रूहानी मुहब्बत की जीती जागती मिसाल मोहतरमा जमाल अहमद

फर्श से अर्श तक पहुँचने की दास्ताँ

Ansar Imran SR

आज एक बेहद ही मुख्लिस और कामयाब बुजुर्ग औरत से मुलाकात हुई। उनसे मिलने तो मैं गया तो था किसी और काम से मगर उनके साथ जैसे जैसे वक़्त बिता तो मैं अपनी हस्ती को भूल रूहानियत में चला गया। अपनी जिंदगी का पूरा सार उनको बताया और उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी मेरे सामने खुले पन्नों की तरह रख दी।

उनके साथ उनके शौहर भी थे। दोनों की मुहब्बत का क्या आलम था ये तो मैं लफ़्ज़ों में बयान भी नही कर सकता बस उसे महसूस किया है। महसूस करने का कोई पैमाना होता तो शायद आप लोग समझ सकते थे। मेरी ज़िंदगी के दोनों पहलू पर्सनल और कारोबारी दोनों को उन्होंने एक लाइन में सॉल्व कर दिया।

ज़िन्दगी में पहली बार ख्वाइश हुई के इनके साथ फोटो खिंचवानी चाहये मगर हिम्मत जवाब दे गई। उनका मेरे सर पर हाथ फैरना और दुआ देना रूह में उतर गया और आंसू के कतरे में टपक गया।

आज किसी से विदा लेते में तकलीफ हुई और दिल से दुआ निकली के काश वक़्त यहीं ठहर जाता। उनका मुझे मिठाई खिलाना और अपने सगे बच्चे की तरह समझाना मुझे दूसरी दुनिया में ले गया।

आते वक्त आलम ये था के मैंने उनसे थोड़ी और मिठाई मांगी ताकि अपने कुछ और खास लोगों के लिए ले सकूँ तो उन्होंने ने ढेरों दुआओं के साथ मुझे बहुत सारी मिठाई दी।

आज वक़्त के गुजर जाने का बेहद अफसोस हुआ काश कुछ वक्त और मिलता ताकि रूह की ग़िज़ा पूरी हो सकती। बहुत सुना था दिल से दिल की बात आज महसूस भी किया। अल्लाह इस जोड़ी को अपनी अमान में रखे और लम्बी और खुशनुमा ज़िन्दगी दे।

ज़िन्दगी के जिन दो फैसलों को लेने में लोगों की पूरी ज़िंदगी गुजर जाती है इन्होंने एक ही मुलाकात में सॉल्व कर दी। शायद उसका असर आप मेरी आने वाली ज़िन्दगी में देखें।
पैसे का कोई मोल नहीं सुनता तो बहुत था आज देखा भी बेइंतहा दौलत मगर कोई हैसियत नही उस दौलत की। उनकी ज़िंदगी के किस्से सुने तो आंखे भर आयी। उनकी तकलीफें महसूस करी तो खुद पर शर्म आयी।

मुहब्बत का पैमाना अब क्या ही बताऊं मैं। उनकी वो कारोबार को ले कर नसीहत सीधा दिल मे उतरी जिसे मैंने उसी वक़्त कहा कबूल है कबूल है। मुख्लिस होने की दुआ और नसीहत तो अपने गांठ बांध ली।

ज़िन्दगी जीने तरीका इतना पसंद आया के उनसे दुबारा मिलने की ख्वाइश दिल ओ दिमाग में घर कर गयी है। आज रूह ने तस्लीम किया इमरान तू तो भरम में जी रहा था अपने नेक होने के नेकी क्या होती है जरा इनको देख, इस भरम के टुकड़े हुए हजार मगर खुशी के साथ।

चीजों को देखना सुन्ना और रिकॉर्ड करने से आगे भी एक दुनिया है महसूस करना बस उसके मायने आज समझ मे आये है।

अल्लाह से दुआ है या रब्बुल आलमीन मेरी खुशी भी इन बुजुर्गों को दे दे , इन पर अपनी रहमत नाज़िल फरमा, इनकी मुहब्बत को बुरी नजरों से बचा और अपनी आगोश में जगह दे। अमीन

(ये बुजुर्ग औरत Gebrone, *Botswana* (South African Country) की सबसे कामयाब बिज़नेस वुमन है। जिनकी जमाल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ पूरे अफ्रीका में फैली है।
मोहतरमा जमाल अहमद को मेरा सलाम)

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