भारत के दिल में तकलीफों का भंडार

मर्दों के पास शहरों में जा कर मजदूरी करने के अलावा कोई चारा नहीं है और औरतें दिन भर लग के 500 बीड़ी बनाने के बाद सिर्फ 35 रुपए कमा पाती हैं

एशिया टाइम्स

समाज सेवा: कहतें हैं भारत का दिल गाँव में बसता है और भारत की तक़रीबन 2/3 आबादी आज भी गाँव में ही रहती है| कुछ गाँव बहुत छोटे छोटे हैं और कुछ बहुत ही बड़े है| बड़े गाँव को अगर ढूंढा जाये तो उत्तर प्रदेश का बमरोली गाँव सबसे ऊपर मिलेगा| इस गाँव की आबादी 60000 के करीब है| इस गाँव का निज़ाम वार्ड के हिसाब से चलता है और इन सब वार्ड को मिला कर एक मुखिया होता है| इस गाँव के बाकी सब वार्ड तो बुनियादी सुविधाओं में बेहतर हैं मगर वार्ड नंबर 3 और 4 की हालत बहुत ही दयनीय है| इसकी आबादी 2700-2800 तक होगी|

बुनियादी सुविधाएं किस कदर ख़राब है इसका अंदाज़ा आप ऐसे लगायें कि घरों में पीने वाला पानी नहीं है, टॉयलेट का कोई बंदोबस्त नहीं है, घर मिटटी के बने हुयें है वो भी एक दम ज़र-ज़र हालत में| रोजगार का ये हाल है कि मर्दों के पास शहरों में जा कर मजदूरी करने के अलावा कोई चारा नहीं है और औरतें दिन भर लग के 500 बीड़ी बनाने के बाद सिर्फ 35 रुपए कमा पाती हैं| युवाओं की पढ़ाई भी भगवान भरोसे ही है पुरे इलाके में कोई ढंग का स्कूल या कॉलेज नहीं है|

इस पुरे इलाके का दौरा किया तो पता चला यहाँ के हालात हमारी सोच और समझ से कई गुना ज्यादा दयनीय हैं| इस इलाके को फौरी तौर पर पीने वाले पानी के लिए 10 हैण्ड पंप की जरूरत है अभी के हालात में एक हैण्ड पंप से अंदाजन 50 से 80 घर पानी भरते है| कुछ घर तो ऐसे है जहाँ टॉयलेट का कोई नामोनिशान नहीं और लोग लौटा ले कर खेतों में जाते हैं या फिर अगर हैं भी तो 100 साल पुराने टाइप के|

एक घर पर गये तो पता चला उसमें एक बुजुर्ग रहते थे अपनी चार बेटियों के साथ| कुछ समय पहले बीमारी की वजह से उनका देहांत हो गया| एक बेटी की शादी हुई तो कुछ समय बाद उनके पति का भी इंतकाल हो गया और वो अपनी छोटी सी एक बेटी के साथ रहती है|

बड़ी बेटी का पति मिल में मजदूरी करता था वहाँ मशीन में काम करते वक्त उसकी भी ऊँगलीयां कट गयी थी और इनकी भी एक बेटी है| दो छोटी बहनें हैं जिनकी शादी अभी करनी बाकी है|

घर भी मिटटी का बना हुआ है जो एक बार टूट चूका है अभी जैसे तैसे सहारे के साथ खड़ा किया हुआ है| किचन और टॉयलेट एक ही साथ बने हुये| टॉयलेट भी कौन सदियों पुराने जमाने का|

एक छोटा सा मदरसा देखा जिसमें रोजाना 100 के करीब बच्चे पढ़ते है और बिल्डिंग के हालत खंडरों से भी बुरे है|

थोड़ी दूरी के बाद एक ऊँचाई पर एक खुली जमीन मिली जिसका पता ये चला कि ये जमीं एक साहब ने खरीद कर वक्फ कर दी है किसी स्कूल या इंटर कालेज के लिये ताकि इस इलाके के बच्चे पढ़ सकें और खुद अपने पैरों पर खड़े हो कर इस गाँव को तरक्की की नयी राह दिखाएँ|

भले ही हम लोग इक्कीसवीं सदी में जी रहें हो मगर ये भी हकीकत है कि इसी भारत में न जाने ऐसे कितने गाँव हैं जो अभी तक बुनियादी सुविधाओं के लिए ही संघर्ष कर रहें हैं| हम मेट्रो सिटी में बड़े बड़े आलीशान घरों में रहते रहते कम्युनिटी के इन लोगों को भूल चुके हैं जिनके बिना भारत महान का सपना केवल सपना ही है और हमेशा रहेगा| आपकी मेरी मदद इन लोगों के चेहरे की मुस्कान का सबब बन सकती है बाकी अल्लाह हाफिज||

 

अनसार इमरान (+91 85888 26183)

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