हिंसा के किसी भी कृत्य को जायज नहीं ठहराया जा सकता : गांधीवादी विचारक

यहां राष्ट्रीय गांधी संग्राहलय के पूर्व निदेशक वाई पी आनंद ने कहा कि हिंसा किसी के भी खिलाफ हो उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता भले ही वह अपने दुश्मन के ही खिलाफ क्यों न हो।

यी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) कई गांधीवादी विचारकों ने शनिवार को कहा कि हत्या के किसी भी कृत्य को जायज नहीं ठहराया जा सकता और सभी मुद्दों का समाधान अहिंसक तरीके से होना चाहिए। 
ये बातें पुस्तक ‘गिव नॉनकिलिंग अ चांस : आर नॉनकिलिंग सोसाइटीज पॉसिबल’ के यहां गांधी स्मृति और दर्शन समिति में विमोचन के मौके पर कही गईं। 
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बुलाए गए थे लेकिन आयोजकों ने कहा कि कुछ आकस्मिकता के चलते वह इसमें नहीं आ पाए। 
गांधी पीस मिशन के प्रमुख एन राधाकृष्णन ने कहा, “मनुष्य प्रकृति से अहिंसक है लेकिन कुछ सामाजिक असामान्यताएं उन्हें हिंसक बना देती हैं। और इसलिए, एक शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण दुनिया के लिए हमें छात्रों एवं अन्य लोगों को सिखाने और उनमें अहिंसा के भाव विकसित करने की जरूरत है।” 
यह कार्यक्रम बिरला हाउस में गांधी स्मारक के मुख्य सभाकक्ष में हुआ जहां 30 जनवरी, 1948 को उनकी हत्या कर दी गई थी।

यहां राष्ट्रीय गांधी संग्राहलय के पूर्व निदेशक वाई पी आनंद ने कहा कि हिंसा किसी के भी खिलाफ हो उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता भले ही वह अपने दुश्मन के ही खिलाफ क्यों न हो। 
लोटस टेंपल के राष्ट्रीय न्यासी ए.के.मर्चेंट ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रही हिंसाओं का जिक्र किया और कहा कि केवल गैर हिंसक समाज के जरिए ही धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है।

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