कार्टून को ही अपनी दुनिया बना लेने वाले एक कार्टूनिस्ट की कहानी

#HeadToHead सीरीज़ में प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट यूसुफ मुन्ना की जीवनी - दूसरी कड़ी

Ansar Imran SR

Head To Head:- मैंने जिन्दगी में कभी भी हसी मजाक के लिए कार्टून नहीं बनाया है हमेशा लोगों की तकलीफ को सरकार के सामने जाहिर करने के लिए कटाक्ष किया है| या यूँ भी कह सकते है के मेरी रूचि शुरू से ही सियासत में रही है जिस वजह से मैंने कार्टून को सरकार की गलत नीतियों को उजागर करने का हथियार बनाया| इस मामले में मैंने बीजेपी या कांग्रेस में कोई भेदभाव नहीं किया दोनों को अच्छे से लपेटे में लिया है|

मैं अपनी आइडियोलॉजी का पक्का आदमी हूँ मैंने कभी भी इस मामले में कोई समझौता नहीं किया है| अब आप पूछेंगे कि मेरी विचारधारा क्या है तो मैं येही कहूँगा मजलूमों की आवाज को उठाना मेरी विचारधारा है, गरीब लोगों को न्याय दिलवाना मेरी विचारधारा है, मुसलमानों और इस्लाम के प्रति जो नफरत का माहौल है उसे ख़त्म करना मेरी विचारधारा है| अब इससे आसान शब्दों में शायद मैं नहीं समझा सकता|

युसुफ़ मुन्ना हमेशा से कार्टूनिस्ट ही बनना चाहता था और मेरी एक ही इच्छा है कि दुनिया मुझे हमेशा कार्टूनिस्ट के तौर पर ही याद रखे वह तो जिन्दगी जीने और पापी पेट को भरने के लिए मुझे दूसरी फील्ड में काम करना पड़ता है|

मैं चाहता हूँ की आने वाले दिनों में मैं अपनी समाजी बंदिशों को तोड़ कर पूरी तरह से कार्टून को ही अपना ओढ़ना बिछोना बना लूँ| आने वाले दिनों में मैं अपनी वेबसाइट लाने पर विचार विमर्श कर रहा हूँ|

कार्टून्स की समझ हमारे समाज या जिसे आप मुस्लिम समाज भी कह सकते हैं में निहायत ही कमतर दर्जे की है इसका अंदाजा आप इस बात से लगायें कि मुस्लिम समाज में आज भी कार्टून हराम समझा जाता है| कई बार मैंने अपनी समझ से बहुत ही बेहतर कार्टून बनाये थे मगर इस समाज के लोगों ने अपनी मर्जी से उसमें बदलाव करवाते करवाते कार्टून की जगह आर्टिकल बनवा दिया था|

कई बार मैंने सोचा मैं अपने इस हुनर को दुसरे लोगों को सिखाओ खास तौर पर मुस्लिम समाज को मगर नहीं इस समाज ने तो कसम खा ली है कि वह नहारी की दुकान, चिकेन फ्राई की दुकान ही चलाएगी मगर कार्टून जो सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाने का बेहतरीन तरीका है उसे नहीं अपनाएगी| मुस्लिम समाज ने तो इस सिलसिले में कभी मुझसे सम्पर्क नहीं किया अलबत्ता दुसरे लोगों ने बहुत दूर दूर से आ कर कार्टून बनाने की कला सीखने की कोशिश की| मैं अपनी कौम के बच्चों को यह हुनर जरुर सिखाऊंगा कोई सीखने की ललक के साथ मेरे पास आये तो सही|

मैंने 1995 से कार्टून बनाना शुरू किया है जो अभी तक 24 साल से लगातार जारी है| न जाने कितने मैगज़ीन, अख़बार और न्यूज़ पोर्टल में मेरे कार्टून छपे है मगर मुझे असल पहचान सोशल मीडिया ने दिलवाई है| युसुफ़ मुन्ना के कार्टूनिस्ट युसुफ़ मुन्ना बन्ने का अगर किसी को श्रेय जाता है तो वो सोशल मीडिया है और ये ही एक लौता वो प्लेटफ़ॉर्म बचा है जहाँ पर आप अपनी बात खुल कर कह सकते हैं वरना आज के समय में ज्यादातर मीडिया तो गोदी मीडिया में तब्दील हो चुका है|

जारी है……………(दूसरी कड़ी)

लेखक:- अंसार इमरान की कार्टूनिस्ट यूसुफ मुन्ना से हुई बातचीत पर आधारित

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