बाबरी मस्जिद विवाद: देश जानना चाहता है बहुविवाह ज़रूरी या अयोध्या मामला

Awais Ahmad

बाबरी मस्जिद अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से मामले को संवैधानिक पीठ को भेजने पर मुस्लिम पक्ष और हिन्दू पक्ष में जम कर बहस हुई।

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा अगर बहुविवाह का मामला संवैधनिक पीठ के पास भेजा जा सकता है तो इस मामले को क्यों नहीं भेजा जा सकता? बहुविवाह से ज्यादा यह मामला अहम है कि मस्जिद में नमाज़ अदा करना इस्लाम का मूल हिस्सा है या नहीं।

वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कोर्ट से कहा कि देश जानना चाहता है कि मुसलमानों मे प्रचलित बहुविवाह का मुद्दा ज़्यादा महत्वपूर्ण है या अयोध्या का?जब बहुविवाह का मुद्दा शुरू मे ही संविधानपीठ को भेजा जा सकता है तो इस्माइलफारुकी फ़ैसले का मामला क्यों नही? प्रेस अदालत मे मौजूद है। कोर्ट बताए कि क्या ज़्यादा महत्वपूर्ण? जब बहुविवाह का मुद्दा संविधानपीठ को भेजा गया है तो ये मामला भी भेजा जाए।

इस पर हालांकि हिन्दू पक्ष ने विरोध किया और कहा कि ये किस तरह की भाषा है? देश की जनता जानना चाहती है, ये क्या बात है? इस पर दोनों पक्षों में जम कर बहस हुई।

जस्टिस अशोक भूषण ने धवन से कहा कि प्रेस को इसमे क्यों शामिल कर रहे हैं प्रेस अपना काम कर रहा है आप अपनी बहस करिये। कोर्ट ने कहा मामले पर दोनों पक्षों को सुन कर ही निर्णय देंगे।

राजीव धवन ने कहा कि कोर्ट अभी ही फैसला दे कि इस्माइल फारुखी केस मे मस्जिद को नमाज़ के लिए इस्लाम का ज़रूरी हिस्सा न माने जाने का अंश फिर विचार के लिए संविधान पीठ के भेजा जाएगा या नही।

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि आप हमें संतुष्ट करें कि इस्माइल फारुखी केस को संविधान पीठ को क्यों भेजा जाए? कोर्ट ने कहा ये बहस का कोई तरीका नहीं होता। इस्माइल फारुखी केस को संविधान पीठ के पास भेज दिया जाए और आप वहां बहस करेंगे। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद हम तय करेंगे कि मामले को संवैधानिक पीठ के समक्ष भेजा जाए या नहीं।

राजीव धवन ने कहा कि अगर मामला संविधान पीठ को नही जाता है तो उन्हें फिर यही बहस करनी पड़ेगी। इसके लिए समय लगेगा। इस पर कोर्ट ने कहा आप बहस करिये हम सुनने के लिए तैयार है।

40 मिनट के करीब कोर्ट मे गर्म बहस होती रही इसके बाद धवन ने अयोध्या मे केन्द्र सरकार के अधिग्रहण को सही ठहराने वाले इस्माइल फारुखी केस की मेरिट पर बहस हुई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

 

 


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