बाबरी मस्जिद विवाद मामला: 40 वां दिन: फैसला सुरक्षित; 23 दिन में सुप्रीम कोर्ट दे सकता है ऐतिहासिक निर्णय

Awais Ahmad

अयोध्या बाबरी मस्जिद रामजन्म भूमि विवाद मामले में सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 23 दिन बाद फैसला आ सकता है। सबसे आखिर में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखी गईं। अब सुप्रीम कोर्ट ने लिखित हलफनामा, मोल्डिंग ऑफ रिलीफ को लिखित में जमा करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई रंजन गोगोई  ने कहा था कि अब आगे और वक्त नहीं दिया जा सकता है। पक्षकारों का आज ही अपनी जिरह पूरी करनी होगी। अभी तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के अपील वापस लेने के कथित दावे पर कोई चर्चा कोर्ट रूम में नहीं हुई है। इसके बाद रामलला विराजमान की ओर से सीएस वैद्यनाथन ने जिरह शुरू की है। जिरह शुरू करते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं, जिससे विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा साबित हो सके।

अयोध्या मध्यस्थता पैनल ने एक सेटलमेंट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है. सूत्रों के मुताबिक, सुन्नी वक्फ बोर्ड इस पर सहमत हो गया है कि विवादित ज़मीन के बदले उसे कई और जगह मस्जिद बनाने के लिए दे दी दिए जाए. हालांकि, इस चर्चा में कई अहम हिंदू और मुस्लिम पक्षकार शामिल नहीं हुए थे।

जाने राजीव धवन ने आज सुनवाई के आखरी अपनी जिरह में क्या कहा

मस्जिद के नक्शे पर छिड़ी बहस
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप जो मैप दिखा रहे है उसमें चबूतरा इनर कोर्ट यार्ड में था? राजीव धवन ने कहा चबूतरा भी मस्जिद का हिस्सा है. मस्जिद की दीवार कब्रगाह के पास से शुरू होती है. 17X21 का चबूतरा था. सब बाहरी अहाते का हिस्सा था.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने नक्शा दिखाते हुए पूछा -लेकिन ये चबूतरा तो अंदर है. हिंदुओ को वहां तक एक्सेस भी था

राजीव धवन- ये गलत धारणा है. आपने शायद नक्शा गलत पकड़ा हुआ है. अब देखें मस्जिद के दोनों ओर कब्रिस्तान है. और हमारी मस्जिद यहां से शुरू होती है. चबूतरा बाहरी अहाते में ही है।

राजीव धवन ने कहा- सेवायत को हिन्दू धर्म मे सिर्फ पूजा का अधिकार है. इस्लाम की तरह उसे मुतवल्ली जैसे अधिकार नहीं मिल सकते. राजीव धवन ने कहा कि वो मोल्ड़िंग ऑफ रिलीफ़ के तहत बाबरी मस्जिद को फिर से बनाने की मांग कर रहे है. मस्जिद को दुबारा बनाने के अधिकार हैं. भले अभी वहाँ मस्जिद नही है लेकिन अभी भी ये जमीन वक़्फ़ की है. हम बाबरी विध्वंस के पहले की स्थिति चाहते है

दो शताब्दी से जमीन मुसलमानों के पास- धवन

मेरी याचिका सिर्फ टाइटल के लिए नहीं है. कई अन्य पहलू हैं. ये घोषणा एक सार्वजनिक वक्फ के लिए है. यह एक सार्वजनिक मस्जिद थी. इसमें मस्जिद, जमीन और कई चीजें शामिल हैं. यदि हिंदू 1855 से पहले टाइटल साबित करने में सक्षम हैं तो मैं इसके जवाब में 2 शताब्दियों से अधिक से पहले ही जगह का मालिक हूं.

मुस्लिम शासकों में फर्क नहीं कर सकते, मुसलमानों के पास दो शताब्दियों से मालिकाना हक है

राजीव धवन ने कहा कि हिन्दू महासभा की तरफ से कैसे चार जवाब दिए गए. अब धवन हिन्दू महासभा के पांडेय के बहस पर अपना पक्ष रख रहे हैं. धवन ने परासरन के बाहर से आए बाबर की ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दलील पर कहा- हम हिंदू और मुस्लिम शासकों में कैसे अंतर कर सकते हैं. 1206 में सल्तनत शुरू हुई, 1206 के बाद से मुसलमान मौजूद थे. इस्लाम ने उन लोगों के लिए आकर्षण पैदा किया जो छुआछात से परेशान थे. बाबर ने लोधी के साथ युद्ध किया जो एक मुस्लिम था. भारत सिर्फ एक नहीं था यह बहुतों का मिश्रण था।.मेरी याचिका सिर्फ टाइटल के लिए नहीं है. कई अन्य पहलू हैं. ये घोषणा एक सार्वजनिक वक्फ के लिए है. यह एक सार्वजनिक मस्जिद थी. इसमें मस्जिद, जमीन और कई चीजें शामिल हैं. यदि हिंदू 1855 से पहले टाइटल साबित करने में सक्षम हैं तो मैं इसके जवाब में 2 शताब्दियों से अधिक से पहले ही जगह का मालिक हूं. सेवायत को हिन्दू धर्म मे सिर्फ पूजा का अधिकार है. इस्लाम की तरह उसे मुतवल्ली जैसे अधिकार नहीं मिल सकते.

हिंदू और मुस्लिम शासकों में अंतर कैसे?- धवन

धवन ने परासरन के बाहर से आए बाबर की ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दलील पर कहा हम हिंदू और मुस्लिम शासकों में कैसे अंतर कर सकते हैं। 1206 में सल्तनत शुरू हुई. 1206 के बाद से मुसलमान मौजूद थे. इस्लाम ने उन लोगों के लिए आकर्षण पैदा किया जो छुआछात से परेशान थे. बाबर ने लोधी के साथ युद्ध किया जो एक मुस्लिम था. भारत सिर्फ एक नहीं था यह बहुतों का मिश्रण था।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- आक्रमणकारियों की बात हो तो सिर्फ नादिरशाह, चंगेज और अंग्रेजों ही नहीं बल्कि आर्यों तक भी जाना होगा

धवन ने कहा कि आक्रमणकारियों की बात हो तो सिर्फ नादिरशाह, तैमूर, चंगेज और अंग्रेज ही नहीं बल्कि आर्यों तक जाना होगा।. लेकिन ये लोग सिर्फ एक खास तरह के लोगों को ही आक्रमणकारी मानते हैं. आर्यों को आक्रमणकारी मानने से उनको परहेज है. जब मीर कासिम आया तो भारत एक देश नहीं बल्कि टुकड़ों में था. लोधी को हराकर आया. तब धीरे धीरे उसने अपना राज बढ़ाया. तब उसकी लड़ाई भारत जे नही रजवाड़ो से थी. शिवाजी के समय राष्ट्रवाद की धारणा बढ़ी.

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- 1886 में फैजाबाद कोर्ट ने कहा था कि वहां हिंदू मंदिर के सबूत नहीं मिले, हिंदुओं ने उसे चुनौती भी नहीं दी

धवन ने फैसले के अनुवाद पर भी उठाए सवाल. पीएन मिश्रा ने अनुवाद को सही ठहराते हुए एक पैरा पढ़ा. धवन ने कहा मिश्रा जी हम आपको सुन चुके हैं, अब कुछ और सुनाने की जरूरत नहीं. बाबर के द्वारा मस्जिद के निर्माण के लिए ग्रांट और लगान माफी गांव देने के दस्तावेज हैं. इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा- ग्रांट से आपके मालिकाना हक की पुष्टि कैसे होती है?

धवन- जमींदारी और दीवानी ज़माने के कायदे देखें तो जमीन के मालिक को ही ग्रांट मिलती थी. पीएन मिश्रा ने आपत्ति जताई तो धवन ने कहा कि इनकी दलील मूर्खतापूर्ण है, क्योंकि इनको भूमि कानून की जानकारी नहीं है. मिश्रा ने कहा कि वो भूमि कानूनों पर दो-दो किताबें लिख चुके हैं और मेरे काबिल दोस्त कह रहे हैं कि मुझे इसकी जानकारी ही नहीं. धवन ने कहा, आपकी किताबों को सलाम है आप उन पर पीएचडी भी कर लें!
धवन ने हिन्दू पक्षकारों की दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि यात्रियों की किताबों के अलावा इनके पास टाइटल यानी मालिकाना हक का कोई सबूत नहीं. इनकी विक्रमादित्य मन्दिर की बात मान भी लें तो भी ये रामजन्मभूमि मन्दिर की दलील से मेल नहीं खाता. 1886 में फैजाबाद कोर्ट कह चुका था कि वहां हिन्दू मन्दिर का कोई सबूत नहीं मिला. हिंदुओं ने उसे चुनौती भी नहीं दी.

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- 6 दिसंबर 1992 को जिसे नष्ट किया गया वो हमारी प्रोपर्टी थी

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- 6 दिसंबर 1992 को जिसे नष्ट किया गया वो हमारी प्रोपर्टी थी.
हम कह चुके हैं कि मुस्लिम वक्फ एक्ट 1860 से ही ये सारा गवर्न होता है. वक्फ सम्पत्ति का मुतवल्ली ही रखरखाव का जिम्मेदार होता है. उसे बोर्ड नियुक्त करता है. सनद यानी रजिस्टर में रज्जब अली ने मस्जिद के लिए फ्री लैंड वाले गांव की जमीन से 323 रुपए की आमदनी ग्रांट के तौर पर दर्ज की है. धवन ने ट्रांसलेशन हुए दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक-एक दस्तावेज के चार-चार मतलब हैं. हमारा अनुवाद ही सही है.

इन्होंने तो सब कुछ अपने मुताबिक बर्बाद कर दिया है. बाबर की जगह बाबर शाह और वक्फ के भी अलग मतलब बताए हैं. उर्दू के भी हिंदी वर्जन लिखे हैं.

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने नक्शा फाड़ने पर कहा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, CJI ने कहा- आप कह सकते हैं मेरे कहने पर आपने कागज फाड़े हैं
धवन ने नक्शा फाडने को लेकर कहा
– मैंने कहा था कि मैं इसे फेंक रहा हूं, चीफ जस्टिस ने कहा कि जो करना है करो
– मैंने फाड दिया. अब वो सोशल मीडिया पर चल रहा है

धवन ने कहा कि कुरान के आधार पर जो दलीलें हिन्दू पक्षकारों ने दी हैं वो आधारहीन हैं. कुरान के हवाले से भी और कानून के हवाले से भी. मेरे हाथ के दस्तावेज वायरल हो रहे हैं. मैंने कहा कि मैं ये फाड़ना चाहता हूं आपने कहा आपकी मर्जी फाड़ दें. मैंने फाड़ दिए. अब मीडिया बता रहा है कि चीफ जस्टिस के कहने पर मैंने कागज फाड़े. CJI ने कहा कि अब स्पष्टीकरण भी हो गया. आप कह सकते हैं कि मेरे कहने पर ही आपने कागज़ फाडे.

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने पक्षकार हिंदू महसभा पर साधा निशान,

धवन ने कहा- हिंदू महासभा 4 हिस्सों में बंटा हुआ है, क्या दूसरे महासभा इनके सपोर्ट में हैंमुस्लिम पक्ष की तरफ से राजीव धवन ने बहस शुरू की. राजीव धवन ने कहा कि धर्मदास ने केवल ये साबित किया कि वो पुजारी हैं न कि गुरू. हिन्दू महासभा की तरफ से सरदार रविरंजन सिंह, दूसरी विकाश सिंह, तीसरा सतीजा और चौथा हरि शंकर जैन चार लोगों के सबूत दिए हैं. ये साबित नहीं कर पा रहे हैं कि वे किस महासभा को लेकर बहस कर रहे हैं. इसका मतलब है महासभा 4 हिस्सो में बंट गया है. क्या दूसरी महासभा इसको सपोर्ट करता है?

जाने हिंदुपक्षकार के वकीलों ने सुनवाई के आखरी दिन क्या कहा 

रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से अब पी एन मिश्रा ने बहस की शुरुवात की

पी एन मिश्रा ने कहा मुस्लिम पक्ष के पास कब्जे को लेकर कोई अधिकार नहीं है लेकिन हिन्दू पक्ष के पास सबूत है. जहांगीर के समय यात्री विलियम फिलिमच ने देखा था कि वहां हिन्दू पूजा कर रहे थे. 1858 के गजेटियर में ये पहली बार सामने आया कि मुस्लिम और हिन्दू दोनो वहां प्राथना करते थे. उसके पहले मुस्लिम वहां नमाज अदा करते थे इसके सबूत नहीं थे. पी एन मिश्रा ने कहा कि हमारी पूजा हमेशा चलती रही है लेकिन मुस्लिम के संबंध में ऐसा कोई सबूत नहीं है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि आप क्रोनोलॉजी पर बहस न करें अपनी बातें लिखित में कोर्ट में दाखिल करें. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप इस्लामिक लॉ पर बहस न करें आप लिमिटेशन पर बहस करें.मिश्रा ने कहा कि इस बात के कई सबूत हैं कि सैकड़ों की संख्या में साधु थे जो मुस्लिम को नमाज के लिए नहीं जाने देते थे.मिश्रा ने कहा लिमिटेशन को लेकर कोर्ट के कई फैसले हैं. लिमिटेशन का समय सीमा 6 साल होती है. जिस दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से याचिका दाखिल नही हुई.पी एन मिश्रा ने कहा कि लिमिटेशन को लेकर हम लिखित जवाब दिया है. पी एन मिश्रा ने बहस पूरी की.

 

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को सुनने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को सुनने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हमनें ये कल ही कह दिया था कि किसी और को नही सुनेंगे.

 

लंच के बाद दोबारा शुरू हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, हिंदू महासभा के हरि शंकर जैन रख रहे हैं दलीलें

हिन्दू महासभा की हरि शंकर जैन ने बहस की शुरुवात की. CJI ने कहा कि हम हरि शंकर जैन, पी एन मिश्रा, राजीव धवन को सुनेंगे. CJI ने कहा कि उसके बाद मोल्ड़िंग ऑफ रिलीफ पर सुनवाई शुरू करेंगे.

 

निर्वाणी अखाड़ा के वकील जयदीप गुप्ता ने रखीं ये दलीलें

निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से वकील जयदीप गुप्ता ने बहस की शुरुआत की. निर्मोही अखाड़ा ने इसका विरोध किया.CJI ने कहा, पांच मिनट इनको सुनने में कोई हर्ज नहीं.निर्वाणी अखाड़ा “हनुमान गढ़ी” की तरफ से कहा गया कि भगवान की मूर्ति बाबा धर्म दास और अन्य के द्वारा रखी गई. बाबा अभिराम दास के खिलाफ इसको लेकर FIR भी दर्ज हुई थी.

बाबा अभिराम दास ने 1962 में पुजारी के रुख में पूजा का अधिकार मांगा था. निर्वाणी अखाड़ा ने कहा कि ये निर्मोही अखाड़ा से अलग है. निर्वाणी अखाड़ा ने कहा कि “सिवायत शिप उनकी है’. इसमें किसी को आपत्ति नहीं. निर्वाणी अखाड़ा की तरफ से बहस पूरी.

 

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने कहा- राम जन्मभूमि का महत्व कैलाश मानसरोवर पर्वत जैसा है
अब गोपाल सिंह विशारद की तरफ से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने बहस शुरू की.रंजीत कुमार ने कहा कि जन्मभूमि का महत्व भी कैलास मानसरोवर जैसा है. मैं वहां गया तो देखा कि हिन्दू ही नहीं बौद्ध भी उस पर्वत की पूजा उपासना करते हैं. बौद्ध वहां के पत्थरों पर पताका लगाकर उसे ज्वेल ऑफ स्नो या रिन पो छे कहते हैं. पूरा पर्वत बिना किसी प्रतिमा के पवित्र और पूजनीय स्थल माना जाता है. रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज किया जाए.

 

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने कहा- राम जन्मभूमि का महत्व कैलाश मानसरोवर जैसा, हिंदू ही नहीं बौद्ध भी उस पर्वत की उपासना करते हैं

अब गोपाल सिंह विशारद की तरफ से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने बहस शुरू की.रंजीत कुमार ने कहा कि जन्मभूमि का महत्व भी कैलास मानसरोवर जैसा है. मैं वहां गया तो देखा कि हिन्दू ही नहीं बौद्ध भी उस पर्वत की पूजा उपासना करते हैं. बौद्ध वहां के पत्थरों पर पताका लगाकर उसे ज्वेल ऑफ स्नो या रिन पो छे कहते हैं. पूरा पर्वत बिना किसी प्रतिमा के पवित्र और पूजनीय स्थल माना जाता है. रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज किया जाए.

 

संपत्ति का मालिक हुए मुस्लिम पक्ष मालिकाना हक का दावा कर रहा है

-वैद्यनाथन ने अपनी बहस आगे बढ़ाई तो CJI ने आगाह किया कि 5 मिनट में अपना जवाब पूरा कर लें.
वैद्यनाथन- हालांकि दोनों पक्ष वहां उपासना कर रहे थे लेकिन मस्जिद को वक़्फ़ करने या डेडिकेशन का कोई प्रमाण या सबूत किसी के पास नहीं है. CJI ने सी एस वैधनाथन को कहा कि अब आपका समय पूरा हो गया है. सी एस वैधनाथन ने कहा कि कुछ मिनट और. इसी बीच गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार बहस के लिए खड़े हुए. CJI ने रंजीत कुमार को कहा कल आपने कहा था कि आप केवल 2 मिनट बहस करेंगे. रंजीत कुमार ने कहा कि दो मिनट में बहस कैसे पूरा करूंगा. CJI ने मुस्कुराते हुए कहा कि कल तो आप 2 मिनट कह रहे थे.उसके बाद कोर्ट में सभी के चेहरे पर मुस्कान आ गई. इसके बाद सी एस वैधनाथन ने बहस को आगे बढ़ाया. सी एस वैधनाथन ने बहस पूरी करते हुए कहा कि बिना संपति के मालिक हुए ” मुस्लिम पक्ष मालिकाना हक का दावा कर रहा है.

रामलला विराजमान पक्ष की तरफ से आज कोर्ट में रखी गईं ये दलीलें

रामलला विराजमान की दलीलें: रामलला विराजमान की तरफ से कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास ऐसे कोई सबूत नही की वो साबित कर सकते कि जमीन पर उनका हक है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से ये दावा किया गया कि वहां 22-23 दिसंबर तक नमाज हो रही थी,लेकिन 1934 तक शुक्रवार तक होती थी.

सवा ग्यारह बजते ही राजीव धवन ने खड़े होकर कहा कि 45 मिनट हो गए हैं. अब इनकी बहस का समय खत्म हो गया. CJI ने मुस्कुराते हुए कहा अभी 10 मिनट बचे हैं, क्योंकि हम दस मिनट देर से बैठे थे. कोर्ट में सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट आई.

निर्मोही अखाड़ा की दलील- ये संभव ही नहीं कि मुसलमानों के रहते 1949 में बैरागी साधु जबरन मूर्ति रख गए जबकि उस दिन जुमा था

निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील जैन – हमारा दावा मन्दिर की भूमि और स्थाई सम्पत्ति पर मालिकाना अधिकार और सेवायत के अधिकार को लेकर है. मुस्लिम पक्षकारों के इस दावे में भी दम नहीं कि 22/23 दिसंबर 1949 की रात बैरागी साधु जबरन इमारत में घुसकर देवता को रख गए. ये मुमकिन ही नहीं कि मुसलमानों के रहते इतनी आसानी से वो घुस गए. जबकि 23 दिसंबर को जुमा था.

निर्मोही अखाड़े की दलील- बाबरी मस्जिद का नाम भी जन्मभूमि मस्जिद था, इनके पास कोई दस्तावेज नहीं हैं, मस्जिद निर्माण का दावा करने वाले ही उसे साबित करें
निर्मोही अखाड़े की कहानी शिवाजी महाराज से शुरू की. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यहां इसका क्या संबन्ध है. निर्मोही अखाड़े के वकील जैन- मैं शुरुआत कर रहा हूं. हम भले कुछ कमजोर हुए लेकिन शिवाजी महाराज के राज में हम शक्तिशाली थे.बाबर ने अयोध्या में मस्जिद बनाई.

जस्टिस चंद्रचूड़- आप मस्जिद बनाने को लेकर नहीं डेडिकेशन यानी समर्पण /लोकार्पण को लेकर जवाब दें. अब उनका दावा है कि उन्होंने बनाई तो उन पर ही बर्डन ऑफ प्रूफ है.मस्जिद को माफी वाले गांव शहनवा और बोहरानपुर देने के दावे की भी पुष्टि नहीं हो पाई है. वैसे तो अंग्रेज कई गांव लगान माफी के लिए रखते थे. अब वो कथित गांव मस्जिद के रखरखाव के लिए ही समर्पित थे इसका कोई प्रमाण मुस्लिम पक्षकार नहीं दे सका है. वो सिर्फ ग्रांट और गांव का दावा तो करते हैं लेकिन ख़सूसी सबूत नही दिखाते. कोई दस्तावेज़ नहीं है. मस्जिद का नाम भी जन्मभूमि मस्जिद है

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