बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

Awais Ahmad

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या के 2.77 एकड़ विवादित भूमि मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित ज़मीनहिंदुओं को दे दिया, जिससे राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पांच जजों की बेंच में यह फैसला एकमत होकर सुनाया। मंदिर बनाने की जिम्मेदारी एक ट्रस्ट को मिलेगी. केंद्र सरकार को 3 महीने में ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया है. केंद्र चाहे तो जमीन के हक से बाहर किए गए निर्मोही अखाड़े को मंदिर के ट्रस्ट में जगह दे सकती है.

इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में मुस्लिमों को पांच एकड़ जमीन वैकल्पिक स्थल पर देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिमों को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश इन चार वजहों के चलते दिया.सरकार तय करेगी कि ये जमीन अधिगृहीत जमीन के अंदर हो या अयोध्या में ही किसी और जगह पर.  कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया.

 

कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम समाज के साथ जो ग़लत हुआ उसमें सुधार ज़रूरी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि धर्म निरपेक्ष देश में मुस्लिम मस्जिद से ग़लत तरीके से बेदखल हुए हैं. तीसरी वजह का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 22-23 दिसंबर 1949 को मस्जिद को अपवित्र किया गया. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा तोड़ना ग़लत था. मुस्लिमों के इबादत की जगह की स्थापना करना ज़रूरी है.

 

शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिमों को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन मिलेगी. शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुस्लिम अंदर के प्रांगण पर अपना विशेष कब्जा नहीं साबित कर सके, जबकि बाहरी प्रांगण हिंदुओं के विशेष कब्जे में है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमीन को तीन पक्षों को बांटने के फैसले को गलत बताया, क्योंकि परिसर पूरी तरह से संयुक्त है. इन पक्षों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड शामिल हैं.

 

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत निर्देश दिया कि निर्मोही अखाड़ा को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. अखाड़ा के मुकदमे को खारिज कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के परिसर का प्रबंधक होने का दावा भी खारिज किया. कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट के बनने तक जमीन कानूनी रिसीवर के पास रहेगी.

 

पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से शिया वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज कर दिया. इस याचिका में दावा किया गया था अयोध्या की विवादित जमीन के बाबरी मस्जिद पर अधिकार उसका सुन्नी वक्फ बोर्ड से ज्यादा है

 

कोर्ट ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 2003 की रिपोर्ट को अनुमान के तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता या विवादित स्थल पर ईदगाह के पूर्व अस्तित्व के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता. इसमें कहा गया, बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था

 

कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को महज राय बताना इस संस्था के साथ अन्याय होगा। हिन्दू विवादित स्थल को ही भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और मुस्लिम भी इस स्थान के बारे में यही कहते हैं।

 

इस दौरान उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस को भी गंभीर अपराध माना। उन्होंने कहा कि इस अपराध से जुड़े दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अयोध्या में राम के जन्म होने के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया. हिंदू वहां पूजा करते रहे इस बात के भी साक्ष्य मिले. 1856 से पहले हिंदू अंदरूनी हिस्से में भी पूजा करते थे. हिंदू मुख्य गुंबद के नीचे गर्भगृह मानते थे. जब उन्हें रोका गया तो बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे।

 

विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर मुस्लिम पक्ष के दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए. अपने फैसले के पेज नंबर 791 के पैरा नंबर 678 में कोर्ट ने लिखा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के मुताबिक 1528 में मस्जिद बनने के बाद से मुसलमान वहां नमाज पढ़ते थे लेकिन 1856 तक वहां नमाज पढ़े जाने के कोई सबूत नहीं मिले. कोर्ट न ये भी कहा कि मुस्लिम पक्ष इमारत के अंदरूनी हिस्से में सिर्फ अपना कब्जा भी साबित नहीं कर पाए. 1856 से पहले हिंदू भी अंदरूनी हिस्से में पूजा करते थे

 

 

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