संविधान की पालना मुल्क की तरक्क़ी के लिए ज़रूरी – डाॅ. आलम

देश भर के 60 प्रोफेसर, स्कोलर एवं शोधार्थियों ने सेमीनार विषय पर किया पत्रों का वाचन

एशिया टाइम्स

जोधपुर 24 अक्टूबर:- देश के संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, न्याय, समानता और भाईचारा की चार मूल बातें कही गई है। इसको हमेशा जिन्दा रखने की निरन्तर कोशिश करनी चाहिए। वो मुल्क तरक्क़ी नहीं कर सकता जो संविधान की प्रस्तावना इन मूल बातोें की पालना नहीं करता।
ये कहना है इंसटीट्यूट आॅफ आब्जेक्टिव स्टडीज (आईओएस) के चेयरमेन डाॅ. मोहम्मद मंजूर आलम का। वे इंसटीट्यूट आॅफ आब्जेक्टिव स्टडीज (आईओएस), नई दिल्ली एवं मारवाड़ मुस्लिम एज्यूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारत के बेहतर भविष्य के लिए इस्लामी अध्ययन के माध्यम से समानता, न्याय तथा भाईचारा‘ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के समापन सत्र में बोल रहे थे।
डाॅ. आलम ने आगे कहा कि जो भी संविधान की इस प्रस्तावना को कम करने या तोडने-मरोडने या संविधान की आत्मा को खत्म करने की कोशिश करेगा। तो वो देश का नुकसान करेगा। इस्लाम ने भी हमेशा स्वतंत्रता, न्याय, समानता और भाईचारा को आगे बढाने की बात कहीं है। इन्हीं सब बातों को न सिर्फ देश बल्कि दुनिया में पुनर्जीवित करने और इन्सानियत को बढावा देना ही इस सेमीनार का मक़़सद है।
अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शाह वलीउल्लाह रिसर्च सेल के पूर्व निदेशक प्रोफेसर यासीन मज़हर सिद्दीकी ने अपने समापन भाषण में कहा कि हम सबको मिलजुलकर एकजुटता के साथ हिन्दुस्तान की सभी कोमों के लोगों को यह समझाना होगा कि इंन्सानियत की तरक्की ही हिन्दुस्तान की तरक्क़ी है।
मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेन्ट पद्म श्री प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने दो दिन के इस सेमीनार के रिजोलूशन (प्रस्ताव) को पेश करते हुए कहा कि देश में इस्लाम के हवाले से एक बार फिर परस्पर सहयोग, सद्भावना, शान्ति व प्रेम का वातावरण पैदा हो और जो मानवीय मूल्य है उनको आगे बढाया जाये। साथ ही अन्य धर्मों को मानने वालों के साथ भी बौद्धिक चर्चाएं शुरू होनी चाहिए। इस्लाम की बेहतर छवि आम लोगों तक पहंुचाने के लिए किताबांे का प्रकाशन हो। इसके लिए मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी में शीघ्र ही इस्लामिक स्टडीज विभाग भी शुरू होगा। इस्लामी धर्मशास्त्र में पाठ (टेक्स्ट) पर जोर होता है और इस्लामिक स्टडीज में सन्दर्भ (काॅन्टेक्स्ट) पर जोर दिया जाता है।
सोसायटी के महासचिव मोहम्मद अतीक ने कहा कि सेमीनार में देश भर की समस्याओं को सकारात्मक सोच के साथ हल करने की बात कहीं गई। एकता और भाईचारे के सूत्र के साथ हम सब कैसे आगे बढ़़ें ताकि देश तरक्क़ी सुनिश्चित हो।
सोसायटी के प्रोग्राम डायरेक्टर मोहम्मद अमीन ने जानकारी दी कि दो दिवसीय सेमीनार में अलग-अलग विषयों के विभिन्न सत्रों में नई दिल्ली के प्रोफेसर मोहम्मद अय्यूब नदवी, प्रो. हसीना हाशिआ, डाॅ. खुर्शीद अफाक, डाॅ मोहम्मद मशीउल्लाह खान, डाॅ. मुश्ताक तेजरवी, प्रो. इक्तिदार मोहम्मद खान, प्रो. नज़मुस सहर, प्रो. मुहम्मदुल्लाह कासमी, डाॅ मोहम्मद अरशद, डाॅ जावेद अख्तर, डाॅ मोहम्मद ओसामा, प्रो. मोहम्मद तहसीन ज़मान, डाॅ. सुहैब आलम, प्रो. जावेद अहमद खान, डाॅ. मुजीब अख्तर, मुदीर अबु आला सैयद सुब्हानी, रिसर्च स्कोलर सबा बिन मोहम्मद, डाॅ. मुहम्मद खालिद खान, डाॅ मुहम्मद उमर फारूक, रिसर्च स्कोलर मोहम्मद अशरफुल कौसर, रिसर्च स्कोलर शफीक शेख, रिसर्च स्कोलर मोहम्मद इरशाद आलम, अलीगढ़ के डाॅ. रेहान अख्तर कासमी, डाॅ. इहसानुल्लाह फहद, डाॅ. एम तारीक अय्यूब नदवी, रिसर्च स्कोलर मुज्तबा फारूक़, डाॅ नदीम अशरफ, डाॅ. जुबेर जफर खान, श्रीनगर के डाॅ शकील अहमद, कश्मीर के रिसर्च स्कोलर इरफान जलाल, डाॅ नसीम गुल, केरला के प्रो. अशमिल रिशाद टी, रिसर्च स्कोलर सादिक अली एन., जफरूद्दीन अली एन., जफरूद्दीन ए.टी., हैदराबाद के प्रो. मोशिन उस्मानी नदवी, डाॅ मोहम्मद फहीम अख्तर नदवी, आईओएस के वित्त सचिव इश्तियाक दानिश, जोधपुर के मोहतमिम शाहिद हुसनै नदवी सहित देश भर के विभिन्न विश्व विद्यालयों के 60 प्रोफेसर, स्कोलर एवं शोधार्थियों ने चर्चा करते हुए जिन पत्रों का वाचन किया। इन पत्रों को बाद में सम्पादित करके एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया जायेगा।
यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डाॅ इमरान खान पठान ने बताया कि सभी प्रतिभागियों को आईओएस की ओर से मोमेन्टो व प्रशस्ति पत्र वितरित किये गये। पूर्व में सोसायटी की ओर से अतिथियों का साफा, माला व स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया। अन्त में सभी प्रतिभागियों ने बुझावड़ स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी का अवलोकन भी किया।
सेमीनार मेें सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल अजीज, पूर्व अध्यक्ष हाजी अबादुल्लाह कुरैशी, उपाध्यक्ष नजीर खां, कोषाध्यक्ष हाजी मोहम्मद इस्हाक, सदस्य मोहम्मद इस्माईल, रऊफ अंसारी, फिरोज अहमद क़़ाज़ी, ज़की अहमद, सहित राष्ट्रीय स्तर के प्रोफेसर, शिक्षाविद्, धर्मगुरू, आमजन एवं विद्यार्थीयों ने शिर्कत की। संचालन आईओएस के वित्त सचिव प्रोफेसर इश्तियाक दानिश ने किया। धन्यवाद यूनिवर्सिटी प्रेसिडेन्ट प्रोफेसर अख्तरूल वासे ने दिया।

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