बिहार के पैरा स्विमर मो. शम्स आलम का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज़

दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में आ चुका है नाम

 

 

“कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता है, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।” इस कहावत को मधुबनी के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक मो शम्स आलम ने सच कर दिखाया है। वो अब तक कई सारे रिकॉर्ड्स स्थापित कर चुके हैं।

इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैपिंयनशिप में गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक मिल चुका है। पिछले साल 8 दिसंबर को बिहार स्विमिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित मिश्रीलाल मेमोरियल विंटर स्विमिंग कंपटीशन 2019 में फास्टेस्ट पैराप्लेजिक स्विमर का रिकॉर्ड बनाया था।

इन्होंने गंगा नदी में सबसे तेज़ दो किलोमिटर की तैराकी 12:23:04 मिनट में पूरा कर लिया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसी रिकॉर्ड के लिए उनका नाम इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

मों शम्स बताते हैं कि इस रिकॉर्ड के लिए उन्होंने पिछले साल हुए मिश्रीलाल मेमोरियल विंटर स्विमिंग कंपटीशन 2019 में रिकॉर्ड बनाने के बाद अप्लाय किया था, जिसके वेरिफिकेशन के बाद उन्हें इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट मिला है। 2019 में बनाए गए फास्टेस्ट पैराप्लेजिक स्विमर के रिकॉर्ड के आधार में इन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए अप्लाय किया है।

दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में आ चुका है नाम

वो आगे बताते हैं कि इससे पहले उनका नाम दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में आ चुका है। साल 2014 में उन्होंने एक घंटा 40 मिनट में 6 किलोमिटर की स्विमिंग मुंबई में आयोजित कंपटीशन में किया था। जबकि साल 2017 में उन्होंने गोवा में आयोजित स्विमिंग कंपटीशन में 8 किलमिटर की तैराकी की थी।

इन दोनों जगहों में इनके द्वारा बनाए गए पैलाप्लेजिक स्विमर रिकॉर्ड अब तक किसी ने नहीं बनाया है। इसके अलावा इन्हें 2019 में बिहार खेल रत्न सम्मान और बिहार सरकार की ओर से अंतराराष्ट्रीय खेल सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। वो अभी इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया के ऑफिशियल आइकॉन भी हैं।

मो. शम्स बताते हैं कि वो बिल्कुल आम लोगों की तरह थे लेकिन साल 2010 में उन्हें स्पाइनल ट्यूमर हो गया था। उस समय सफलतापूर्वक ऑपरेशन नहीं हो पाने के कारण उनके सीने के नीचे का हिस्सा पैरालाइज्ड हो गया।

अचानक आए इस बदलाव के लिए वो बिल्कुल तैयार नहीं थे। साल 2011 में वो मुंबई में स्थित पैराप्लेजिक फॉउंडेशन रिहैबिलिटेशन सेंटर गए। वहां उनकी मुलाकात राजा राम घाग से हुई, जो विकलांग होने बावजूद साल 1988 में इंग्लिश चैनल को पार कर रिकॉर्ड बनाया था।

उनके मोटिवेट करने पर उन्होंने स्विमिंग की ओर अपना पहला कदम बढ़ाया। वो दिन और आज का दिन है, उन कमियों को दरकिनार कर अपने लक्षय को प्राप्त करने के लिए पूरी लगन के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं।

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