बाबरी मस्जिद विवाद: 39 वां दिन: अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी भी मस्जिद में नामज़ पढ़ सकते है : हिन्दू पक्ष

Awais Ahmad

अयोध्या मामले की सुनवाई का मंगलवार को 39वां दिन था। हिन्दू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील के. परासरन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के दलीलों का जवाब देने उठे तो शुरुआत भावनात्मक दलीलों से हुई। परासरन ने कहा कि बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अयोध्या में राममन्दिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब दुरुस्त करना चाहिए। परासरन ने कहा कि एक विदेशी आक्रमणकारी को ये हक़ नहीं दिया जा सकता है कि वो इस देश में आकर ख़ुद को बादशाह घोषित करे और कहे कि मेरी आज्ञा ही क़ानून है। हालांकि इतिहास में अनेक शक्तिशाली हिंदू राजा भी रहे है लेकिन किसी के विदेश में इस तरह आक्रमण करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता।

परासरन ने दलील को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हिन्दू श्रीराम के जन्मस्थान पर अपनी आस्था को लेकर सैकड़ो साल से संघर्ष कर रहे है। अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते हैं पर हिन्दुओ के लिए यह जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने टोकते हुए पूछा कि क्या परासरन ये भी बताएंगे कि अयोध्या में कितने मन्दिर हैं! परासरन ने धवन की टिप्पणी पर एतराज जताया। कहा- उन्होंने हिंदुओ के लिए जन्मस्थान के महत्व को साबित करने के लिए ये दलील दी है। फिर  ऐसी कोई तुलना करने से पहले वहाँ हिंदू- मुस्लिम जनसंख्या के अनुपात को भी देखिए।

आज परासरन की दलीलों के दौरान पांच सदस्यीय बेंच के जज चीफ जस्टिस जस्टिस बोबड़े और जस्टिस चन्दचूड़ ने कई सवाल पूछे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुस्कुराते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से पूछा – डॉ धवन, क्या हम हिंदू पक्ष से पर्याप्त सवाल पूछ रहे हैं ! कल आपका आरोप था कि हिंदू पक्ष से सवाल नहीं किये गए। चीफ जस्टिस ने परासरन से पूछा कि क्या आप सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड की इस दलील से सहमत हैं कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है! परासरन ने जवाब दिया कि ‘मेरा कहना सिर्फ इतना भर है कि एक मंदिर हमेशा मन्दिर ही रहेगा।

मैं उनकी दलील पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा क्योंकि मैं इस्लामिक मान्यताओं का जानकार नहीं हूँ।’ सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से राजीव धवन ने दलील दी थी कि मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है (नमाज़ नहीं पढ़ने से उसके स्टेटस में कोई अंतर नहीं आता)। परासरन ने दलील दी कि 1885 का फैजाबाद कोर्ट का जो फैसला महंथ रघुबरदास के मामले में आया था वह फैसला हिन्दुओं के खिलाफ नहीं है जैसा कि मुस्लिम पक्ष कह रहा है। उस फैसले में ये कहा गया था कि मस्जिद हिन्दुओं के धार्मिक जगह पर बनाई गयी है। उस फैसले में ये भी कहा गया था कि चूँकि मस्जिद सदियों पहले बनाई गयी है इसलिए कोर्ट वहां मंदिर बनाने की इजाजत नहीं दे सकता। पराशरन ने कहा कि खाली जमीन पर  मस्जिद बनाई गयी , ये साबित करने की जिम्मेदारी मुस्लिम पक्ष की है, हिन्दू पक्ष की नही।

निर्मोही अखाड़े की ओर से पैरवी कर रहे  वकील सुशील कुमार जैन की माँ का निधन हो गया है। इसलिए सुशील जैन की दलील आज नहीं हुई। सुशील जैन सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के दलीलों का कल जवाब देंगे।मुख्यन्यायाधीश ने कल की सुनवाई के लिए सभी पक्ष के लिए समय भी तय कर दिया है। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन को 45 मिनट का समय मिला है सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की दलीलों का जवाब देने के लिए। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को एक घण्टे का समय मिला है हिन्दू पक्ष के जवाब का प्रतियुत्तर देने के लिए। इसके अलावा 45-45 मिनट के चार स्लॉट दोनों पक्ष को मिला है अपनी दलील देने के लिए।

उसके बाद ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़’ पर बहस होगी।मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ का मतलब है कोर्ट में पक्षकारों द्वारा जो मांग की गई होती है, कोर्ट उस मांग से अलग कुछ सुझाव देता है। मतलब अगर किसी पक्ष का दावा पूरी जमीन पर है तो कोर्ट पूछ सकता है कि क्या जमीन के किसी हिस्से पर समझौता हो सकता है? मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर बहस पूरी होने के बाद फैसला कोर्ट फैसला सुरक्षित करेगा। कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने की आख़री 17 अक्टूबर तय की है।

जाने हिन्दू पक्षकार के वकील CS वैद्यनाथन की जिरह के मुख्य बिंदु 

  • वैद्यनाथन- मुस्लिम पक्ष ने इस मामले की सुनवाई के दौरान जून 1860 के दस्तावेज का उपयोग किया है जो इस केस से जुड़ा पहला लीगल दस्तावेज है. सबसे पहले तो इस दस्तावेज़ का अनुवाद ही गलत लगाया गया है. पहले लगाए गए तर्जुमे की तुलना में इसमें नए बिंदु जोड़ दिए गए हैं और वक्फ का ज़िक्र किया गया है. इस तरह कैसे चल सकता है. इस ज़मीन के सम्बंध में स्वामित्व के लिए 1860 के जिस दस्तावेज़ का उल्लेख किया गया है, उस पर यह विचार करना ज़रूरी है कि उस समय अंग्रेजों ने बाबर के समय मस्ज़िद बनवाने वाल साहब बाकी से मीर रजब अली तक परिवार श्रृंखला की कोई जाँच नहीं की थी. ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो इसे न तो ग्रांट टाइटल साबित करता है और न ही डेडिकेशन टाइटल कहा जा सकता है इस जमीन को.
  • SC ने वैद्यनाथन से पूछा कि आपको कितना समय चाहिए. वैद्यनाथन ने कहा कि कोर्ट जितना उचित समय चाहे हमको दे सकता है.CJI ने हिंदू पक्षकार के सभी वकीलों को 45-45 मिनट अपनी जिरह पूरी करने के लिए दिया.इसके बाद राजीव धवन को कल जिरह पूरी करने के लिए एक घंटे का समय दिया जाएगा.उसके बाद दोनों पक्षों को अपनी दलील पर बोलने के लिए 45- 45 मिनट दिया जाएगा.17 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट मोल्डिंग ऑफ रिलीफ़ पर बहस करेगा.
  • वैद्यनाथन- एक देवता को समर्पित संपत्ति प्रतिकूल कब्ज़ा नहीं हो सकती. मुस्लिम पक्ष को इस मामले में मालिकाना हक साबित करना होगा, क्योंकि उनके पास कोई विशेष अधिकार नहीं था. उन्होंने इसके अनुवाद के साथ एक दस्तावेज दिखाया जिसमें बाबर अनुदान का जिक्र था जो सुप्रीम कोर्ट को दिए गए अनुवाद के पूरी तरह विपरीत था. वैद्यनाथन ने कहा कि अंग्रेजों ने जो भूमि उन्हें दी थी, वह यह स्थान नहीं था जो राम जन्म भूमि है.
  • वैद्यनाथन- मुस्लिमों का विशिष्ट अधिकार नहीं था.
    जस्टिस बोबडे- लेकिन इसका इस्तेमाल मस्जिद के रूप में किया जाता था.
    वैद्यनाथन- हां. मुसलमानों द्वारा कब्जे का कोई सबूत नहीं है. वे इस पर भरोसा करते हैं.
    जस्टिस चंद्रचूड़ – निष्कर्षों का सारांश है कि वे इस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं.
  • सीएस वैद्यनाथन ने 1994 के इस्माइल फरूकी केस के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से दी गई दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमान बाबर की ग्रांट या स्वामित्व साबित नहीं कर पाए हैं.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि पूरे मामले में यह सिर्फ़ शंका जताते रहे. कुछ भी स्पष्ट नहीं कर पाए. इनकी दलीलें जो मालिकाना हक के संबंध के मद्देनजर दी गईं, उसमें अवैध कब्जा और अपने मालिकाना हक को यह साबित नहीं कर सके.
  • वैद्यनाथन ने कहा कि ये साबित नहीं कर पाए कि इनका कब्जा पहले था. मस्जिद किसने बनवाई और मंदिर तोड़कर मंदिर नहीं बनी. कोई साक्ष्य नहीं इनके पास.
  • रामलला विराजमान की तरफ से सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि जब 1528 में मस्जिद बनाई गई तब उन्होंने अवैध कब्जा किया था. लंबे समय तक जिसका उपयोग किया गया और यह स्वीकार भी किया गया है कि वह देवता का स्थान था.
  • वैद्यनाथन ने सुप्रीम कोर्ट से जिरह करने के लिए समय मांगा. वैद्यनाथन ने कहा कि मुझको कल जिरह के लिए 60 मिनट दीजिये.CJI ने कहा कि अपनी लिखित दलील कोर्ट को दीजिये.वैद्यनाथन ने कहा कि कोर्ट को हमको सुनना चाहिए. हम गंभीर मामलों पर दलील दी रहे हैं.इस पर CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ठीक है फिर दिवाली तक सुनवाई करते हैं.
  • 1885 का फैजाबाद कोर्ट का जो फैसला महंथ रघुबर दास के मामले में आया था, वो हिंदुओं के खिलाफ नहीं है जैसा कि मुस्लिम पक्ष कह रहा है. उस फैसले में ये कहा गया था कि मस्जिद हिंदुओं की धार्मिक जगह पर बनाई गई है. उस फैसले में ये भी कहा गया था कि चूंकि मस्जिद सदियों पहले बनाई गई है, इसलिए अब इस मुद्दे पर कोर्ट फैसला नहीं दे सकता. परासरन ने कहा कि खाली जमीन पर मस्जिद बनाई गई, ये साबित करने की जिम्मेदारी मुस्लिम पक्ष की है, हिंदू पक्ष की नहीं.
  • जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि दोनों पक्षों के पास जमीन के कागजात नहीं हैं फिर भी दोनों जमीन के हक की मांग कर रहे हैं. कोई भी एडवर्स पजेशन की बात नहीं कर रहा. ऐसे में कौन सा कानूनी सिद्धांत लागू होगा.परासरन- हम इस पर देखकर बाद में बताएंगे.जस्टिस चंद्रचूड़- अगर जमीन सरकार की है और आप लंबे समय से बैठे हैं. ऐसे में आप मालिकाना हक की मांग एडवर्स पजेशन के आधार पर कर सकते हैं कि हम लंबे समय से यहां काबिज हैं.परासरन- यहां कोई एडवर्स पजेशन की मांग नहीं कर रहा है.

सीएस वैद्यनाथन और राजीव धवन के बीच कोर्ट के बीच नोंकझोंक

वैद्यनाथन ने कहा कि मैं कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करूंगा. धवन ने कहा मुझे आरोपित मत करो. चुप रहो. सीजेआई ने वैद्यनाथन से कहा कि आप बोलिए हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा. सीएस वैद्यनाथन का कहना है कि राजीव धवन एक स्लैंगिंग मैच के दौरान ‘हताश’ हो रहे हैं, जिसकी शुरुआत स्लेजिंग के बाद के आरोपों के साथ हुई थी. धवन वैद्यनाथन पर चिल्लाते हैं “इसे बंद करो”. वैद्यनाथन ने धवन पर अनुचित आचरण का आरोप लगाया- वह मुझे कैसे रोकने के लिए कह सकते हैं?

धवन ने वैधनाथन की दलील पर उनको रोका, जिस पर CJI रंजन गोगोई ने नाराज़गी जताई

CJI ने कहा कि कोर्ट को आपत्तियों के बारे में याद दिलाने की ज़रूरत नहीं है कोर्ट खुद उसको समझता है

-सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की तरफ से राजीव धवन ने दलील दी थी कि मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहती है-

-बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की नहीं दी जा सकती है इजाजत- के. परासरन

-अनेक शक्तिशाली हिंदू राजा भी रहे है, लेकिन किसी के विदेश में इस तरह आक्रमण का नहीं मिलता है कोई सबूत- के. परासरन

– हिन्दू श्रीराम के जन्मस्थान पर आस्था को लेकर सैकड़ों साल से कर रहे संघर्ष- के परासरन

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