बहुविवाह, निकाह हलाला, मुताह और मिस्यार सही या ग़लत SC करेगा सुनवाई

Awais Ahmad

बहुविवाह, हलाला, मुताह और मिस्यार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया है। अब पांच जजों की बेच इस मामले में सुनवाई करेगी। साथ ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया।

बहुविवाह और हलाला के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। अश्विनी उपाध्याय, नफीसा खान, समीना बेगम सहित चार लोगों ने निकाह हलाला और बहु विवाह को असंवैधानिक करार दिए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्ज़ी में कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 की धारा 2 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए, क्योंकि यह बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है। भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधान सभी भारतीय नागरिकों पर बराबरी से लागू हों। याचिका में यह भी कहा गया है कि ‘ट्रिपल तलाक आईपीसी की धारा 498A के तहत एक क्रूरता है।

निकाह-हलाला आईपीसी की धारा 375 के तहत बलात्कार है और बहुविवाह आईपीसी की धारा 494 के तहत एक अपराध है। मुसलमानों में निकाह हलाला, बहुविवाह के मुता निकाह और मिस्यार निकाह (निश्चित अवधि के लिए शादी का करार) को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। जिस पर कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।

बहुविवाह को लेकर ओखला की डॉ. समीना बेगम सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दी है। याचिकाकर्ता के मुताबिक मजहबी छूट की वजह से उसके दो शौहरों ने उसके साथ धोखा किया और तलाक दे दिया। पहले पति से उसके दो बच्चे थे और दूसरे से एक। डॉ. समीना बेगम को उसके पहले शौहर ने चिट्ठी लिखकर तलाक दिया और दूसरे ने पहले से बीवी के होने की बात छुपा कर निकाह किया और फिर पहली बीवी के साथ गायब हो गया।

वही हैदराबाद के रहने वाले मौलिम मोहिसिन बिन हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुसलमानों में प्रचलित मुता और मिस्यार निकाह को अवैध और रद घोषित करने की मांग की है।

क्या होता है मुता विवाह

मुता विवाह एक निश्चित अवधि के लिए साथ रहने का करार होता है और शादी के बाद पति-पत्नी कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर एक अवधि तक साथ रह सकते हैं। साथ ही यह समय पूरा होने के बाद निकाह खुद ही खत्म हो जाता है और उसके बाद महिला तीन महीने के इद्दत अवधि बिताती है। इतना ही नहीं मुता निकाह की अवधि खत्म होने के बाद महिला का संपत्ति में कोई हक नहीं होता है और ना ही वो पति से जीविकोपार्जन के लिए कोई आर्थिक मदद मांग सकती जबकि सामान्य निकाह में महिला ऐसा कर सकती है।

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