हां तो श्रीमान् कोविद-19 जी, यह कहा जाता है कि आप वुहान में पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े हैं ?

कोविद -19 के साथ अब्दुल रशीद अगवान का साक्षात्कार

 

अगवान: हां तो श्रीमान् कोविद-19 जी, यह कहा जाता है कि आप वुहान में पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े हैं ?
कोविद-19: मैं ठीक से नहीं जानता। कुछ लोग कहते हैं कि मैं दुनिया की आबादी को कम करने के लिए यहूदीवादियों द्वारा बनाया गया हूं। एक राय यह भी है कि सीआईए ने मुझे चीनी अर्थव्यवस्था को नष्ट करने के लिए लॉन्च किया है, जबकि यूएसए ने आरोप लगाया है कि एक चीनी प्रयोगशाला ने मुझे जैविक हथियार के रूप में जन्म दिया है। मुसलमानों का मानना ​​है कि अल्लाह ने मुझे उनके दुश्मनों को सज़ा देने के लिए बनाया है। कुछ शाकाहारी लोगों का मानना ​​है कि मैं पृथ्वी से सर्वभक्क्षी चीनियों को मिटाने के लिए भगवान का अवतार हूं। वास्तव में, यह निश्चित नहीं है कि मैं कौन हूं? बस मुझे इतना याद है कि जब मैंने दुनिया पर अपनी पहली नज़र डाली थी तो मैंने खुद को वुहान के वेट मार्केट के एक शौचालय की दीवार पर चिपका हुआ पाया था, जहां से एक महिला विक्रेता ने मुझे दूसरों को प्रेषित किया और जल्द ही मैं लगभग सर्वव्यापी हो गया।


अगवान: आपका मिशन क्या है?
कोविद-19: मुझे दुनिया में सुधार के लिए एक आंतरिक आग्रह महसूस होता है। मैं देखता हूं कि जाति, राष्ट्रवाद, धर्म और इतिहास के नाम पर मानवता के अधिकांश हिस्से को कष्ट पहुंचाया जा रहा है। मैं देखता हूं कि कैसे मानव जाति का एक तबक़ा पर्यावरण, यानी अपने ही घर में तबाही मचा रहा है। इसलिए, मैं विभाजनकारी प्रवृत्तियों के खिलाफ हूं। बेशक, मैं उस मानव जाति के भी खिलाफ हूं जो दुनिया के अन्य जीवों का सम्मान करने में विफल रही। मैं राष्ट्रवाद को महत्व नहीं देता। मैं धार्मिक पाखंडों की परवाह नहीं करता। यहां तक ​​कि मैं उस जनता के लिए भी परेशान नहीं हूं जो अत्याचारियों को चुनती है। मैं उन सभी को कुछ सबक़ सिखाना चाहूंगा।

अगवान: आप शायद इस बात से सहमत होंगे कि नस्ल, देश, धर्म और इतिहास के कारण लोगों में एक प्राकृतिक विविधता पाई जाती है।
कोविद-19: मेरे विचार में, वे सभी एक-ही-से-अलग हैं। जैसे कि पेड़ एक इकाई है, हालांकि उसकी जड़ें, तना, पत्ते, फूल और फल अलग-अलग दिखाई देते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मानव जाति का डीएनए 99.9% एक जैसा है। राष्ट्रीय सीमाएं काल्पनिक हैं। सभी धर्म अपने मूल को एक ही सर्वोच्च सत्ता से पैदा होने का दावा करते हैं। इतिहास अतीत की एक कहानी मात्र है। यदि वे मेरी उत्पत्ति के कुछ महीनों के इतिहास के बारे में भी सुनिश्चित नहीं हो सकते हैं, तो वे अपने प्रागितिहास सहित अपने दूर के अतीत में कैसे उत्साहपूर्वक विश्वास कर रहे हैं। अफसोस! मनुष्य अपने स्व-निर्मित भ्रम में रहता है। मैं उसे इस मायाजाल से बाहर आने के लिए मजबूर कर रहा हूं।


अगवान :आप अपने मिशन में कहां तक सफल हुए हैं ?
कोविद-19: सबसे पहले मैंने मुख्यअपराधी - मानव - को ही किसी और को या आपस में अन्य को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए घर में क़ैद कर दिया है। जो लोग मेरा हुक्म नहीं मानेंगे, उन्हें भुगतना पड़ेगा। इस वैश्विक लॉकडाउन और दो अरब नज़रबंद क़ैदियों के साथ, प्रकृति अपने हिस्से का दावा कर रही है। वायु को शुद्ध किया गया है। नदियां साफ हो रही हैं। जानवर कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र हैं। पृथ्वी का हरित कालीन विस्तार कर रहा है। ओज़ोन परत ठीक हो रही है। अपराधों में कमी आई है। धार्मिक कट्टरता का पाखंड उजागर हुआ है। वैचारिक ध्रुवीयता निरर्थक होती जा रही है। अब तक, यही सब कुछ।
अगवान : लेकिन, लाखों लोग पीड़ित हैं, हर दिन हजारों लोग मर रहे हैं
कोविद-19: मुझे दोष नहीं दिया जाना चाहिये। यह लोगों का अपना चुना हुआ भाग्य है। वे बेहतर प्रणाली, बेहतर नेता और जीवन के बेहतर सिद्धांतों को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, उनका लालच प्रकृति में अद्वितीय है और लगभग अतोषणीय है, जो उन्हें एक सही निर्णय लेने से विचलित करता है। यदि मनुष्य एक वर्ष में अरबों जीवन-रूपों के साथ हज़ारों प्रजातियों को नष्ट कर रहा है, तो उसे दया की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है। मानव-विनाश पर रोने वाला कोई भी नहीं है।

अगवान: मानव समाज में सुधार करने के लिए आपकी क्या सलाह है ?
कोविद-19: मनुष्य को न्याय, स्वतंत्रता, गरिमा, दया, समानता, ज्ञान और भाईचारे पर आधारित एक वैश्विक प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जो न केवल मानव समाज के भीतर बल्कि पृथ्वी पर सभी जीवन-रूपों के लिए समान रूप से उपयोगी हो। प्रकृति में हर चीज का अपना नियत हिस्सा है, और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। लालच प्रलयकारी है। मनुष्य को मेरे आपदाकाल के दौरान एक दूसरे की परवाह और संसाधनों को साझा करने का पाठ सीखने दो। उसे लालच के अपने खोल को तोड़ने दो या दुष्परिणामों का सामना करने दो, क्योंकि मैं अपने मिशन के पूरा होने तक रुकने वाला नहीं हूं। यदि मैं विफल भी रहता हूं, तो मानवता पर प्रहार करने के लिए प्रकृति में मेरे जैसे और भी ख़तरनाक़ हथियार मौजूद हैं। जैसा कि मैंने कहा है, जो कुछ भी हो रहा है वह एक मानवीय विकल्प का ही परिणाम है। मनुष्य के पास सुखद भविष्य चुनने का विकल्प भी मौजूद है। यदि वह बुद्धिमान है, जैसा कि दावा करता है, तो वह सही विकल्प चुनेगा।

 

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