एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे का मामला 7 जजों की संविधानिक बेंच सुनेगी

Awais Ahmad

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यके मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए मामले को संविधानिक बेंच के पास सनवाई के लिए भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई सात जजोन की बेंच करेगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की तीन जजों की पीठ ने आज इस मामले की सुनवाई करते हुए मामले को संविधानिक बेंच को भेज दिया।

सुनवाई के दौरान एएमयू ने कहा कि सेकर बदलने के साथ दूसरी सरकार का नज़रिया हज बदलना चहिए। एएमयू देश की सबसे पुरानी मुस्लिम यूनिवर्सिटी है। इसे मिला अल्पसंख्यक दर्जा सभी मुअलिमों के लिए खास मायने रखता है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यूपीए सरकार की अपील को वापस लेने का हलफनामा दाखिल किया है। मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा नही दिया जा सकता है। मोदी सरकार ने हलफनामें में 1967 में अज़ीज़ बाशा केस में संविधान पीठ के फैसले को आधार बनाया है जिसने कहा था कि एएमयू को केंद्र सरकार ने बनाया था मुस्लिम ने नही।
केंद्र ने हलफनामे में 1973 में संसद में बहस के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बयानों का हवाला दिया है जिसमे उन्होंने कहा था कि अगर इस संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया तो देश मे अन्य अल्पसंख्यक वर्ग या धार्मिक संस्थानों को इनकार करने में परेशानी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *