व्यवस्था का विरोध ही बस पत्रकार का एकमात्र धर्म है - अभिसार शर्मा

शायद इमर्जेन्सी के बाद मोदिराज में पहली बार पत्रकारों पर ही नहीं पत्रकारिता पर इतने सवाल उठे हैं । पिछले पाँच साल में सरकार से मुश्किल सवाल पूछना तो दूर , कई पत्रकारों ने तो एक ख़ास पार्टी का प्रचार ही करना शुरू कर दिया है । ऐसे में जिन पत्रकारों ने सरकारी फ़रमान मानने से इंकार किया उनको अक्सर भारी क़ीमत चुकाने पड़ी है । हाल ही में टीवी न्यूज़ के जाने माने चेहरे अभिसार शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ । मोदी सरकार के सरासर झूठ को उजागर करने के लिए उन्हें नौकरी गवानी पड़ी । पर उसके बाद से सोशल मीडिया से और ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलस के माध्यम से अभिसार की पहुँच और गरिमा दोनों में बढ़ोतरी ही हुई है, ऐसा कहा जाना ग़लत नहीं होगा । इस ख़ास बातचीत में अभिसार पत्रकारिता पर, सोशल मीडिया पर , मोदिराज में पत्रकारों की स्थिति पर एक खुल कर अपनी बात रखते हुए नज़र आ रहे है । मुंबई में आयोजित netizens for democracy के मंच पर अपनी बात रखने के बाद CJP से एक ख़ास बातचीत में अभिसार शर्मा

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