गर्भवती होने की वजह से सफूरा ज़मानत की हक़दार नहीं हो सकती/दिल्ली पुलिस

दिल्ली : दिल्ली पुलिस ने नॉर्थईस्ट दिल्ली मे सांप्रदायिक हिंसा के सम्बंध में UAPA क़ानून के तहत गिरफ्तार जामिया की छात्रा सफूरा जरगर की ज़मानत अर्जी का विरोध किया। दिल्ली HC में दाखिल जवाब में कहा है कि गर्भवती होने की वजह से सफूरा ज़मानत की हक़दार नहीं हो सकती। उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत है।

दिल्ली हाईकोर्ट में सफूरा जरगर की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और अडिशनल सॉलिसीटर जनरल अमन लेखी ने कोर्ट से कल तक सुनवाई टालने का आग्रह किया। 


सुनवाई के दोरान दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने इस केस में तुषार मेहता और अमन लेखी की पैरवी का विरोध किया। तुषार मेहरा ने कहा कि इन दोनों के पास दिल्ली पुलिस की पैरवी करने के लिए ज़रूरी अनुमति नहीं है। 


जस्टिस राजीव शकधर की बेंच ने सुनवाई कल के लिए टाली। कोर्ट ने कल राहुल मेहरा को भी पेश होने की इजाज़त दी।


दिल्ली पुलिस ने सफूरा की ज़मानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा है कि प्रेग्नेंसी के मद्देनजर जेल में नियमों के मुताबिक उसे ज़रूरी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। पिछले 10 सालो में जेल में 30 डिलीवरी हो चुकी है।


नियमों के मुताबिक गर्भवती कैदियों का पर्याप्त ध्यान जेल में रखा जाता है। सफुरा को  इस आधार पर जमानत नहीं दिया जा सकता कि वह गर्भवती है। 
पिछली सुनवाई के दौरान दिल्ली दंगा मामले में आरोपित जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी) की सदस्य सफूरा जरगर की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस से स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा

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