बाबरी मस्जिद विवाद : SC ने कहा कि जन्मस्थान के लिए स्कंद पुराण का सहारा लेना सही नहीं

Awais Ahmad

सुप्रीम कोर्ट में आज 13 वें दिन की सुनवाई की शुरूआत में निर्मोही अखाड़ा ने शेबेट के दावे पर तैयार अपनई दलील को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा और अपनी दलील पूरी की। निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि याचिका भगवान की तरफ से मन्दिर के रखरखाव (मैनेजमेंट) के लिए दाखिल की है।

निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि हम रामलला विराजमान की याचिका का विरोध नही करते बशर्ते वो हमारे दावे के भी विरोध न करे।।उन्होंने कहा कि विवादित स्थल के अंदरूनी आंगन में एक मंदिर था वही जन्मभूमि का मंदिर है, वहां कभी कोई मस्जिद नही थी, मुसलमानों को मंदिर में जाने की इजाज़त नही थी, वह पर हिन्दू अपनी अपनी आस्था अनुसार पूजा करते थे।

सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि मुकदमे में नत्थी किया गया नक्शा मूल जगह से मेल नही खाता है, विवादित स्थल पर पूरा का पूरा ढांचा ज़मीन से घिरा हुआ है। मस्जिद में मुसलमान 1934 के बाद से नामज़ नहीं पढ़ी।उसलमानो ने भी माना है कि 1855 से पहले वहां नामज़ पढ़ने का सबूत नही है। राजस्व रिकार्ड में भी ज़मीन निर्मोही अखाड़ा के नाम रजिस्टर है। इसलिए विवादित ज़मीन पर निर्मोही अखाड़ा का हक़ है।

सुशील कुमार जैन ने कहा कि रेवन्यू रिकॉर्ड से साफ है कि ज़मीन पर निर्मोही अखाड़े के अधिकार है।जिसके साथ निर्मोही खड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने बाबरी राम जन्मभूमि विवाद में अपनी दलील पूरी की। जिसके बाद राम जन्मस्थान पुनरूद्वार समिति की तरफ़ से वरिष्ठ वकील PN मिश्रा ने अपना पक्ष रखना शुरू किया।

अपनक जिरह की शुरुआत में राम जन्मस्थान पुनरूद्वार समिति के वकील वकील PN मिश्रा ने स्कंद पुराण का ज़िक्र करते हुए कहा कि स्कंद पुराण में भी राम जन्मस्थान का ज़िक्र है।

जिसपर जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आस्था के प्रदर्शन के लिए स्कंद पुराण का सहारा लेना ठीक है लेकिन जन्मस्थान के लिए स्कंद पुराण का सहारा लेना लंबी छलांग लगाने जैसा है ।

PN मिश्रा ने दलील पेश करी कि मंदिर को शिफ्ट किया जा सकता है लेकिन राम जन्मभूमि को शिफ्ट नही किया जा सकता है। जैसे मक्का और मदीना को शिफ्ट नही कर सकते है। हिंदुओं के लिए यह ममयना नही रखता कि मंदिर बाबर ने गिराई या औरंगज़ेब ने गिराई, यह मुस्लिम पक्ष के लिए अहम है बाबर ने मस्जिद कैसे बनवाई थी। जन्मभूमि से 85 स्तंभ मील थे जिसमें से 84 स्तंभ विक्रमादित्य ने स्थापित किया था और एक गरुड़ स्तम्भ था।

पी एन मिश्र ने कहा हमारी आस्था और विशास है कि जन्मभूमि पर ही मस्जिद बनी है। हम लम्बे अरसे से पूजा करते आ रहे है सभी गजेटियर में उस जमीन को जन्मस्थान बताया गया है।

पी एम मिश्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि 1888 में एलेक्ज़ेंडर ने बुक लिखी उसमें बाबरी मस्जिद के बारे में लिझ था कि बाबरी मस्जिद को मीर खान ने 1523 में बनवाया था यह बाबर से बहुत पहले की बात है जबकि बाबर 1526 में भारत आया था।

हेनरी बेवरेज ने कहा कि 1528 में बाबर के कहने पर मीर बाकी ने बनवाया था, बाद में कहा गया 1560 में अब्दुल बाकी इस्फ़हानी ने मस्जिद बनवाई ।

1965 में ASI की रिपोर्ट में कहा गया कि हेनरी बेवरेज और सभी का विबरण ग़लत था 1934 में अब्दुल हसन गया और उसने डिस्क्रिप्शन में कुछ शब्द जोड़ दिया था।

PN मिश्र ने कहा की बाबरनामा में मीरबाकी नाम का कोई व्यक्ति नही है, मीर शब्द रॉयल लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, बाबरनामा में बाकी बेग, बाकी तरखान, बाकी फहानी, बाकी ताशकन्दी जैसे लोको का ज़िक्र है लेकिन मीरबाकी का ज़िक्र नही है।रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से बहस कल भी जारी रहेगी।

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस संवैधानिक पीठ में जीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस.ए.बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए . नजीर भी शामिल है। यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन के मालिकाना हक को लेकर है।

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