सुप्रीम कोर्ट में ए पी सी आर को मिली बड़ी कामयाबी ; कानपूर ए डी एम क़तल केस में वासिफ़ हैदर समेत चारों मुल्ज़िम 18 साल बाद बरी

Asia Times Desk

कानपूर: सुप्रीम कोर्ट में ए पी सी आर को आज बड़ी कामयाबी मिली है कानपूर ए डी एम क़तल केस में वासिफ़ हैदर समेत चारों मुल्ज़िम अठारह साल बाद बरी हो गए हैं ।

मालूम हो कि 16 मार्च 2001 में कानपूर फ़सादा के दौरान ए डी एम का क़तल हुआ था, यह फसाद  उस वक़्त पेश आया था जब अफ़्ग़ानिस्तान के बामियान में बुद्धा स्टैचू को  तोड़े जाने के ख़िलाफ़ मार्च करते    हुए वी एच पी के लोगों ने क़ुरान को नज़र-ए-आतिश कर दिया था।

क़ुरान जलाए जाने के हादसे  से नाराज़ मुस्लमानों ने देश  के विभिन्न स्थानों  पर एहतिजाज किए जिसमें 21मार्च 2001 जुमा को नूरानी मस्जिद कानपूर में एहतिजाज हुआ, एहतिजाज के दौरान पुलिस के साथ झड़प  के दौरान ए डी ऐम पाठक की गोली लगने से मौत हो गई थी।

जूलाई 2001 में दिल्ली स्पैशल सेल ने मुमताज़ की गिरफ़्तारी और इक़बालिया बयान के बाद वासिफ़ हैदर, हाजी अतीक़ अहमद और शफ़ाअत अली को एडी एम सी पी पाठक के क़तल के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया था।

ज़िला अदालत ने 22 जनवरी 2004 को तमाम मुल्ज़िमीन को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई  हाईकोर्ट ने 29 मई 2009 में तमाम ही मुल्ज़िमीन को बाइज़्ज़त बरी करते हुए ज़िला अदालत के फ़ैसले को रद कर दिया था जिसके ख़िलाफ़ उतर प्रदेश सरकार  ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाख़िल की थी । वासिफ़ हैदर और हाजी अतीक़ के  लिए ए पी सी आर की तरफ़ से सुप्रीमकोर्ट में सीनीयर वकीलों  कामिनी जयसवाल, सिद्धार्थ दवे, फर्रुख रशीद और अबूबकर सबॉक् ने केस की पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर  ख़ुशी का इज़हार करते हुए ए पी सी आर के सैक्रेटरी मुहम्मद अहमद ने कहा कि आज हमारे देश  में अगर इन्साफ़ क़ायम है तो इस में अदालतों  का बहुत अहम किरदार है .  इन्साफ़ हासिल करने में 18 साल की  मुद्दत पर अफ़सोस करते हुए जूडीशल रीफार्म पर एक बड़ी तहरीक की ज़रूरत पर अवाम से संजीदा होने की भी दरख़ास्त की

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