सऊदी अरब में कई आसनों का डेमोस्ट्रेशन तो महिलाओं ने किया/नरेंद्र मोदी

Asia Times Desk

नई दिल्ली.नरेंद्र मोदी रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में 45वीं बार देशवासियों के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने भारत-अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच का जिक्र किया। जीएसटी को उन्होंने ईमानदारी की जीत बताया। मन की बात कार्यक्रम में मोदी लोगों से विभिन्न मुद्दों पर बात करते हैं। साथ ही वे लोगों के सुझावों और उनके अनुभवों को भी शामिल करते हैं।

खिलाड़ी भावना जरूरी

कुछ दिन पहले बेंगलुरु में अफगानिस्तान-भारत के बीच ऐतिहासिक मैच हुआ। यह अफगानिस्तान का पहला टेस्ट मैच था। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने लिखा था राशिद क्रिकेट की दुनिया का एसेट हैं। यह पहला मैच था इसलिए याद रहना तो जरूरी है। मेरे लिए अलग वजह से याद करने वाला है। भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय अफगानिस्तान की टीम को आमंत्रित किया और दोनों टीमों ने साथ में फोटो खिंचाई। खिलाड़ी भावना क्या होती है, इससे हम ये सीख सकते हैं। भारत और अफगानिस्तान दोनों टीमों को मेरी शुभकामनाएं हैं।

जोड़ने का काम करता है योग
मोदी ने कहा कि योग करने में पूरी दुनिया एकजुट नजर आई। सऊदी अरब में कई आसनों का डेमोस्ट्रेशन तो महिलाओं ने किया। योग सभी सीमाओं केा तोड़कर जोड़ने का काम करता है। लोगों ने इसे बहुत बड़ा उत्सव बना दिया। अहमदाबाद का एक दृश्य तो दिल को छूने वाला था। वहां 750 दिव्यांग भाई-बहनों ने योग करके विश्व कीर्तिमान बना डाला। वसुधैव कुटुम्बकम के जिस भाव को हम जीते आए हैं, योग ने उसे साबित किया है। योग से वेवनेस की जो मुहिम चली है अधिक से अधिक लोग जीवन का हिस्सा बनाएंगे।
“लोगों ने नमो ऐप पर डॉक्टरों के बारे में बोलने की अपील की है। हम वो लोग हैं जो स्वाभावत: मां को भगवान के बराबर मानते हैं। मां जीवन देती है तो डॉक्टर हमें पुनर्जन्म देता है। डॉक्टर की भूमिका सिर्फ इलाज करने तक नहीं होती, वे परिवार को हिस्सा होते हैं। डॉक्टरों के पास मेडिकल की एक्सपर्टाइज तो होती है,उसे जनरल लाइफ का भी नॉलेज होता है। वह जानता है कि इसका जीवन पर क्या असर होता है। मन की बात के माध्यम से 1 जुलाई को आने वाले डॉक्टर्स डे की शुभकामनाएं देता हूं।’

कबीर-नानक भारत के महान गुरु
मोदी ने कहा कि भारत में कोई ऐसा दिन नहीं है, जिस दिन कोई न कोई ऐतिहासिक घटना न जुड़ी हो। देश के कोने-कोने में महान हस्तियां हुई हैं। जब मैं गुजरात में था तो वहां कबीरगढ़ में एक बड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन किया था। माना जाता था कि मगहर में जिसकी मृत्यु होती है वह स्वर्ग नहीं जाता। मगहर को अपवित्र माना जाता था। कबीर इसे नहीं मानते थे। ऐसी कुरीतियों को तोड़ने का कबीर ने काम किया। वे मगहर गए और वहीं शरीर त्यागा। उनकी रचनाओं में यही आदर्श देखने को मिलता है। उन्होंने सामाजिक समरसता पर काफी जोर दिया था। उन्होंने लिखा था- जात ने पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।”

“कबीर का एक दोहा है- गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। ऐसे ही जगतगुरु हैं गुरुनानक देव। गुरुनानक देव ने समाज में जातिगत भेदभाव खत्म करने और पूरी मानव जाति को गले लगाने की शिक्षा दी। वे कहते थे गरीब और जरूरतमंदों की सेवा ही भगवान की सेवा है। 2019 में उनका 550 वां प्रकाश वर्ष मनाया जाएगा। मेरी लोगों से अपील है कि इसे कैसे मनाया जाए, उस पर हम सोचें और तैयारियां करें। गौरव के साथ इस प्रकाश पर्व को प्रेरणा पर्व बनाएं।”

जीएसटी ईमानदारी की जीत
मोदी ने कहा, “जीएसटी को एक साल पूरा होने वाला है। वन नेशन, वन टैक्स देश के लोगों का सपना था, वो आज हकीकत में बदल चुका है। ये कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का अच्छा उदाहरण कहा जा सकता है। जीएसटी ईमानदारी की जीत है। अब रिफंड से लेकर रिटर्न तक सबकुछ ऑनलाइन हो रहा है। जीएसटी काउंसिल की अब तक 27 बैठक हो चुकी हैं। काउंसिल में कई विचारधाराओं के लोग हैं जो मिलजुलकर देश और लोगों के हित में फैसले लेते हैं।”

किसानों की हालत बेहतर हुई
मोदी के मुताबिक, “पहले जो किसान अपने खेतों में एक ही फसल पर निर्भर हुआ करते थे, उपज भी अच्छी नहीं होती थी और मुनाफ़ा भी ज़्यादा नहीं होता था। आज वे न केवल सब्जियां उगा रहे हैं और बल्कि अपनी सब्जियों की मार्केटिंग भी ट्रस्ट के माध्यम से कर अच्छे दाम पा रहे हैं। एक तरफ फसल के उत्पाद से लेकर के मार्केटिंग तक पूरी चेन में किसानों की एक प्रमुख भूमिका है तो दूसरी तरफ मुनाफे में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास है। फसल अच्छी हो, उसके लिए अच्छे बीज हों, इसके लिए अलग सीड-बैंक बनाया गया है। बेंगलुरु में कॉरपोरेट, आईटी इंजीनियर्स ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक समृद्धि ट्रस्ट बनाया है। ये लोग किसानों से जुड़ते गए, योजनाएं बनाते गए और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सफल प्रयास करते रहे।”

लोगों से जाने उनके जीवन में आ रहे बदलाव

मोदी ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में मुझे वीडियो कॉल के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों से बात करने का अवसर मिला। फाइलों से परे जाकर लोगों के जीवन में जो बदलाव आ रहे हैं, उनके बारे में सीधा उन्हीं से जानने का अवसर मिला। दूर-सुदूर गांवों में बेटियां कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से गांवों के बुजुर्गों की पेंशन से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक की सेवाएं दे रही हैं। छत्तीसगढ़ की एक बहन सीताफल इकट्ठा कर उसकी आइसक्रीम बनाकर व्यवसाय करती है। झारखंड में अंजन प्रकाश की तरह देश के लाखों युवा औषधि केंद्र चलाने के साथ-साथ आस-पास के गावों में जाकर सस्ती दवाइयां मुहैया करवा रहे हैं। पश्चिम बंगाल का नौजवान केवल अपना सफल व्यवसाय ही नहीं कर रहा, दस-पंद्रह और लोगों को नौकरी भी दे रहा है। तमिलनाडु, पंजाब, गोवा के स्कूल के छात्र अपनी छोटी उम्र में स्कूल की लैब में वेस्ट मैनेजमेंट पर काम कर रहे है।”

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