बाबरी मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा मंदिर बाबर ने तोड़ा इसका क्या सबूत है?

Awais Ahmad

अयोध्या ज़मीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज छठे दिन की सुनवाई हुई। सुनवाई की शुरुआत करते हुए रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि सबसे पहले वह कोर्ट के सामने इतिहासिक सबूत रखने उसके बाद पुरतत्व विभाग के सबूत रखेंगे।

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन ने स्कंद पुराण का जिक्र किया,  सी एस वैधनाथन ने कहा कि रिवाज है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद रामजन्मभूमि के दर्शन का लाभ मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ये पुराण कब लिखा गया था?  सी एस वैधनाथन ने कहा यह पुराण वेद व्यास द्वारा महाभारत काल में लिखा गया था, कोई यह नही जानता कि यह कितना पुराना है । सुप्रीम कोर्ट ने पूछा जो आप कह रहे है उसमें रामजन्मभूमि के दर्शन के बारे में कहा गया है देवता के बारे में नही? सी एस वैधनाथन ने कहा वह इसलिए क्योंकि जन्मस्थान खुद में ही एक देवता है।

वैधनाथन ने कहा कि विदेशी यात्रियों से संबंधित किताब से साबित होता है कि वहां भव्य मंदिर था जिसे तोड़ा गया है। वैधनाथन ने कहा कि उस स्थान को हमेशा जन्मस्थान माना गया, लोगों की जन्मस्थान को लेकर अतिप्राचीन काल से आस्था और विश्वास है इस लिए इसमें कोई विवाद ही नही होना चाहिए। सी एस वैधनाथन ने कहा कि फ्रेंच ट्रेवलर विलियम पिंच ने 1608- 1611 के बीच अयोध्या गए थे और उन्होंने किसी मस्जिद की उपस्थिति की बात नहीं कही विलियम पिंच सन् 1608 से 1611 तक अयोध्या में  रहे और उन्होने एक किताब लिखी, जिसमें राम जन्म भूमि का अस्तित्व स्पष्ट है। दूसरे यात्री जोसफ टाइपन बैरल थे जो अयोध्या आए और उन्होंने अपनी किताब में राम जन्म भूमि का जिक्र किया वैधनाथन ने कहा तीन हिन्दू मन्दिरों के स्थानों पर मस्जिदें बनाई गई, जिनमें से एक रामजन्म स्थान है, अयोध्या शहर में जब बौद्ध का राज था, तभी शहर का पतन शुरू हुआ। वैधनाथन ने पुरातत्व विभाग की 1863, 1864, 1865 की रिपोर्ट का हवाला दिया।

इसमें चीनी स्कॉलर फा हाइन के रामनगरी अयुता आने का जिक्र है, राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या में 368 मंदिर बनवाए, जिसमें रामजन्मभूमि पर बनाया गया मंदिर भी शामिल रामलला विराजमान ने कहा कि राम जन्म भूमि पर स्थित किला बाबर ने तोड़ा था या औरंगजेब ने तोड़ा था। वैश्विक स्तर पर लिखे गए तथ्यों में यह भ्रम है पर राम अयोध्या के राजा थे और उनका जन्म वहां हुआ था इस पर कोई भ्रम किताबों में नहीं है। वैद्यनाथन ने कहा बाबर द्वारा बाबरी मस्जिद बनाये जाने का पहला उल्लेख 1838 में मोंटोगोमरी नामक पुस्तक में मिलता है। विभिन्न यूरोपीय यात्रियों की  पुस्तकों के संस्करणों से इस सवाल उठता है किसने कथित तौर पर मंदिर को ध्वस्त किया था। वैद्यनाथन ने कहा कि इस बात में मतभेद है कि बाबर और औरंगजेब में किसने मंदिर ध्वस्त किया, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यह सन 1786 से पहले ध्वस्त हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने वकील से सवाल पूछा कि  बाबरी मस्जिद का जिक्र कब आया और इसके क्या प्रमाण है की बाबर ने मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। वैद्यनाथन ने कहा कि 19वीं सदी में, उससे पहले इसका कहीं जिक्र नहीं मिलता है। वैद्यनाथन ने कहा हां बाबर ने अपने फौजी कमांडर को आदेश दिया, वैद्यनाथन ने कहा शिलालेख जिस पर पर्याप्त संदेश लिखा गया है। वैद्यनाथन ने  ब्रिटिश सर्वाईवर मार्टिन के स्केच का जिक्र किया, जिसमें 1838 के दौरान मंदिर के पिलर दिखाए गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर ईसा मसीह के जन्म से 57 साल पहले मंदिर बना था, हिंदुओं का मानना है कि मुगलों के द्वारा मंदिर को तोड़ा गया था।

वैद्यनाथन ने कहा कि यूरोप के इतिहास में तारीखों का जिक्र अहम है, लेकिन हमारे इतिहास में घटना महत्वपूर्ण है। जस्टिस बोबडे ने कहा कि तभी हमारे यहां इसे इतिहास कहा गया है, जिसमें तारीख नहीं इवेंट का जिक्र है। वैद्यनाथन ने एलेग्जेंडर कनिंघम की 1862, 1863, 1864 की ASI की रिपोर्ट का कोर्ट में ज़िक्र किया।

वैद्यनाथन ने  ब्रिटिश सर्वाईवर मार्टिन के स्केच का जिक्र किया, जिसमें 1838 के दौरान मंदिर के पिलर दिखाए गए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर ईसा मसीह के जन्म से 57 साल पहले मंदिर बना था, हिंदुओं का मानना है कि मुगलों के द्वारा मंदिर को तोड़ा गया।

वैद्यनाथन ने कहा कि यूरोप के इतिहास में तारीखों का जिक्र अहम है, लेकिन हमारे इतिहास में घटना महत्वपूर्ण है, जस्टिस बोबडे ने कहा कि तभी हमारे यहां इसे इतिहास कहा गया है, जिसमें तारीख नहीं इवेंट का जिक्र है, गुप्त काल के प्रारंभ के विद्वानों के अनुसार ब्राह्मण धर्म साकेत शहर में लोकप्रिय हो गया था, जिसे अब अयोध्या नाम से जाना जाता है। मथुरा और वाराणसी जैसे अन्य नगरों के साथ मिलकर यह नगर दूसरी सहस्त्राब्दि में उभरा, लेकिन गुप्त काल के बाद मथुरा और वाराणसी ने अपनी महत्वता खो दी, लेकिन साकेत(अयोध्या)का महत्व बना रहा। रामलला के वक़ील सी एस वैधनाथन ने कहा कि विवादित स्थान का दावा लोगों के विश्वास पर आधारित है, जिसे दो-तीन हिस्से में विभाजित नही किया जा सकता।

रामलला के वकील सी एस वैधनाथन ने कहा जिस हिस्से पर हम हक़ की बात कर रहे है उससे  लोगों की आस्थता जुड़ी हुई है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा लगता है कि अयोध्या में हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म,  इस्लाम का प्रभाव रहा है। एस वैद्यनाथन ने कहा कि वहां ऐसा था, लेकिन हिंदू धर्म के लोगों को जन्मभूमि को लेकर विश्वास बरकरार है।

जस्टिस बोबडे ने विवादित स्थल पर शिया और सुन्नी के बीच के मतभेद के बारे में पूछा कि विवादित ज़मीन पर सुन्नी पक्ष का क्या रुख था। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि यह 1945 का मामला था जो 1989 के  इस मुक़दमे को प्रभावित नहीं करता और इलाहाबाद HC के फैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि HC ने सुन्नी पक्ष के हक़ में फैसला दिया था।

वैद्यनाथन ने कहा  कि इसमें कोई विवाद नहीं मस्जिद जन्मस्थान पर बनाई गई थी, वैधनाथन ने कहा कि ASI के सबूत है कि वहाँ एक मंदिर था जिसे नष्ट किया गया और मस्जिद बनाया गया। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।

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