वोटर माता की जय : बिहार की महिला वोटरों की नब्ज़

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इस किताब के शीर्षक अध्याय ‘वोटर माता की जय’ का एक अंश : ‘किन्हीं भी चुनावी जुमलों या वादों में महिलाओं को आकर्षित करने के लिए हमेशा कुछ-न-कुछ सामग्री ज़रूर मिलेगी. आज के दौर की यह ख़ासियत है कि महिलाएं न केवल इन वादों को समझती हैं, बल्कि इनकी असलियत की माप-जोख करके ही मतदान के लिए उतरती हैं. महिला वोटर आमतौर पर जाति-धर्म एवं रिश्तेदारी निभाने के लिए वोट न देकर अपने परिवार का जीवन बेहतर बनाने के लिए वोट देती हैं.

जहां पुरुष वोटरों को जाति या धर्म के नाम पर बहकाया जा सकता है, वहीं महिलाएं अमूमन इस बहकावे से दूर होती हैं. देश में लगभग हर बार यह देखा गया है कि पैसे या शराब की घूस देकर पुरुषों को वोट देने के लिए बाध्य किया जाता है. महिलाओं के साथ ऐसा कभी नहीं किया जा सकता.

पहली बात तो यह है कि इस तरह की रिश्वतखोरी रात के अंधेरे में की जाती है और महिलाएं उस समय विचरण नहीं करतीं. दूसरी बात कि जो लोग शराब पिलाकर उनके घर के पुरुषों को बहकाते हैं, वे यह नहीं समझ पाते कि उन्होंने उस घर की महिला का वोट खो दिया है. जिस पार्टी की वजह से आदमी लोभ-लालच में आकर या शराब पीकर बेसुध पड़ा रहे या फिर घर में दंगा करे, उसे कभी भी महिलाओं का वोट हासिल नहीं हो सकता.’


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