बाबरी मस्जिद विवाद: जाने चौथे दिन की सुनवाई में क्या हुआ

वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि इतनी तेज़ सुनवाई से मुझे केस की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। अगर कोर्ट ने ऐसे सुनवाई की तो मुझे केस छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है 5 जजों में से शायद सिर्फ जस्टिस चंद्रचूड़ ने ही पूरा फैसला पढ़ा होगा। मुझे तो दूसरी भाषाओं से अंग्रेज़ी में हुए दस्तावेजों के अनुवाद और बहुत सारे फैसलों का भी अध्ययन करना है।

Awais Ahmad

अयोध्या पर हफ्ते में 5 दिन ही सुनवाई होगी. 3 दिन सुनवाई करने की मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील राजीव धवन की मांग सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी। धवन ने कहा था कि लगातार सुनवाई से उन्हें तैयारी के लिए पूरा समय नहीं मिल पाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब आपके जिरह की बारी आएगी, हम बीच में आपको तैयारी ब्रेक दे देंगे।

वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि इतनी तेज़ सुनवाई से मुझे केस की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। अगर कोर्ट ने ऐसे सुनवाई की तो मुझे केस छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है 5 जजों में से शायद सिर्फ जस्टिस चंद्रचूड़ ने ही पूरा फैसला पढ़ा होगा। मुझे तो दूसरी भाषाओं से अंग्रेज़ी में हुए दस्तावेजों के अनुवाद और बहुत सारे फैसलों का भी अध्ययन करना है।

मुस्लिम पक्ष के वकील के इस रुख पर बेंच ने कुछ हैरानी जताई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, आपने अपनी बात रख दी है। हमें इस पर जो भी कहना है, वो हम जल्द ही आपको बताएंगे।

आज सुनवाई खत्म करते वक्त 3:55 पर कोर्ट ने कहा कि वो मामले पर हफ्ते में 5 दिन ही सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर धवन तैयारी के लिए समय मांगेंगे तो उन्हें समय दे दिया जाएगा।

आज सुनवाई के दौरान रामलला के वकील परासरन ने कई धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं का हवाला दिया। परासरन ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि जिस जगह का यहां मुकदमा चल रहा गया, उसे श्रीराम का जन्मस्थान मान कर श्रद्धालु सैकड़ों साल से उसके चारों तरफ परिक्रमा करते हैं। करोड़ों लोगों की इस आस्था को पहचानना और उसे मान्यता देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है।

रामलला के वकील के परासरन  ने कहा कि हिन्दू किसी निश्चित रूप में देवताओं की पूजा नहीं करते, वह देवताओं को दिव्य अवतार के रूप में पूजते हैं देवताओं के स्थापित होने और मंदिर निर्माण से पहले हिन्दू भगवान राम की पूजा करते थे।

पूर्व एटॉर्नी जनरल के परासरन ने कहा कि देवता को सजीव प्राणी माना जाता है और इसे घर का स्वामी माना जाता है, ठीक उसी तरह जैसे सेवक अपने मालिकों के साथ करते हैं। परासरन ने कहा कि ईश्वर कण कण में है, लेकिन विभिन्न रूपों में उसका मानवीकरण कर पूजा होती है, मंत्र पूजा और मूर्ति तो ईश्वर की पूजा का माध्यम है।

रामलला के वकील पूर्व एटॉर्नी जनरल के परासरन ने कहा राम का अस्तित्व और उनकी पूजा यहां मूर्ति स्थापित होने और मन्दिर बनाए जाने से भी पहले से है, हिंदू दर्शन में ईश्वर किसी एक रूप में नहीं है, अब केदारनाथ को ही लीजिए तो वहां कोई मूर्ति नहीं है, प्राकृतिक शिला है।

जस्टिस भूषण ने पूछा कि क्या अयोध्या में जनमस्थान के आसपास एक परिक्रमा होती है? रामलला के वकील ने कहा परासरन ने कहा कि एक परीक्षित मार्ग है, जहाँ लोग परीक्षित होते थे, उसमें कोई प्रतिमा नहीं थी,  इससे यह निष्कर्ष निकल सकता है कि परिक्रमा जन्म स्थान की होती थी। पहाड़ों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है, तिरुवनमलाई और चित्रकूट में परिक्रमा की जाती है, गोवर्धन में भी परिक्रमा होती है, यही तीर्थयात्रा है

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि क्या इस समय रघुवंश डाइनेस्टी में कोई इस दुनिया में मौजूद है? रामलाल के वकील परासरण ने कहा कि मुझे नहीं पता। अपनी जिरह में परासरण ने रामायण में उल्लेख है कि सभी देवता भगवान विष्णु के पास गये और रावण के अंत करने की बात कही। तब विष्णु ने कहा कि इसके लिये उन्हें अवतार लेना होगा। इस बारे में जन्मभूमि का वर्णन किया गया है और इसका महत्व है। हिन्दू शास्त्र में जन्मस्थान कि महत्ता स्पष्ट है और हिन्दुओं से संबंधित कानून उसी शास्त्र पर आधारित हैं। मंदिर की परिक्रमा के साथ पूरे परिसर कि परिक्रमा भगवान कि आराधना है।परासरण ने पुष्कर, मधुरई समेत तमाम स्थानों का उहाहरण दिया।

मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 13 अगस्त को होगी। उस दिन भी रामलाल के वकील अपना पक्ष रखेंगे।

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