आप की पंजाब में दिन प्रति दिन खराब होती हालात

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी आम आदमी पार्टी गंभीर नहीं दिख रही। नए प्रभारी मनीष सिसोदिया ने अभी तक पंजाब का दौरा नहीं किया है।

Asia Times News Desk

चंडीगढ़:- पंजाब में आम आदमी पार्टी की हवा लगातार निकलती जा रही है। सर्द हवाओं से ठिठुर रहे पंजाब में नगर निगम चुनाव हारने के बाद आप ठिठुर सी गई है। आलम यह है कि दो महीने बाद भी नए प्रभारी व दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने अभी तक आधिकारिक तौर पर पंजाब का एक भी दौरा कर पार्टी को सियासी गर्मी देने की कोशिश नहीं की है।

प्रदेश प्रधान भगवंत मान ने प्रधानगी का ताज पहनने के बाद से ही पहले खुद को पार्टी की तमाम गतिविधियों से दूर कर लिया है। नतीजतन, अगले लोकसभा चुनाव में भी पार्टी की हवा अभी से निकलती दिखाई देने लगी है। विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने तमाम विरोध के बाद भी पंजाब की सियासत में सत्ता पलट करने की भरसक कोशिशें की थीं।

लोगों का अच्छा समर्थन पार्टी को विधानसभा चुनाव से दो सप्ताह पहले तक मिला था। इसके बाद अचानक से कट्टरपंथियों के समर्थन को लेकर खुली पार्टी की पोल के बाद पंजाब के लाखों मतदाताओं ने आप से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। इसके बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा खिसकते जनाधार को बचाने को लेकर की गई तमाम कोशिशें भी रंग नहीं ला सकीं। विधानसभा चुनाव में 80 सीटों का सपना देखने वाली आप सूबे में 20 सीटों पर ही सिमट कर रह गई।

इसके बाद नेता प्रतिपक्ष एडवोकेट एचएस फूलका के इस्तीफे और संजय सिंह की प्रभारी पद से छुट्टी के बाद भगवंत मान के हाथों में आई प्रदेश की कमान ने आप का और बंटाधार कर दिया।

पार्टी की लगभग गतिविधियां और बयानबाजी की सियासत सुखपाल सिंह खैहरा के कंधों पर आ गई। उन्होंने मौके का लाभ उठाकर अपने पुराने सियासी दुश्मन व कांग्रेसी नेता तथा कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह सहित मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं गंवाया।

अलग बात है कि जमीनी रूप से पार्टी का सफाया पंजाब से होता चला गया और जालंधर, अमृतसर व पटियाला के नगर निगम सहित निकाय चुनाव में पार्टी को एक ही सीट से संतोष करना पड़ा। इसके बाद हाईकमान ने नए सिरे से पंजाब में पार्टी पर अपनी पकड़ बनाने के लिए प्रदेश के नेताओं की भावनाओं के विपरीत मनीष सिसोदिया को पंजाब का प्रभारी बना दिया, लेकिन दो महीने में सिसोदिया ने एक भी आधिकारिक दौरा न करके सिद्ध कर दिया है कि उनकी भी दिलचस्पी पंजाब के बजाय दिल्ली की सियासत में ही है। भगवंत मान भी काफी समय से पंजाब के मुद्दों की सियासत पर गंभीर नहीं दिख रहे हैं।

लगातार कमजोर होते जा रहे संगठन को लेकर आप के प्रदेश उप प्रधान व सुनाम से विधायक अमन अरोड़ा कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि संगठन कमजोर हो रहा है या प्रभारी व प्रधान को इसकी परवाह नहीं है। भगवंत मान ने लगातार लोकसभा में मोर्चा संभाल रखा है। वह लोकसभा में पंजाब के मुद्दे उठा रहे हैं। जब भी समय मिलता है तो वह अपने हलके में दौरा करते हैं। रहा सवाल सिसोदिया का तो उनका भी पंजाब दौरा जल्द होने वाला है। वह लगातार पंजाब की लीडरशिप के संपर्क में हैं। हम लोग सारे मुद्दों पर प्रधान व प्रभारी के साथ विचार-विमर्श करके ही आगे की रणनीति तय करते हैं।

साभार:- दैनिक जागरण

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