बाबरी मस्जिद विवाद मामला: SC ने निर्मोही अखाड़ा से मांगे जमीन के दस्तावेज, अखाड़े ने कहा- डकैती में गायब हो गए

सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि उनके पास विवादित ज़मीन के सरकारी नियंत्रण में दिए जाने से पहले उनके दावा साबित करनेके राजस्व रिकार्ड या कोई सबूत है तो दिखाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ज़मीन पर कब्ज़ा होने का दावा कर रहा है, तो उन्हें यह साबित करना होगा। निर्मोही अखाड़े ने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि 1982 में डकैती में कई दस्तावेज़ चोरी हो गए थे।

Awais Ahmad

अयोध्या बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद मामले में आज सुनवाई के दूसरा दिन था। निर्मोही अखाड़ा ने अपनी दलील आगे बढ़ाते हुए अखाड़े के वकील सुशील कुमार जैन ने सुप्रीम कोर्ट को यह आश्वस्त कराने की कोशिश किया कि विवादित ज़मीन पर नियंत्रण को लेकर दायर उनका मुकदमा नियमों के मुताबिक सिविल सूट दायर करने की समयसीमा का उल्लंघन नहीं करता। मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने लॉ ऑफ लिमिटेशन यानी सूट दायर करने की समय सीमा को लेकर सवाल उठाया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि उनके पास विवादित ज़मीन के सरकारी नियंत्रण में दिए जाने से पहले उनके दावा साबित करनेके राजस्व रिकार्ड या कोई सबूत है तो दिखाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ज़मीन पर कब्ज़ा होने का दावा कर रहा है, तो उन्हें यह साबित करना होगा। निर्मोही अखाड़े ने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि 1982 में डकैती में कई दस्तावेज़ चोरी हो गए थे।

निर्मोही अखाड़े ने निचली अदालत का हवाला दिया कि कैसे उसके दावों को अदालत ने माना। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को दस्तावेज़ जुटाने के लिए और समय दिया और रामलला विराजमान के वकील से दलील पेश करने को कहा।

सुनवाई की शुरुआत में निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि  वह ओनरशिप और क़ब्ज़े की मांग कर रहे हैं। ओनरशिप का मतलब मालिकाना हक नही बल्कि क़ब्ज़े से है, उन्हे राम जन्मभूमि पर क़ब्ज़ा दिया जाए। निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि पूजा में रुकावट होने की वजह से निर्मोही अखाड़े के कारण सिविल सूट दाखिल किया।

जस्टिस बोबडे ने कहा कि अगर किसी के पास ज़मीन का कब्ज़ा नही है तो वह उस स्थान पर पूजा नही कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से कहा कि जो दस्तावेज़ सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध नही है उसका उदाहरण न दें, सुप्रीम कोर्ट ने इसपर नाराज़गी भी जताई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने कहा कि क्या निर्मोही अखाड़े को सेक्शन 145 CRPC के तहत राम जन्म भूमि पर दिसंबर 1949 के अधिग्रहण के आदेश को चुनोती देने का अधिकार है? क्योंकि अखाड़ा ने लिमिटेशन अवधि (6 साल) समाप्त होने पर 1959 में आदेश को चुनोती दी। निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1949 में अटैचमेंट आर्डर था पर मामला निचली अदालत में पैंडिंग था और उनकी 1959 में अपील तक भी पेंडिंग ही था।

अयोध्‍या SC ने निर्मोही अखाड़े से जमीन पर कब्‍जे के कागजी सबूत मांगे, SC ने अखाड़े से पूछा कि क्‍या आपके पास अटैचमेंट से पहले रामजन्‍मभूमि पर मालिकाना हक का कोई कागजी सबूत या रेवेन्‍यू रिकॉर्ड हैं,निर्मोही अखाड़े ने जवाब दिया कि 1982 में हुई डकैती में सारे रिकार्ड गायब हो गए।

लंच के बाद शुरू हुई सुनवाई में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ने कहा कि अगले 2 घंटे  में हम मौखिक और दस्तावेज़ी सबूतों को देखना चाहेंगे। वहीं जस्टिस डी वाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि हमको असली दस्तावेज़ दिखाइए। इस पर निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि दस्तावेजों का उल्लेख इलाहाबाद HC के फैसले में शामिल है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप अपने तरीके से इसको रखिये।

जिसपर निर्मोही अखाड़े ने निचली अदालत का हवाला दिया कि कैसे उसके दावों को अदालत ने माना। दस्तावेज़ पेश करने पर निर्मोही अखाड़े ने असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि 1982 में डकैती में कई दस्तावेज़ चोरी हो गए थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े को दस्तावेज़ जुटाने के लिए और समय दिया और रामलला विराजमान के वकील से दलील पेश करने को कहा। और रामलला विराजमान के वकील से दलील पेश करने को कहा।

रामलला के वकील परासरण ने कहा कि करोड़ो लोग मानते है और उनका विश्वास और आस्था है कि राम वहां विराजमान हैं और यह अपने आप मे ठोस सबूत है कि वह राम का जन्मस्थली हैं।

रामलाल के वकील के परासरन ने कहा कि ब्रिटिश राज्य में भी जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने बटवारा किया तो उस जगह को उस जगह को मस्जिद की जगह राम जन्मस्थान का मंदिर माना था। अंग्रेजों के ज़माने के फैसले में  भी वहां बाबर की बनाई मस्जिद और राम जन्मस्थान का ज़िमर किया था।

जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या जिस तरह राम का केस सुप्रीम कोर्ट में आया है कही ओर किसी गॉड का केस आया है, क्या जीसस बेथलम में पैदा हुए इस पर किसी कोर्ट में सवाल उठा था। रामलला के वकील के परासरण ने कहा कि वह इस मसले को चेक कराएंगे।

रामलला के वकील के परासरण ने कहा कि धर्म का मतलब रिलीजन कतई नहीं है, गीता में धृतराष्ट्र ने पूछा कि धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे,  वहां धर्मक्षेत्र का मतलब रिलीजन से कतई नहीं है। अयोध्या विवाद मामले में कल सुनवाई जारी रहेगी और रामलला विराजमान अपना पक्ष पेश करेगा।

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