लिंचिंग देश में अराजकता फैलाने की साजिश : डॉ. बीरबल झा

Ashraf Ali Bastavi

नई दिल्ली :  लक्ष्मीनगर स्थित ब्रिटिश लिंग्वा के सभागार में ‘देश में बढ़ रही लिंचिंग की घटानाएं चिंता का विषय’ पर रविवार को एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा को संबोधित करते हुए देश के जाने- माने लेखक एवं ब्रिटिश लिंग्वा के प्रबंध निदेशक डॉ. बीरबल झा ने लिंचिग की घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज में लिंचिंग अमानवीय घटना है।
लिंचिंग शब्द की उत्पत्ति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. झा ने कहा कि अमेरिका के वर्जिनिया में पैदा हुए कैप्टन विलियम लिंच ने अपने आप को सामाजिक सरोकार की बातों को लेकर खुद को जज घोषित कर दिया था।
बगैर किसी मान्यता का उनका फैसला होता था और आरोपी को विना किसी सुनवाई के सरेआम फांसी पर लटका दिया जाता था। विलियम लिंच की बहकी विचारधारा को आज कोई भी सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता है।
डॉ. झा ने कहा कि लिंचिंग का इस्तेमाल आज एक हथियार के रूप में होने लगा है जिसमें लोग अपनी नस्ल या सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए इसे एक सबसे आसान उपाय समझते हैं। उन्होंने कहा कि भीड़ जानती है कि संविधान में उनके इस अपराध के खिलाफ कोई लिखित कानून ही नहीं है और उनकी यही सोच उन्हें ताकत देती है।
डॉ. झा ने कहा कि लिंचिंग की सबसे अधिक घटनाएं अमेरिका में हुई थी और इस घटना की सबसे अधिक शिकार अफ्रिकी मूल के लोग हुए थे। डॉ. झा ने आगे कहा भारत एक सभ्य समाज एवं प्रजातांत्रिक देश है।
यहां पर कानून का राज है। किसी को भी असामाजिक तत्वों के बहकावे में आकर किसी भी व्यक्ति को लिंचिंग की वारदात में शामिल नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में लिंचिंग जैसी घटना को अंजाम देने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। साथ ही, डॉ. झा ने सरकार से मांग की है कि इस तरह की वारदात को रोकने के लिए सरकार शीघ्र कानून बनाए ताकि भारत के गौरवशाली अतीत को अक्षुण्ण बनाया रखा जा सके।
वहीं, कार्यक्रम के अतिथि व सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर झा ने कहा कि यह सिर्फ वोट और चुनाव की बात नहीं है, यह कानून, न्याय और मानवता का सवाल है। उन्होंने कहा कि इसे किसी खास जाति या धर्म से ऊपर उठकर देखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संविधान में सबको जीने का अधिकार मिला है और सही व गलत का फैसला करने का अधिकार न्यायालय के पास है न कि लोगों के एक समूह के पास। उन्होंने कहा कि ऐसे में, एक संपूर्ण कानून बेहद लाभकारी हो सकता है।
परिचर्चा में भाग लेते हुए कई छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कुछ छात्रों का तर्क था कि देश में लचर कानून व्यवस्था और न्याय मिलने में हो रही देरी से लिंचिंग जैसी घटनाएं देश में बढ़ रही है।
इसे सरकार को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म,क्षे़त्र, भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
इस तरह की घटनाओं से देश की छवि खराब होती है और सामाजिक संरचना भी प्रभावित होती है। इस लिए सभी को कानून का सम्मान करना चाहिए। इसी में सभी की भलाई है अन्यथा देश में अराजकता फैल जाएगी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिंता जताए जाने के बाद केंद्र सरकार ने मॉब लिंचिंग के मामलों को लेकर गृह सचिव की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
इसके अलावा, गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक विशेष मंत्रिसमूह का भी गठन किया गया है जो इस संबंध में अपनी सिफारिशें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेगा।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा है कि सरकार लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) की घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर है और ज़रूरत हुई तो इसे रोकने के लिए कानून बनाया जाएगा।
गौरतलब है कि सामाजिक मुद्दों को लेकर पिछले 25 सालों से ब्रिटिश लिंग्वा कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है। इसकी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने भी सराहना की है।
गौरतलव है कि बिहार सरकार के सहयोग एवं स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के माध्यम से अब तक संस्था 30 हजार से अधिक महादलित बच्चों को प्रसिक्षित कर उनकी जीवन शैली को उपर उठाने में सफल रही है।

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