बाबरी मस्जिद विवाद : मस्जिद में रामलला की मूर्ति स्थापित करना छल से हमला करना है – धवन

Awais Ahmad

अयोध्या मामले में सुनवाई के अठारहवें दिन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने बहस शुरू की। राजीव धवन ने कहा कि अयोध्या विवाद पर विराम लगना चाहिए। अब राम के नाम पर फिर कोई रथयात्रा नहीं निकलनी चाहिए। उनका इशारा बीजेपी द्वारा 1990 में निकाली गई रथयात्रा की ओर था जिसके बाद बाबरी विध्वंस हुआ था। राजीव धवन ने दलील दी कि विवादित जमीन के ढांचे के मेहराब के अंदर के शिलालेख पर ‘अल्लाह’ शब्द मिला है।

धवन साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि विवादित जगह पर मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद था।धवन ने यह भी कहा कि मस्जिद का द्वार बंद रहता था और चाबी मुसलमानों के पास रहती थी।शुक्रवार को 2-3 घण्टे के लिए खोला जाता था और साफ साफाई के बाद जुमे की नमाज पढ़ी जाती थी। सभी दस्तावेज और गवाहों ने बयान से साबित है कि मुस्लिम मस्जिद के अंदर के हिस्से में नामज़ पढ़ते थे।

राजीव धवन ने हिन्दू पक्ष की दलील का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास विवादित जमीन के कब्जे के अधिकार नहीं है क्योंकि 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने गलत तरीके से अवैध कब्जा कर लिया था। इसके बाद हमें नमाज नहीं अदा करने दिया गया।

सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने दलील दी कि हिंदुओं ने विवादित जगह पर भगवान राम की मूर्तियां चोरी-चुपके से रखी थीं। राजीव धवन ने कहा कि मस्जिद के भीतर 1949 में मूर्तियों का प्रकट होना कोई दैवीय चमत्कार नहीं बल्कि वह एक ‘प्लांड अटैक’ था।

राजीव धवन के दलील दी कि देश के आजाद होने की तारीख और संविधान की स्थापना के बाद किसी धार्मिक स्थल का परिवर्तन नहीं किया जा सकता। राजीव धवन ने यह भी दलील दी कि महज स्वयंभू होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमुक स्थान किसी का है। सुप्रीम कोर्ट  केस के तथ्यों के आधार पर फैसला दे।

राजीव धवन ने कहा कि 22- 23 दिसंबर 1949 को मस्जिद का ताला तोड़ा गया और भगवान राम की मूर्ति को मस्जिद के अंदर रखा गया, उस समय बाहरी हिस्से पर निर्मोही अखाड़ा का कब्ज़ा था।

राजीव धवन ने कहा कि स्ट्रक्चर के पास पक्का रास्ता था जो परिक्रमा के नाम से जाना जाता है, परिक्रमा पूजा का एक तरीका है, क्या परिक्रमा से ज़मीन पर उनका अधिकार हो जाएगा। धवन ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि वही पर भगवान राम के जन्मस्थान की जगह है, उसके बाद कहते है कि वहां पर भव्य मंदिर था  और उनको पूरा स्थान चाहिए, अगर आप उनके स्वम्भू की दलील को मानते है तो उनकी पूरी ज़मीन मिल जाएगी, मुस्लिम को कुछ भी नही मिलेगा, मुस्लिम भी उस जमीन पर अपना दावा कर रहे है।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि देवता को एक न्यायिक व्यक्ति  स्वीकार किया जाता है, तो पूजा का स्थान सटीक स्थान नहीं है जहां वह पैदा हुआ है। बल्कि इसके लिए सभी उपयुक्त स्थान माना जाता है, जिसे लोग समान रूप से महत्वपूर्ण मानते है।

भगवान राम को रामलला विराजमान कहना अर्थविहीन है क्योंकि विराजमान का मतलब किसी इस्थान का निवासी होता है। रामलला विराजमान के याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि न्यायिक व्यक्ति नही है। राजीव भवन ने कहा की जन्मस्थान और जन्मभूमि की बात की जाती है दोनों में बड़ा अंतर है।

सुनवाई की शुरुआत में मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश राजीव धवन ने उन्हें मिली धमकियों का जिक्र किया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व प्रोफेसर षणमुगम को नोटिस जारी किया। प्रोफेसर षणमुगम पर आरोप है कि उन्होंने राजीव धवन को मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश होने के कारण धमकी भरा पत्र लिखा है। अपने को रामभक्त कहने वाले चेन्नई के 88 वर्षीय प्रोफेसर षणमुगम ने राजीव धवन को पत्र लिखकर कहा था कि धवन को मुस्लिम पक्ष के तरफ से पेश नहीं होना चाहिए था। धवन को उनका श्राप लगेगा।

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