दौरान क्या कहा

रामलला विराजमान के वकील सी एस वैधनाथन ने जिरह के दौरान कहा मकर की आकृति वाला परनाला तो हिन्दू मंदिरों का प्रतीक है क्योंकि ये गंगा का वाहन है। वहां मिली 16 नम्बर दीवार 10 वीं 11 वीं सदी में बने होने का पता चलता है। जबकि ASI की रिपोर्ट में 5 नम्बर की दीवार तो बहुत बाद में बनी है। दीवार नम्बर 16 को 6 मीटर तक खोदा गया लेकिन गैंग वे मिलने की वजह से खुदाई बंद करनी पड़ी।वैद्यनाथन ने ASI की तस्वीरों के हवाले से कहा कि विवादित ढांचा खंभों के आधार पर टिका होने के सबूत मिले हैं।

वैद्यनाथन ने कहा कि पेज नंबर 39 में चित्र है, जिसमें साफ है दीवार नंबर 16 दीवार नंबर 18d से जुड़ी हुई थी। रामलला  के वकील CS वैधनाथन  कहा कि दीवार 16 दक्षिण मुखी नहीं थी और 18डी पूरबमुखी थी।दीवार नंबर 17 पश्चिम मुखी इनसे जुड़ी हुई थी।पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में यह दिया गया है, जो साफ करती है कि यहां इस्लामिक ढांचा था।यह सही नहीं है, उससे पहले पुराना ढांचा था जो हिंदू धर्म का था। उन पर ईंटों की दीवार बनाई गई और प्लास्टर किया गया। यह 10 या 11वीं शताब्दी की थीं।

वैद्यनाथन ने कहा कि पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाई के बाद तैयार की गई रिपोर्ट में स्पष्ट है कि दीवारें और खंभें 10-11वीं शताब्दी के थे, जिन पर नया ढांचा बाद में खड़ा किया गया।।ऐसे में ईदगाह या अन्य इस्लामिक इमारत पुराने ढांचे पर खड़ी की गईं हैं।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि रिपोर्ट में कहीं ऐसा नहीं कि किसी पुराने ढांचे को तोड़ा गया। जवाब में वैद्यनाथन ने कहा कि यह हिंदू पक्ष का विषय है कि वहां पर पुराना हिंदू धार्मिक ढांचा तोड़ा गया या नहीं।

जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने पूछा कि HC के सभी जजों की ASI रिपोर्ट में दीवार पर क्या फाइंडिंग थी इस बारे में बताइए।

CS वैद्यनाथन ने कहा कि वह इस बारे में एक नोट कोर्ट को दे देंगे। CS वैद्यनाथन ने 2 पिलर के बारे में बताते हुए कहा कि विवादित स्थल पर स्ट्रक्चर की फॉउंडेशन थी।

CJI रंजन गोगोई  ने CS वैद्यनाथन से पूछा कि पिलर बेस और पिलर में क्या अंतर है?CS वैद्यनाथन ने कहा कि पिलर बेस वह है जिस पर पिलर खड़ा होता है। वहां पर ASI खुदाई में कई पिलर बेस भी मिले थे।

DY चंद्रचूड़ ने कहा कि सभी पिलर बेस एक समयकाल के नही हैं? आप कैसे कह सकते हैं कि पिलर बेस उसी पिलर के हैं?

CS वैद्यनाथन ने कहा कि सिर्फ 4 पिलर बेस अलग समयकाल के हैं। बाकी सारे पिलर बेस और पिलर एक ही समयकाल के हैं। CS वैद्यनाथन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट से साफ है कि वहां पर एक मंदिर का स्ट्रक्चर था।

वैद्यनाथन ने कहा कि मेरे वरिष्ठ परासरन पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं, 1959 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में साफ किया था कि रेस ज्युडीकेटा में इसका उपयोग सिर्फ अपीलकर्ता की घोषणा के आधार पर किया जाता है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा आस्था और विश्वास पूरी तरह से अलग दलीलें हैं,बेशक आस्था और विश्वास के लिए सबूत नहीं हो सकते। लेकिन हम अब मुख्य साक्ष्य की ओर हैं।।

इस पर सीएस वैद्यनाथन ने कहा यह हिंदुओं के लिए महत्व का स्थान है। यह बौद्धों का पवित्र स्थान नहीं रहा है। इसलिए यह एक उचित अनुमान है कि यह एक हिंदू मंदिर था।

जस्टिस चंद्रचूड ने कहा क्या यह दावा करने के लिए उन विशेषताओं का हवाला दिया जा सकता है कि यह एक हिंदू मंदिर है जो बौद्ध विहारों में भी मौजूद है? दूसरे शब्दों में सबूत का बोझ आप पर यह साबित करने के लिए है कि यह एक हिंदू मंदिर है।

वैद्यनाथन ने कहा कि वेदों, श्रुति, स्मृति समेत उपनिषदों का हवाला दिया। हिन्दुओं का यह विश्वास आज का नहीं है।

राजीव धवन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हमने वेदों, उपनिषदों को चुनौती नहीं दी है। रहा सवाल कुरान का तो उस पर भी सवाल नहीं है। जो भी लिखित में है वह अदालत के सामने है।

वैद्यनाथन ने कहा कि  कुरान में यह कहा गया है कि प्रोफेट के विचारों को स्मृति में रखने के लिए सुनकर उन्हें लिखा गया। मेरा यह कहना है कि परंपरा और धर्मपुसेतकों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि गुरूनानक देव भी अयोध्या गए थे? इसपर रामलला विराजमान ने वकील CSवैद्यनाथन ने कहा कि मैं इस पर एक नोट तैयार कर अदालत में दाखिल करूंगा।

विश्वास को लेकर वैद्यनाथन ने कहा ने कहा कि मस्जिद के मुख्य डोम में राम का जन्म हुआ था। यह लोगों का विश्वास है।

वैद्यनाथन ने कहा कि जो सामग्री वहां मिली और यह जब विभाग को साफ हो गया कि वहां पर बड़ा हिंदू धार्मिक स्थल था, तब उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस अंदाजे से कहा कि वहां पर था। पुरातत्व विभाग ने कहा कि कुल मिलाकर अपनी रिपोर्ट में वहां पर मिली दीवार, खंभों उन पर उकेरी गई आकृतियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला।

धवन ने कहा कि ASI की रिपोर्ट ने कहीं नहीं कहा कि पुराने ढांचे को तोड़कर मस्जिद खड़ी की गई। वहां पर कोई स्ट्रक्चर अगर था तो वह कैसे गिरा? क्या उसको गिराया गया या वह प्राकतिक आपदा में गिरा? कुछ स्पष्ट नहीं था।

CJI ने बहस के दौरान CS वैद्यनाथन से कहा कि आपके पास अपनी जिरह पूरी करने के लिए सिर्फ 1 घंटे का समय है।

CS वैद्यनाथन ने कहा ASI की खुदाई में सामने आया कि वहां पर जो हड्डियां मिली वो कई परतों में थीं। वैद्यनाथन ने कहा कि आस्था के संबंध में यह साक्ष्य है कि ऐतिहासिक किताबों, श्लोक से यह साफ होता है कि वहां पर रामजन्मस्थली है।

वैद्यनाथन ने कहा कि  पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सामने आया कि वहां पर जो हड्डियां मिलीं, वो कई परतों में थीं। आस्था के संबंध में यह साक्ष्य है कि ऐतिहासिक किताबों, श्लोक से यह साफ होता है।इसके अलावा पुरातत्व विभाग को मिली सामग्री बहुत कुछ कहती है।

वैद्यनाथन ने कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह साफ कि यह स्थल राम जन्मस्थली है, क्योंकि यह किसी और धर्म से जुड़ी हुई नहीं है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि  कैसे आप इसे राम जन्मभूमि से जोड़ रहे हैं। हम आस्था पर सवाल नहीं उठा रहे कि यह राम जन्मस्थली है पर क्या अंदाजे से यह साफ होता है कि यह रामजन्मभूमि है।

राजीव धवन ने कहा कि पुरातत्व रिपोर्ट ने अदालत के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया था। निष्कर्ष पर हम सवाल उठाते हैं, जो गलत भी हो सकता है। उन्होंने कहीं नहीं कहा कि पुराने ढांचे को तोड़कर मस्जिद खड़ी की गई. कुछ स्पष्ट नहीं था।CS वैद्यनाथन की दलीले पूरी हुई।

इसके बाद रामलला के वकील नरसिम्हन ने जिरह शुरू की। जाने नरसिम्हन ने सुनवाई के दौरान क्या दलील दी

नरसिम्हन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट आस्था को साबित करने के लिए कह रहा है। आज़ादी से पहले कई फैसले ऐसे हैं, जिसमें विश्वास के आधार पर फैसला दिया गया।

रामलला के वकील नरसिम्हन ने कहा ने कहा कि सबसे भरोसेमंद दस्तावेज स्कंद पुराण है जिस पर विश्वास किया जा सकता है। हिन्दू धर्म में अंत में मोक्ष प्राप्त होता है, यह जानना ज़रूरी है। हिंदुओं के लिए विश्वास क्यों ज़रूरी है कि भगवान राम का जन्म स्थान अयोध्या में है। नरसिम्हन ने स्कंद पुराण का श्लोक पढ़ते हुए कहा कि जन्म स्थान की परिक्रमा करके मोक्ष प्राप्त होगा।

नरसिंहम ने स्कन्दपुराण के अयोध्या महात्यम के श्लोक ‘ तस्मात स्थानेषाणे रामजन्म प्रवर्तते। जन्मस्थाम इदं प्रोक्तं मोक्षादि फलसाधनम। पढ़ते हुए कहा अयोध्या में राम जन्मस्थान की यात्रा मोक्षदाई है। मोक्ष हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थों में से आखिरी है।

नरसिंहम ने कहा यह अकेली जगह नहीं जहां मन्दिर के साथ मस्जिद बनाई गई है। उनका मकसद रहा कि हम राम के अपनी श्रद्धा भूल जाएं। इतना होने के बावजूद हिंदुओं की आस्था यहां लगातार बनी हुई है। नरसिंहम की दलील पूरी हुईं।

जिसके बाद धर्मदास के वकील ने उनको सुने जाने की मांग की। कहा कि हम भी इस मामले में पार्टी हैं, हमको भी सुना जाना चाहिए। राजीव धवन ने कहा कि धर्मदास सुनवाई के पहले दिन से यहां पर आ रहे हैं, तो आज क्यों वह खुद को सुनने के लिए कह रहे हैं। धवन ने कहा कि वह महंत धर्मदास से रोज़ आशीर्वाद भी लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने महंत धर्मदास के वकील की मांग पर कुछ नहीं कहा।

जिसके बाद सुशील कुमार जैन ने अपनी जिरह शूरू करी। जाने सुशील कुमार जैन ने अपनी जिरह में क्या कहा

बीस मिनट के अंदर दो हिंदू पक्षकारों की दलील समेटने के बाद जब मुख्य न्यायाधीश ने निर्मोही अखाड़े के वकील के पास महज डेढ़ घंटे का समय है।

निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने टिप्पणी करते हुए कि सुनवाई 20-20 मैच की तरह चल रही है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आप कैसी बात कर रहे हैं।हमने आपको 4-5 दिन विस्तार से सुना है फिर भी आप इस तरह की बात कर रहे हैं। आप इसकी तुलना 20-20 मैच से कर रहे हैं।  सुशील जैन ने अपने बयान के लिए खेद जताया। हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार को बमुश्किल 5 मिनट का समय ही मिला था जवाब देने के लिए. रामलला के वकील नरसिम्हन को 15 मिनट का समय मिला था। निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि मेरी दलीलें और जवाब बहुत पेचीदा हैं। इस पर जस्टिस नज़ीर ने सुशील जैन से कहा कि आप चिंता ना करें अगर आप हारते भी है और अगर हिन्दू पक्ष जीतता है तो आप जीतने वालों की तरफ ही होंगे।

सुशील कुमार जैन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का शेबेट का अधिकार है और वहां पर कब्ज़े और शेबेट के अधिकार की मांग करते हैं। बाहरी हिस्से पर निर्मोही अखाड़ा का कब्ज़ा था और अंदरूनी हिस्से पर कब्ज़े की मांग के लिए फैजाबाद के मजिस्ट्रेट के सामने मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप अपनी पुरानी बात को दोहरा रहे हैं।  सुशील कुमार जैन ने कहा कि हम बाहरी हिस्से और अंदरूनी हिस्से को अलग मंदिर नहीं मांगते। हमारे शेबेट के अधिकार को किसी ने भी चुनौती नहीं दी। यहां तक कि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हमारे शेबेट के अधिकार को भी माना है।

जैन ने कहा कि निर्मोही अखाड़े को पूरे क्षेत्र के लिए अलग याचिका दाखिल करने ज़रूरत नहीं थी। जब पहले से ही इसका एक हिस्सा हमारे प्रबंधन के तहत था। जब वाद आंतरिक आंगन के लिए दायर किया गया था तो अखाड़ा बाहरी आंगन के कब्जे में था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपको बात पूरी करने में कितना समय लगेगा? सुशील कुमार जैन ने कहा कि मैं कोर्ट का एक मिनट भी बर्बाद नहीं करूंगा, जल्द से जल्द अपनी बात रखूंगा। मैं सबसे बेचारी पार्टी से हूं। मै जनता हूं कि आपके पास फैसला लिखने का समय नहीं, लेकिन मेरी बात सुने बिना आपका फैसला अधूरा रहेगा, क्योंकि मेरा पूरा केस कब्ज़े पर आधारित है।

जैन ने कहा कि यह दावा बिल्कुल गलत है कि दिसंबर 1949 में हिंदुओं ने मूर्तियां अंदर रखीं।मुस्लिम पार्टियों ने बवाल पैदा करने के लिए इस कहानी को बनाया। जैन अभी पज़ेशन के बारे में कोर्ट को बता रहे हैं। जैन ने कहा कि पज़ेशन दो तरह की होती है। डिफेक्ट पज़ेशन और डिफॉर पज़ेशन।

सुशील जैन ने कहा कि 22- 23 दिसंबर 1949 की रात को धोखे से मूर्ति रखने की बात जो मुस्लिम पक्ष ने कही वह साजिशन कहानी गढ़ी गई है, ऐसी कोई घटना नहीं हुई, जहां हजारों लोग जाते थे। पूजा होती थी वहां एक थानेदार जाकर ताला कैसे लगा सकता है, मुस्लिम पक्ष के एक गवाह ने जो इस बारे में बयान दिया वह सही नहीं है, वहां मंदिर था और 1992 में जो ढ़ाचा गिरा वो भी मंदिर था, हम पूरे एरिया को ही मंदिर मानते हैं,  अंदर और बासरी भाग को अलग नहीं मानते, अंदर की बात हमने इसलिये उठाई क्योंकि अंदर के भाग के लिये रिसीवर नियुक्त हुआ था। सुशील कुमार जैन की दलील पूरी हुई।

निर्मोही अखाड़ा के वकील PN मिश्रा ने जिरह शुरू करी। जाने PN मिहरा ने जिरह में क्या कहा

सुनवाई के दौरान PN मिश्रा ने कहा कि भूमि की शास्त्रीय व्याख्या करते हुए कहा कि इमारत भी भूमि की श्रेणी में आता है। लेकिन स्थान का मतलब देवता का भवन या धाम भी होता है। राजीव धवन ने कहा कि इस दलील का कोई मतलब नहीं क्योंकि भूमि की हिन्दू व्याख्या और शब्दकोश अलग है और मुस्लिम डिक्शनरी अलग।

PN मिश्रा ने जिरह करते हुए स्कंद पुराण के बारे में बताते हुए रामसेतु के बारे में बताया। राजीव धवन ने कहा कि PN मिश्रा कोई नया सबूत या दस्तावेज नहीं पेश कर रहे हैं। अगर इनकी जिरह को कोर्ट मानेगा तो यह लगातार वेद और पुराण पर ही जिरह करेंगे।

CJI ने PN मिश्रा से कहा कि आप कुछ नया नहीं बता रहे हैं। आप अपने मुख्य जिरह पर लगे हुए हैं। जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा कि आप राम सेतु के बारे में बात नहीं कर। राजीव धवन ने कहा कि स्कंद पुराण भगवान राम के जन्म स्थान के बारे में नहीं बताता।

PN मिश्रा हिंदू डिक्शनरी से कुछ शब्दों के मतलब बता रहे थे,जिस पर राजीव धवन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि हिन्दू डिक्शनरी इन मामले में दस्तावेज नहीं है। सिर्फ इस्लामिक डिक्शनरी ही मामले में दस्तावेज के तौर पर दर्ज है।सुप्रीम कोर्ट ने PN मिश्रा के नए सबमिशन को लेने से इनकार किया।

PN मिश्र ने कहा कि भूमि के देवता होने की सात मौलिक शर्तों और व्याख्या पर मिश्रा के ताज़ा दस्तावेज कोर्ट ने खारिज कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सब पहले क्यों नहीं बताया जो अब कोर्ट के सामने लाए हैं। इस चरण में हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते।

जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा कि आप देवता की मूर्ति की पूजा करते हैं ना कि अमूर्त चीजों की।

पीएन मिश्रा ने कहा कि आप पांच जज बैठे हैं लिहाज़ा बेंच इस मामले के विस्तृत फलक पर सुनवाई कर रही है। बेंच को सभी तरह के दस्तवेज़ और सबूत को सुनना चाहिए।

इसपर CJI रंजन गोगोई ने कहा कि आप यहाँ क्या संवैधानिक मसला बताना चाहते हैं।  हम पांच जज बैठे हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि यह संविधान पीठ है यह सिर्फ पांच जजों की बेंच है।यह पहली अपील है हम यहां सिर्फ टाइटल सूट को सुनने बैठे हैं। अब नई नई चीजें बताने का समय नहीं है।पांच जजों की यह बेंच संविधान से जुड़े मसले पर नहीं बल्कि इस मसले की गंभीरता के मद्देनजर सुन रही है। अयोध्या मामले में आज की सुनवाई पूरी हुई।

आज रामलला की ओर से वकील सीएस वैद्यनाथन, गोपाल सिंह विशारद की ओर से रंजीत कुमार, रामलला की ओर पी नरसिम्हा, निर्मोही अखाड़े की ओर से सुशील जैन, रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्रा ने दलीलें रखीं। बता दें कि शुक्रवार को इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से राजीव धवन दलीलें रखेंगे।

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