भूख का बंगाल की जनता के नाम पैग़ाम

एक मामूली सा सफ़ेद पैंट शर्ट में रहने वाला इंसान मेरे लिये इतना आतंकी हो सकता है मैंने सपने में भी नहीं सोचा था|

एशिया टाइम्स

समाज सेवा: मेरा नाम भूख है!!! मेरा खानदान कोई छोटा मोटा नहीं हैं| मैं एक तिहाई बंगाल पर राज करती हूँ और मेरे खौफ इतना है कि बाकी आबादी भी मेरे डर से अपने परिवार तक ही सीमत है उसे बाकी दुनिया से कोई मतलब ही नहीं है|

कुछ समय पहले तक जब भी राम नवमी आती तो मुझे भय होता कि इस बार मेरा सर्वनाश यक़ीनन है मगर नहीं कुछ लोग है जो मेरे हमदर्द और इंसानियत के दुश्मन है| जिन्होंने इस बार रामनवमी के पावन दिवस पर मेरे परिवार का विस्तार किया और हजारों घरों के चिरागों को बुझा दिया न जाने कितनी मांगों को सूना कर दिया|

मैं इन भूख-भक्तों का कैसे शुक्रिया अदा करो समझ नहीं आता|

पिछले दो महीने से एक इंसान मेरी आँखों में खटक रहा है जिसने मेरा जीना मुहाल कर रखा है| मेरे परिवार को धीरे-धीरे सीमित करता जा रहा है|

भूख का बंगाल की जनता के नाम पैग़ाम:

जिस इंसान ने इतनी ताकतवर भूख को भी हिला के रख दिया है उस इंसान का नाम है शमीम अहमद| एक मामूली सा सफ़ेद पैंट शर्ट में रहने वाला इंसान मेरे लिये इतना आतंकी हो सकता है मैंने सपने में भी नहीं सोचा था|

रोज़ाना सुबह सुबह निकलता है खाना ले कर और शाम तक न जाने मेरे परिवार के कितने लोगों को भर पेट खाना खिला कर मेरे परिवार से ही दूर करता जा रहा है|

वो अकेला ही इतनी ताकत रखता है तो अगर उसके साथ कुछ लोग और आ गये तो मेरा क्या होगा सोच कर ही मेरी रूह कांप उठती है|

उस इंसान के लिये धर्म, मंदिर, मस्जिद, दरगाह कुछ भी मायने नहीं रखते जहाँ भी मेरे परिवार को देखता है पहुंच जाता है मेरे परिवार को मिटाने|

जी चाहता है इसके “फ़ूड फॉर आल” प्रोग्राम को आग के हवाले कर दूँ| इसकी सुपारी दे दूँ कि ये इंसान इस घोर कलयुग में लोगों को खाना खिला कर महा पाप करता है इसलिए इसे मौत के घाट उतार दिया जाये|

ऐ बंगाल की सोई हुई मेरी भक्त जनता! तुम्हारी इस महारानी “भूख” की सल्तनत खतरे में है उठो और इस इंसान को रोको वर्ना ये शमीम अहमद मेरी इस लंका को भस्म कर देगा||

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *