बाबरी मस्जिद विवाद: रामलला विराजमान ने पेश किए ASI की रिपोर्ट से जुड़े सबूत

Awais Ahmad

अयोध्या मामले की सुनवाई के आज सातवें दिन रामलला विराजमान के वकील ने पुरातत्व से जुड़े सबूत पेश किए। रामलला की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस वैद्यनाथन ने विवादित ज़मीन  के नक्शे और फोटोग्राफ कोर्ट को दिखाए। वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल की खुदाई के दौरान मिले खम्भों में श्री कृष्ण, शिव तांडव और श्री राम के बाल रूप की तस्वीर नज़र आती है। सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि पक्का निर्माण में जहां तीन गुम्बद बनाए गए थे, वहां बाल रूप में राम की मूर्ति थी। वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिदों में देवताओं की तस्वीरों वाले खम्बे नही होते है, खम्बों और छत पर बनी मूर्तियां, तस्वीर मंदिरों में ही होते है और हिन्दू परंपरा भी यही है। वैद्यनाथन ने ये भी कहा कि कमिश्नर की रिपोर्ट में पाषाण स्तंभों पर राम जन्मभूमि यात्रा लिखी है।

रामलला की ओर सी एस वैद्यनाथन की दलील- विवादित ज़मीन पर मुस्लिमों ने कभी नमाज़ पढ़ी हो, इसके चलते उनका ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं हो जाता। अगर गली में नमाज़ पढ़ी जाती है, तो इसका मतलब ये नहीं कि नमाज़ पढ़ने वालों का गली पर कब्ज़ा हो गया।

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन ने दलील दी कि विवादित जगह पर भले ही मुस्लिम पक्षकारों द्वारों अपने कब्ज़े को सही ठहराने के लिए इसे कभी मस्ज़िद के तौर पर इस्तेमाल किया गया हो, पर शरीयत कानून के लिहाज से ये कभी वैध मस्ज़िद नहीं रही। वहाँ मिले स्तम्भों पर मिली तस्वीरे इस्लामिक आस्था और विश्वास के अनुरूप नहीं है।

सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि सिर्फ नमाज़ अदा करने से वह जगह उनकी नही हो सकती जब तक वह आपकी सम्पति न हो। वैद्यनाथन ने दलील दी कि मुसलमान कहीं भी नमाज पढ़ लेते हैं।  मुसलमानों के गली में नमाज पढ़ने से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि वहां उनका मालिकाना हक हो जाता है।सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा कि कहीं पर भी नमाज़ अदा करने की बात गलत है, यह इस्लाम की सही व्याख्या नहीं है।

रामलला के वकील ने दलील दी कि ASI की रिपोर्ट से साफ है कि बाबरी मस्ज़िद किसी खाली पड़ी ज़मीन पर नहीं बनाई गई थी, वहां 200 ईसा पूर्व एक विशालकाय निर्माण था। इसपर जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने पूछा कि विवादित जगह पर एक कब्र भी पाई गई थी। इसको कैसे देखा जाये? रामलला के वकील ने अपने जवाब में कहा कि ‘वो कब्र बहुत बाद के यानि मंदिर के समय से बहुत बाद के हैं।’ सोमवार को भी रामलला विराजमान की ओर से दलील जारी रहेगी।

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