गाजा में इजरायली कार्रवाई का अर्जेंटीना ने किया विरोध

Ashraf Ali Bastavi

यरुशलम.अर्जेंटीना ने इजरायल के खिलाफ यरुशलम में शनिवार देर रात कोहोना वाला वर्ल्ड कप फ्रेंडली मैच रद्द कर दिया है। गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई के बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते अर्जेंटीना ने यह फैसला लिया है। अर्जेंटीना के स्ट्राइकर गोंजालो हिगुयान ने मैच रद्द किए जाने की जानकारी दी है। उन्होंने एक अंग्रेजी खेल चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि आखिरकार उन्होंने सही फैसला किया। दो दिन पहले ही फिलिस्तीन फुटबॉल फेडरेशन के प्रमुख जिब्रिल राजोब ने कहा था कि यदि अर्जेंटीना यरुशलम में यह मैच खेलता है तो फुटबॉल के अरब और मुस्लिम समर्थक लियोनेल मेसी की तस्वीरें और उनकी जर्सी की प्रतिकृतियां जलाएं।

इजरायली पीएम ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति से की बात
– अर्जेंटीनी मीडिया ने भी मैच रद्द किए जाने की बात कही है। हालांकि, इजरायली फुटबॉल फेडरेशन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

– मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति मौरिसियो मैक्री से बात की। उन्होंने यरुशलम में होने वाले मैच को रद्द नहीं करने की अपील की है।

– अर्जेंटीना के विदेश मंत्री जार्ज फौरी ने मैच रद्द किए जाने की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन वाशिंगटन में एक कार्यक्रम से इतर इतना जरूर कहा, “जहां तक मुझे पता है, राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी वहां खेलने को तैयार नहीं थे।”

अर्जेंटीना के फैसले से गाजा में खुशी की लहर
– अर्जेंटीना-इजरायल फ्रेंडली मैच रद्द होने की खबर से गाजा में खुशी की लहर है। वेस्ट बैंक में रामाल्ला में फिलिस्तीन फुटबॉल एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर मैच रद्द करने के लिए अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लियोनेल मेसी और उनके साथी खिलाड़ियों का आभार व्यक्त किया है।

– फिलिस्तीन फुटबॉल एसोसिएशन के चेयरमैन जिब्रिल राजोब ने कहा, “मूल्यों, नैतिकता और खेल भावना की जीत हुई है। अर्जेंटीना ने इस खेल को रद्द कर इजरायल को लाल कार्ड दिखाया है।”

– राजोब लंबे समय से फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा और अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति से भी इजरायल को प्रतिबिंधित करने की मांग कर रहे हैं।

इजरायली सेना की गोलीबारी में मारे गए थे 120 फिलिस्तीनी नागिरक
– बता दें कि इजरायल ने यरुशलम को अपनी राजधानी घोषित किया है। अमेरिका ने उसके इस फैसले पर अपनी मुहर भी लगा दी है। ट्रंप ने तेल अवीव की जगह यरुशलम में अमेरिकी दूतावास स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

– पिछले सोमवार को इसके विरोध में गाजा-इजरायल सीमा पर फिलिस्तीनियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इजरायली सेना ने गोलीबारी की। इसमें कम से कम 120 फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे गए और करीब 3,000 लोग घायल हो गए थे।

– हालांकि संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के ज्यादातर देश पूरे यरुशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते हैं। यही वजह है कि यरुशलम में किसी भी देश का दूतावास नहीं है। अमेरिका ने ही अपना दूतावास वहां स्थानांतरित करने का फैसला किया है।

यहूदियों, मुस्लिम और ईसाइयों तीनों के लिए महत्वपूर्ण है यरुशलम
– यरुशलम का क्षेत्रफल 125.156 वर्ग किमी और आबादी 8.82 लाख है। इसमें 64 फीसद यहूदी, 35 फीसद अरबी और 1 फीसद अन्य धर्म से जुड़े लोग रहते हैं।

– इजरायल और फिलिस्तीन दोनों अपनी राजधानी यरुशलम को बनाना चाहते थे। यह ऐतिहासिक शहर यहूदियों, मुस्लिम और ईसाइयों तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

– यरुशलम में यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल टेंपल प्वाइंट स्थित है। कहा जाता है कि उनका पवित्र स्थल सुलेमानी मंदिर भी यहीं हुआ करता था। उसे रोमनों ने नष्ट कर दिया था।

– यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद है। मुस्लिमों के यह बहुत पाक स्थल है। वे मानते हैं कि अल-अक्सा मस्जिद वह जगह है, जहां से पैगंबर मोहम्मद जन्नत पहुंचे थे।

– ईसाइयां का मानना है कि यरुशलम में ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यहां पर मौजूद सपुखर चर्च को ईसाई बहुत ही पवित्र स्थल मानते हैं।

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