बाबरी मस्जिद चाहिए या मुस्लिम पर्सनल ला ? 

तीन तलाक़ पर विवादित बिल का मक़सद ब्लैक मेलिंग तो नहीं!

Asia Times News Desk

इमामुद्दीन अलीग
तीन तलाक़ पर प्रस्तावित बेतुकी और अन्यायपूर्ण बिल पर बीजेपी की हटधर्मी का मतलब समझ रहे हैं आप ? ज़ाहिरी तौर पर तो ऐसा लगता है कि इस बिल का मकसद मुस्लिम पर्सनल लॉ को टारगेट करना है ..
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी ज़ाहिरी तौर पर यही कह रहा है लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि इस बिल का मक़सद मुस्लिम पर्सनल लॉ को टारगेट करना नहीं बल्कि इसकी आड़ में मुस्लिम पर्सनल बोर्ड को ब्लैक मेल करना है.
आगे चल कर बीजेपी और आरएसएस मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सामने ये दो ऑप्शन रख सकते है कि या तो मुस्लिम पर्सनल बचा लो या फिर बाबरी मस्जिद मामले में मुक़द्दमा लड़ लो यानि अगर अपना पर्सनल लॉ बरक़रार रखना है तो विवादित ज़मीन पर राम मंदिर के पक्ष में सझौता करके उसे हमें दे दो वरना पर्सनल लॉ से हाथ धो बैठोगे.
इस बात का शक इसलिए हो रहा है बाज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले 1985 में राजीव गांधी की सरकर बहुसंख्यकों का धुर्वीकरण करने के लिए सायरा बानो केस में बोर्ड को ब्लैकमेल कर चुकी है और बाबरी मस्जिद का ताला खुलवा कर विवादित स्थल पर मूर्तिपूजन की इजाज़त दे चुकी है… बीजेपी कांग्रेस की नक़ल करने में माहिर तो है ही.
शक की दूसरी वजह के है कि तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जो मोदी हुकूमत अदालत के निर्देश के बावजूद कह रही थी कि वो तीन तलाक़ पर कोई क़ानून नहीं बनाएगी तो फिर आज उसे ऐसी क्या ज़रुरत आन पड़ी कि वो इस विवादित बिल को पास कराने पर अड़ गई है ? कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है! मुमकिन है कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को बीजेपी की इस छुपी मंशा के बारे में पता हो या फिर ये भी हो सकय है कि बीजेपी ने अभी तक अपना पत्ता न खोला हो।

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