COVID 19: SC ने दिया जेलों में बंद कैदियों को रिहा करने के लिए पैनल का गठन करने का निर्देश

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि योग को रोकना नहीं चाहिए, "इन सभी गतिविधियों को बंद न करें। कुछ भी ऐसा न करें जिससे भय पैदा हो।

 

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में कैदियों की संख्या को कम करने के लिए राज्यों से उन कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए विचार करने पर कहा है जो अधिकतम 7 साल की सजा काट रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने राज्य सरकारों को उच्च शक्ति समिति का गठन करने को कहा है जो यह निर्धारित करेगी कि कौन सी श्रेणी के अपराधियों को या मुकदमों के तहत पैरोल या अंतरिम जमानत दी जा सकती है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामों को देखने और अमिक्स क्यूरी दुष्यंत दवे व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिए गए सुझावों के बाद शीर्ष अदालत ने राज्यों को एक पैनल गठित करने और कैदियों से संबंधित निर्णय लेने का निर्देश दिया।


इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तिहाड़ जेल के बारे में अदालत को बताया और कहा कि कैदियों से मुलाकात रद्द कर दी गई हैं, लेकिन कैदी फोन पर अपने परिजनों से बात कर सकते हैं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि जेलों के अंदर पर्याप्त संख्या में अस्पताल उपलब्ध हैं। शाम को जेल परिसर में योग, और अन्य गतिविधियां की जाती हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि योग को रोकना नहीं चाहिए, "इन सभी गतिविधियों को बंद न करें। कुछ भी ऐसा न करें जिससे भय पैदा हो।" दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस प्रकोप के मद्देनज़र देश भर की जेलों में बंद कैदियों की चिकित्सा सहायता के लिए स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है।


16 मार्च को मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, महानिदेशकों (कारागार) और सभी राज्यों के सामाजिक कल्याण मंत्रालयों को नोटिस जारी किया और पूछा था कि वे क्या कदम उठा रहे हैं। पीठ ने वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे को अमिक्स क्यूरी भी नियुक्त किया है।


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