बाबरी मस्जिद विवाद: निर्मोही अखाड़ा ने रामलला के याचिका का विरोध किया

Awais Ahmad

अयोध्या मामले में शुक्रवार को सुनवाई ने 11वें दिन निर्मोही अखाड़े की तरफ से एक बार फिर बहस हुई। निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील कुमार जैन ने रामलला विराजमान की तरफ दायर याचिका पर विरोध जताते हुए कहा कि रामलला के नाम पर किसी और को याचिका दायर करने का हक नहीं है। और  जमीन को निर्मोही अखाड़े को सौंपा जाना चाहिए।

सुशील कुमार जैन ने अपनी दलील की शुरुआत करते हुए कहा कि निर्मोही अखाड़ा विवादित ज़मीन पर मालिकाना हक़ का दावा नहीं कर रहे, सिर्फ  पूजा-प्रबन्धन और कब्जे का अधिकार मांग रहे है। अयोध्या बहुत बड़ा है लेकिन भगवान राम की मूर्ति सिर्फ रामजन्म भूमि पर ही स्थापित की गई थी।

सुशील जैन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा अनंतकाल से जन्मस्थान पर भगवान ‘राम लला विराजमान का एकमात्र आधिकारिक ‘शबैत’  ( देवता का सेवा करने वाला) रहा है और वह वहां पर पूजा के लिये ‘पुरोहित’ नियुक्त करता रहा है। निर्मोही अखाड़े के सेवा करने  के अधिकार को छीन कर जन्मस्थान वाली भूमि पर कब्जा कर लिया गया। सुशील जैन ने ये भी कहा  कि रामलला की ओर से जो निकट सहयोगी देवकी नंदन अग्रवाल बनाये गए है, मैं उन्हें नहीं मानता। वो तो पुजारी भी नहीं है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि जब आप किसी देवता के  सेवादार यानी पुजारी के नाते अपना अधिकार मांगते है तो आप  फिर उस देवता ( रामलला विराजमान) की ओर से दायर अर्जी का विरोध कैसे कर सकते हैं। यदि रामलला की याचिका खारिज हो गई  तो फिर तो अपने आप ही सेवादार होने का आपका दावा भी खारिज हो जाएगा।

निर्मोही अखाड़े के वकील ने सुशील कुमार जैन ने कहा कि हमारा विरोध रामलला विराजमान की स्थान की याचिका का नहीं है। मेरा विरोध देवकीनंदन अग्रवाल को लेकर है जो रामलला के निकट मित्र होने का दावा करते हैं।

सुशील कुमार ने कहा कि मैं एक शबैत के रूप में वक्फ की वकालत कर रहा हूँ। वक्फ एक दान है, इसका उपयोग मुसलमानों द्वारा ही नहीं किया जाता है। जस्टिस बोबडे ने पूछा कि मुसलमानों ने वक्फ का इस्तेमाल किया है और आप कह रहे हैं कि मंदिर एक मस्जिद है? सुशील कुमार ने कहा कि मैं वक्फ संपत्ति का दावा शबैत के तौर पर कर रहा हूँ, वक्फ शब्द का अर्थ ईश्वर को दान है और उसका संबंध केवल मुसलमानों से ही नहीं है, इस लिहाज से मंदिर पर निर्मोही अखाड़ा का अधिकार है।

वकील सुशील कुमार ने कहा हां, मेरे शबैत अधिकारों को हिंदू पक्ष ने चुनौती नहीं दी है। हम देवताओं के बाद से शुर से इस मंदिर के लिए लड़ रहे है। जस्टिस बिबड़े ने पूछा क्या कोई दस्तावेजी सबूत हैं जो बताता है कि आप शबैत हैं।

सुशील जैन ने यह भी दावा किया सिर्फ निर्मोही अखाड़े का नाम नाम गैजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेजो में अंकित है। सिर्फ निर्मोही अखाड़ा ही हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है।

अयोध्या मामले की सुनवाई निर्मोही अखाड़े की दलीलों से ही शुरू हुई थी। लेकिन एक दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से सबूत इकट्ठा करने के लिए और समय दे दिया था। निर्मोही अखाड़े की तरफ से सोमवार की भी दलील जारी रहेगी।

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