आज भी मौजूद है वर्णवादी शिक्षा व्यवस्था

Prospectus में साफ़ तौर पर ये लिखा है कि इस संस्थान में केवल सैयद लोग ही दाख़िला ले सकते हैं। संस्था का नाम Ma’Din Sadath Academy है

Asia Times News Desk

शैक्षिक आन्दोलन: हम सब ने इतिहास की किताबों में पढ़ा होगा कि प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा सभी के लिए सुलभ नहीं थी। केवल ब्राह्मण को ही पढ़ने का अधिकार प्राप्त था । ऐसा इसलिए था क्योंकि समाज का ढाँचा इस प्रकार तैयार किया गया था कि कोई अन्य जाति का व्यक्ति शिक्षा ग्रहण न करे क्यों कि शिक्षित होना केवल ब्राह्मणों का अधिकार है। ये केवल बातों तक ही सीमित न था बल्कि इस किताबों में लिखकर धार्मिक मान्यता भी दी गयी थी। समाज के हर वर्ग का अलग-अलग कार्य निर्धारित किया गया था। जैसे ब्राह्मण शिक्षा-दीक्षा का काम करेगा, क्षत्रीय राज्य की रक्षा करेगा, वैश्य व्यापार करेगा और क्षुद्र साफ़-सफ़ाई का काम करेगा। इसी आधार पर समाज का वर्गीकरण किया गया था।

Different Institutions of Ma’Din Academy

धीरे-धीरे लोग जागरूक होना शुरू हुवे और फिर अपने शिक्षा के अधिकार को हासिल किए। इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए लोगों ने लम्बी लड़ाई लड़ी और निरंतर संघर्ष किया। शिक्षा के अधिकार को हासिल करने के लिए बहुत सारे महापुरुषों ने अपना सारा जीवन लगा दिया। आज़ादी के बाद संविधान में सभी को शिक्षा का अधिकार देकर एक नये युग का आरम्भ किया गया।

मगर अभी भी बहुत सी घटनाएँ ऐसी होती हैं जो समाज को पुनः इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर देती हैं कि क्या शिक्षा किसी एक वर्ग की जागीर है?

इन्ही में एक मामला केरला के शांतापुरम के एक शिक्षण संस्थान का है जिसके Prospectus में साफ़ तौर पर ये लिखा है कि इस संस्थान में केवल सैयद लोग ही दाख़िला ले सकते हैं। संस्था का नाम Ma’Din Sadath Academy है जिसके मुखिया Kantapuram AP Abubakar और Sayyid khaleelul bhuhari हैं। इनकी सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि मोदी ये जी के बहुत क़रीबी हैं और बहुत सारी तस्वीरों में उनके साथ देखे जा सकते हैं।

किसी से अच्छे सम्बंध रखना अच्छी बात है मगर सवाल ये पैदा होता है कि मोदी जी उस विचारधारा के मानने वाले हैं जो ब्राह्मणवादी मानसिकता पर काम करती है और उनका भी यही मानना है कि शिक्षा पर सबका अधिकार नहीं होना चाहिए। यही वजह है कि अबूबकर साहब अपने Ma’din Sadath Academy में किसी ग़ैर सैय्यद का प्रवेश उचित नहीं मानते।

शिक्षा और वो भी इस्लामी इदारे की हो जिसमें ये अनिवार्य कर देना कि इसमें केवल सैय्यद ही बच्चे पढ़ सकेंगें इस्लाम के विरुद्ध है। ऐसे में मोदी जी के परम मित्र AP Abubakar साहब कौन सी इस्लामी शिक्षा देना चाहते हैं जिसकी बुनियाद ही इस्लाम के आत्मा के विपरीत हो। समाज को चाहिए कि ऐसे शिक्षण संस्थाओं का भी जाएज़ा लें और उन पर प्रश्न खड़ा करने का काम करें।

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