बाबरी मस्जिद विवाद : सुन्नी वक्फ बोर्ड का ज़मीन पर दावा नही कर सकता- हिन्दू पक्ष

पी एन मिश्रा ने कहा कि एक मस्जिद उसी जगह पर बनाई जा सकती है जब उसका मालिक मस्जिद बनने की इजाज़त दे, वक़्फ़ को दी गई जमीन मालिक की होनी चहिए। PN मिश्र ने कहा कि इस्लाम के अनुसार दूसरे के पूजा स्थल को गिरा कर या ध्वस्त करके उस जगह पर मस्जिद नही बनाई जा सकती है।

Awais Ahmad

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज 15 वें दिन की सुनवाई हुई।आज रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वकील पीएन मिश्रा ने बहस शुरू की। पी एन मिश्रा आज अपनी जिरह की शुरुआत इस बात किया कि बाबरी मस्जिद बाबर ने नही औरंगजेब ने बनवाई थी ।

पी ए मिश्रा ने कुछ किताबों को सबूतों के तौर पर स्वीकार करने संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला पढ़ा।PN मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में जस्टिस एसयू खान ने कहा था कि मुझे इस बात का सबूत नहीं मिला कि ढ़ांचे का निर्माण बाबर ने कराया था, जबकि जस्टिस अग्रवाल ने कहा था कि औरंगजेब ने बनवाया था।

सुनवाई के दौरान पीएन मिश्रा ने कहा कि हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्षकार यह साबित नहीं कर पाए थे कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने करवाया था। पी एन मिश्रा ने कहा कि हाई कोर्ट ने माना था मुस्लिम पक्ष के पास इस बाबत कोई सबूत नही कि मस्जिद बाबर ने बनाया था, इस बाबत भी सबूत नही है कि 1528 में मस्जिद का निर्माण किया गया और न ही इस बात के सबूत है कि इसका निर्माण बाबर ने किया था ।

PN मिश्रा ने कहा कि यह तो इस्पष्ट है कि मस्जिद को मंदिर के ऊपर बनाया गया था क्योंकि मंदिर के अवशेष उस जगह से मिले है। कुछ लोगो का मानना है कि मंदिर को गिरा कर मस्जिद बना जबकि कुछ लोगो का मानना है कि मंदिर को ध्वस्त कर के मस्जिद बनाई गई।

रामजन्मस्थान पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा इलाहाबाद HC ने अपने फैसले में कहा कि यह साबित नहीं हो पाया है कि विवादित जमीन पर मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था या औरंगजेब ने?

पी एन मिश्रा ने कहा कि बाबर विवादित जमीन का मालिक नहीं था। ऐसे में मेरा कहना है कि जब कोई सबूत ही नहीं है तो मुस्लिम पक्षकार को विवादित जमीन पर कब्जा या हिस्सेदारी नहीं दी जा सकती। वकील पी एन मिश्रा ने कहा कि बाबर ने मस्जिद का निर्माण नहीं कराया था और न ही वह विवादित जमीन का मालिक था जब बाबर जमीन का मालिक ही नहीं था तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का मामले में दावा ही नहीं बनता है।

इस पर जस्टिस बोबडे ने PN मिश्रा से तीन बिंदु स्प्ष्ट करने को कहा वहां पर एक इस्ट्रक्चर था इस बारे में कोई विवाद नही है। पर क्या वह स्ट्रक्चर मस्जिद है या नही, बहस यह है? वह इस्ट्रक्चर किसको समर्पित था?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पी एन मिश्रा ने कहा कि 1648 में शाहजहां का शासन था और औरंगजेब गुजरात का शासन था। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अप्पति जताई और मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा अब तक 24 बार मिश्रा सन्दर्भ से बाहर जाकर किस्से कहानियां सुना चुके है। इसपर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ये अपने तथ्यों को रख रहे हैं, लेकिन उन्होंने मिश्रा से भी कहा कि सिर्फ सन्दर्भ बताएं। वकील पी एन मिश्रा ने कहा कि सिर्फ कोर्ट मुझे गाइड कर सकता है मेरे साथी वकील नहीं कर सकते। जिसपर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप स्वतंत्र हैं अपने तथ्य रखने को, आप आपका पक्ष रखें ।

पी एन मिश्रा ने कहा कि इस बात के सबूत नहीं है कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था। जस्टिस बोबड़े ने पूछा इसका मतलब है कि बाबर जमीन का मालिक नहीं था? जिसपर पी एन मिश्रा ने कहा हाईकोर्ट ने बहुमत से माना था कि इस बात के सबूत नहीं है कि बाबर जमीन का मालिक था।

पी एन मिश्रा ने कहा कि हाई कोर्ट ने माना था कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को नष्ट कर बनाया गया था। हाई कोर्ट ने माना था कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को ध्वस्त कर किया गया था। बाबर के कहने पर मीर बाक़ी ने निर्माण किया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा इसका मतलब है कि हाई कोर्ट ने बहुमत से ये माना था कि इस बात के सबूत नही की मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था? पी एन मिश्रा ने कहा कि हां. इस बात के सबूत नहीं है कि मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था।

इसके बाद पी एन मिश्रा मस्जिद बनाने के बारे में बहस शुरू किया कि इस्लाम मे मस्जिद बनाने के क्या कानून हैं।

पी एन मिश्रा ने कहा कि एक मस्जिद उसी जगह पर बनाई जा सकती है जब उसका मालिक मस्जिद बनने की इजाज़त दे, वक़्फ़ को दी गई जमीन मालिक की होनी चहिए। PN मिश्र ने कहा कि कुरान में यह नही बताया गया कि इस तरह की ज़मीन पर मस्जिद बनाई जा सकती है। मिश्र ने कहा कि इस्लाम के अनुसार दूसरे के पूजा स्थल को गिरा कर या ध्वस्त करके उस स्थान पर मस्जिद नही बानी जा सकती है।

पी एन मिश्रा ने कहा कि ऐसी ज़मीन जिसपर दो लोगो का कब्ज़ा हो और एक मस्जिद बनाने का विरोध करे तो उस जमीन पर भी मस्जिद नही बनाई जा सकतीहै। किसी दूसरे धर्म स्थल को गिरा कर उसका सामान इस्तेमाल करके मस्जिद बनना मकरूह है।

PN मिश्र ने कहा कि विवादित स्ट्रक्चर को जुमे की नामज़ के लिए 2-3 घण्टे के किये ही खोला जाता था, इस्लामिक कानून के अनुसार अगर किसी मस्जिद में आज़ान होती है और 2 समय की नामज़ नही होती है तो वह मस्जिद नही रह जाती है।

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या कोई राजा राज्य की संपत्ति से वक्फ बना सकता है या उसे पहले संपत्ति खरीदनी होगी?, मिश्रा तारखी फिरोज शाही का हवाला देते हुए कहा कि विजित संपत्ति से विजेता पारिश्रमिक के रूप में1/10 का मालिक है। और अपने पारिश्रमिक में से वह एक वक्फ बना सकता है। राम जन्मस्थान पुनरोद्धार समिति के वकील PN मिश्रा ने कहा कि 1860 तक, अयोध्या में विवादित इस्ट्रक्चर में मुसलमानों के नामज़ पढ़ते का कोई सबूत नही है।।

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि जहां इस्लाम में अल्लाह के आलावा किसी और की पूजा की मनाही है, वहीं हिंदू धर्म ये मानता है कि आप किसी भी तरह पूजा करे, किसी भी रूप में पूजा करे, वो अंततः एक ही परमशक्ति की आराधना होती है। इस मायने में हिंदू धर्म की मान्यता इस्लाम से अलग है। हिंदू ऐसी जगह भी पूजा कर सकते हैं, जहां नमाज पढ़ी गई हो।

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हुई। संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, सोमवार से मुस्लिम पक्ष इस मामले में बहस शुरू करेगा। लिहाजा उम्मीद है कि शनिवार को हिंदू पक्षकारों की जिरह पूरी हो सकती है।

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