बाबरी मस्जिद विवाद : 35वां दिन: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा जन्मभूमि और जन्मस्थान में क्या अंतर है ?

Awais Ahmad

अयोध्या बाबरी मस्जिद  राम जन्मभूमि विवाद
मामले में 35 वें दिन की सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष ने बहस की शुरुवात की। हिन्दू पक्ष की तरफ से रामलला विराजमान के वकील के परासरण ने मुस्लिम पक्ष की दलील पर अपनी जिरह करी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित ज़मीन पर बहस के दौरान आज एक दिलचस्प बात हुई।

जस्टिस एस ए बोबड़े ने हिन्दू पक्षकारों के वकील के परासरन से पूछा कि ‘क्या ज्योतिष में श्रीराम के जन्म के वक़्त को लेकर भी कुछ कहा गया है?’

परासरन ने कुछ इतिहासकारों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कुछ सक्ष है। श्रीराम के जन्म के वक़्त को लेकर कई जगह टिप्पणी की गई है। इसपर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बीच बहस में दखल देते हुए कहा कि मेरे सारे ग्रह राहु और केतु के बीच हैं। मेरा बुरा वक़्त चल रहा है। शनि भी मुझ पर भारी है। भारत में ज्योतिष विज्ञान सूर्य और चंद्र और जन्म के सही वक्त पर आधारित है। हम ग्रहों की गति के मुताबिक हर रोज की घटनाओं को लेकर भविष्यवाणी करते हैं लेकिन क्या भगवान राम के केस में ऐसा है? क्या हमें उनके जन्मस्थान और जन्म की तारीख के बारे में पुख्ता तौर पर कुछ पता है। नहीं ना ?

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हम तो इस आशय से पूछ रहे थे कि क्या वहां ज्योतिष ग्रन्थों में भी कोई तथ्य है?

परासरन के कहा कि चैत की नवमी को दोपहर अभिजीत नक्षत्र में अयोध्या में विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म हुआ।।उस नवमी को हिन्दू रामनवमी का उत्सव मनाते हैं।इस उत्सव और विशेष पूजा के लिए जन्मस्थान और वहां बने मन्दिर में पूजा का विधान है। इस दिन हम दूसरे उत्सव मनाने के बजाय मन्दिर जाते हैं।

के परासरन ने कहा कि भगवद्गीता के श्लोक उद्धृत करते हुए कहा कि पापकर्म की बदनामी मृत्यु से भी निकृष्ट है। लोगों का अगर किसी भूमि स्थान पर अलौकिक शक्तिशाली और ऊर्जा होने का विश्वास और श्रद्धा है तो वो भी कानूनी व्यक्ति हो जाता है। यानी उसे संकट के समय अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अदालत जाने का हक है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन गुणों की घोषणा स्वयंभू है या किसी ने की है। हिन्दू सनातन दर्शन में तो पांच तत्व धरती, गगन, अग्नि, वायु और जल के साथ दसों दिशाओं की पूजा होती है। श्री देवी भू देवी भी पूजित हैं।

के परासरन ने कहा कि चिदम्बरम मन्दिर में शिव का लिंग नहीं है. वहां एक पर्दा है। पर्दा हटता है तो नटराज के दर्शन होते हैं। तमिलनाडु के समुद्रतट पर मयलापुरम में भी मन्दिर तो है पर मूर्ति नहीं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस भूषण ने पूछा कि क्या वह ओर एक या दो न्यायिक व्यक्ति होंगे, भूमि और राम? परासरन ने कहा कि वह पर दो से ज़्यादा न्यायिक व्यक्ति होंगे। जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या इनमें से कुछ प्रमुख देवता होते है और अन्य भी होते है? परासरन ने कहा कि मंदिर में एक प्रमुख देवता होता है और अनेक रूपों में हमें उस देवता का पूजा करते है।हम न्यायालय को न्याय का मंदिर कहते हैं। हमारे पास कई न्यायाधीश हैं, लेकिन हम पूरे को एक संस्था न्यायालय कहते हैं।

जस्टिस DY चन्द्रचूड़ ने कहा कि हालांकि कई देवताओं हो सकता है, लेकिन न्यायाधिकारी व्यक्तित्व का श्रेय मंदिर के प्रमुख देवता को जाता है।इसपर राजीव धवन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कोर्ट एक नई बहस की तरफ जा रहा है, यह मंदिर के नामकरण के बारे में नही है, मैं इस मामले में कोर्ट को एक लिखित नोट दूंगा और शुक्रवार को इसपर अपना 5 मिनट में अपना पक्ष भी रखूंगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि साईं बाबा के जन्म स्थान को भी न्यायिक व्यक्ति माना जाता है?रामलला के वकील के परासरन ने कहा कि हां साईं बाबा के जन्म स्थान को मद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही न्यायिक व्यक्ति माना हुआ है।

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि जन्मभूमि और जन्मस्थान में क्या अंतर है? रामलला के वकील के परासरन ने कहा कि जन्मभूमि एक बड़ी ज़मीन है या यह राज्य की ज़मीन जहा ओर भगवान राम का जन्म हुआ था, जन्मस्थान का मतलब वह जगह जहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था।  के परासरन ने कहा कि राम नवमीं को भगवान राम जन्म दिन के तौर पर मनाया जाता है लेकिन भगवान राम के जन्मस्थान पर नही मनाया जाता, इसलिए जन्मभूमि पर मन्दिर बना कर भगवान राम के जन्मस्थान पर रामनवमीं को मनाना चाहिए।

जिसके बाद रामलला के वकील के परासरन ने अपनी जिरह पूरी करी। जिसके बाद रामलाल की तरफ से वरिष्ठ वकील CS वैधनाथन ने मुस्लिम पक्ष की दलील पर जिरह शुरू करी और मुस्लिम पक्ष की तरफ से ASI की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया।

जाने CS वैधनाथन ने अपनी जिरह के दौरान क्या कहा

वैधनाथन ने मुस्लिम पक्षकारों की दलील को खारिज किया कि विवादित स्थल पर कोई मन्दिर नहीं था। विवादित स्थल में भी हिन्दू पूजा करते रहे क्योंकि उनका वहां जन्मभूमि होने का विश्वास था। खुदाई में मिली दीवार भी मन्दिर की नहीं ईदगाह की होने की दलील को भी खारिज करते हुए खुदाई में मिली अन्य चीजों और रिपोर्ट पर ज़ोर दिया।

रामलला के वकील वैधनाथन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वक़्फ़ बोर्ड ऐसे सवाल उठा रहा है जिनके जवाब हाईकोर्ट के फ़ैसले में मौजूद है।

वैद्यनाथन ने खुदाई के चार्ट दिखाते हुए कहा कि वहां खंबे और उनके आधार भी मिले हैं। जिसे ईदगाह की दीवार बताया जा रहा है उसमें ऊपर भी छत होने के सबूत मिले हैं। ईदगाह पर छत नहीं होती. वो सिर्फ एक वॉल नहीं बल्कि हॉल था मन्दिर का विशाल हॉल था। धवन ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वो हिस्सा तो खुदा ही नहीं।  वैद्यनाथन ने कहा कि ये उस मुद्दे पर मुझे क्यों बाधित कर रहे हैं.जो इनकी दलील का हिस्सा ही नहीं था।

रामलला के वकील CS वैद्यनाथन ने अपनी जिरह शुरू करने से पहले मुस्लिम पक्ष द्वारा की गई बहस पर एक नोट कोर्ट में दिया। और इलाहाबाद HC के फैसले का कुछ अंश पढ़ना शुरू किया। जिसपर राजीव धवन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गयी observations के लिए मुसलमानों को टारगेट किया जाता था।

वैधनाथन ने कहा कि जब एक बार साबित हो गया कि वह पर भगवान राम का जन्म हुआ था तो वहां पर किसी भी मूर्ति की ज़रूरत नही है। वैधनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठा कर कह रहे है वह पर ईद गह थी, तो वह मान रहे है कि मुग़लों ने वहां पर मस्जिद बनाने के लिए ईदगाह को गिराया था।

CS वैधनाथन और राजीव धवन के बीच सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई

वैद्यनाथन ने कहा कि जब किसी ज़मीन को किसी खास मकसद के लिए समर्पित किया जाता है, तो वह जगह न्यायिक व्यक्ति बन जाती है,  इसे दैव्य होने की ज़रूरत नहीं, यह धार्मिक हो सकती है। वैद्यनाथन ने कहा कि क्योंकि भगवान राम वहां पैदा हुए थे, इसलिए वह जगह अपने आप में ही पवित्र और पर्याप्त है।

वैधनाथन ने कहा कि सूट4 (सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड) की याचिका का अंश पढ़ते हुए कहा कि  बाबरी मस्जिद सपाट ज़मीन पर बनाई गई थी, वहां पर कोई भी ईदगाह नही था, अब मुस्लिम पक्ष कह रहा है कि वहां पर ईदगाह था। राजीव धवन ने कहा कि हमने 1961 में केस दाखिल किया था हमें कैसे पता चलता। वैद्यनाथन ने कहा कि हमने 1989 में शूट फाइल किया था तब भी कहा था कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गयी तब भी आपने जवाब नही दिया और आज आप कह रहे हैं कि ईदगाह तोड़कर मस्जिद बनाई गयी,  यह तो नया कॉन्सेप्ट है।

वैधनाथन ने कहा कि खुदाई के समय के 25 वीडियो है जिससे यह पता चकित है कि वहां पर क्या क्या मिला है, जिसको इलाहाबाद HC ने भी देखा था, सभी रजिस्टर पर एक एक इंट्री की गई, जिसमे वहां पर मिले सामानों की साइज़ तक लिखी है, किसी में भी ईदगाह के अवशेष मिकने की बात नही है

वैधनाथन ने कहा कि खुदाई के समय के 25 वीडियो है जिससे यह पता चलता है कि वहां पर क्या क्या मिला है, जिसको इलाहाबाद HC ने भी देखा था, सभी रजिस्टर पर एक एक इंट्री की गई, जिसमे वहां पर मिले सामानों की साइज़ तक लिखी है, किसी में भी ईदगाह के अवशेष मिकने की बात नही है।

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन की दलील के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील धवन और मीनाक्षी अरोड़ा की टीका टिप्पणी और दखल देने पर CJI ने नाराजगी जतायी। CJI रंजन गोगोई ने कहा कि आप लोगों को क्या लगता है कि हमारे पास दिमाग नहीं है। ऐसे सुनवाई नहीं होगी।धवन ने खेद जताया।

 मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के बार-बार टोकने पर रामलला विराजमान की ओर से के परासरन ने नाराजगी जाहिर की। परासरन ने कहा कि धवन जिस तरह टोक रहे हैं, वो ग़लत है। मुझे अपनी बात पूरी रखने दीजिए। धवन ने जवाब दिया कि मुझे भी जिरह के बीच कई बार टोका गया, पर मैंने तो हर सवाल का जवाब दिया। इस पर रामलला की ओर से दूसरे वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि धवन की ये टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट में आज की जिरह पूरी हुई।

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